क्या करेगी 15 लाख की फौज, युद्ध या मौज! जानें कांग्रेस ने कैसा रचा है डिजीटल ‘चक्रव्यूह’

जयपुर. राजस्थान कांग्रेस अब पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि हाईटेक टैक्नॉलोजी से अपनी रणनीति बना रही है. वह ‘डेटा’ ‘डिजिटल मॉनिटरिंग’ और ‘रियल टाइम रिपोर्ट कार्ड’ के जरिये न केवल संगठन को एक सूत्र में पिरो रही है बल्कि ‘कॉर्पोरेट स्टाइल मैनेजमेंट मॉडल’ पर चलाने का दावा भी कर रही है. राजस्थान कांग्रेस के इस मॉडल से उसकी टॉप लीडरशिप भी खासा इम्प्रेस है. वह गाहे-बगाहे अन्य राज्यों की पीसीसी को राजस्थान से सीख लेने की नसीहत भी देती है. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व राजस्थान के मॉडल का मुरीद हो रहा है. राजस्थान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा का दावा है कि उनकी 15 लाख कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की फौज चुनावी युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है.
दिल्ली में बैठे पार्टी नेतृत्व को अब जयपुर से केवल राजनीतिक रिपोर्ट नहीं बल्कि डिजिटल डेटा, लाइव एक्टिविटी अपडेट, टास्क रिपोर्ट और बूथ स्तर तक की ऑनलाइन मॉनिटरिंग का पूरा सिस्टम भेजा जा रहा है. कांग्रेस के भीतर इसे ‘नया संगठनात्मक मॉडल’ माना जा रहा है, जहां कार्यकर्ता की सक्रियता भाषणों से नहीं बल्कि उसके डिजिटल फुटप्रिंट से मापी जा रही है. एआईसीसी के नये शुरू किए गए ‘कनेक्ट पोर्टल सिस्टम’ पर इन सभी फार्मूलों पर काम करने की वजह से राजस्थान पीसीसी की ओर से टास्क मैनेजमेंट के मामले में ‘नंबर वन’ होने का दावा किया जा रहा है. राजस्थान पीसीसी का एसआईआर माॉडल तो कई राज्यों में हू-ब-हू लागू करने के लिए यहां के लोगों की ओर से उनको ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
राज्यों के संगठनात्मक कामकाज का छह अहम बिंदुओं पर रिव्यू चल रहा हैदरअसल, कांग्रेस हाईकमान ने राजस्थान समेत सभी राज्यों के संगठनात्मक कामकाज का छह अहम बिंदुओं पर रिव्यू शुरू किया है. यह रिपोर्ट सीधे कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपी जा रही है. लेकिन राजस्थान इस रिव्यू में इसलिए अलग नजर आ रहा है. क्योंकि यहां पिछले एक साल में संगठन को ‘डिजिटल मोड’ में बदलने की बड़ी कवायद हुई है. राजस्थान कांग्रेस का दावा है कि पिछले एक वर्ष में करीब 15 लाख लोगों को संगठनात्मक ढांचे से जोड़ा गया है.
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा राजस्थान टीम की वर्किंग को लेकर खासा उत्साहित है.
अब ऑनलाइन टास्क भी दिए जाने लगे हैंयह कवायद केवल सदस्यता अभियान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर जिला, ब्लॉक, मंडल, बूथ, वार्ड और पंचायत समिति स्तर तक नई कार्यकारिणियों का गठन किया गया है. सबसे खास बात यह रही कि इन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सिर्फ पद नहीं दिए गए, बल्कि उन्हें समयबद्ध जिम्मेदारियां और ऑनलाइन टास्क भी दिए जाने लगे हैं. उन्हें रियल टाइम में चेक किया भी गया, जो काम नहीं कर रहे उन लोगों को बदला भी गया.
कैसे काम करता है यह पूरा सिस्टमकांग्रेस का पूरा सिस्टम अब ‘कांग्रेस कनेक्ट पोर्टल’ और डिजिटल मॉनिटरिंग नेटवर्क पर आधारित बताया जा रहा है. पार्टी पदाधिकारियों को रियल टाइम में टास्क दिए जाते हैं. हर काम की टाइमलाइन तय होती है और उसी आधार पर परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार की जाती है. यानी किस जिले में बैठक हुई? किस ब्लॉक ने अभियान चलाया गया? किस मंडल ने बूथ स्तर तक पहुंच बनाई और किस पदाधिकारी ने कितनी सक्रियता दिखाई? कितने लोग उससे जुडे इसका पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है.
कैसे तैयार किया जा रहा है ‘डिजिटल ट्रैक रिकॉर्ड’सूत्रों के मुताबिक ‘डिजिटल ट्रैक रिकॉर्ड’ तैयार किया जा रहा है. इसके लिए केवल रिपोर्ट भेजना ही पर्याप्त नहीं है. हर गतिविधि के साथ फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल एविडेंस भी अपलोड किए जाते हैं. इससे हाईकमान के पास जमीन पर हुई गतिविधियों का ‘डिजिटल ट्रैक रिकॉर्ड’ तैयार हो रहा है. पार्टी नेताओं का दावा है कि अब एक क्लिक पर राजस्थान कांग्रेस के लगभग 15 लाख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता का डेटा देखा जा सकता है. इस पूरे सिस्टम को संचालित करने के लिए राजस्थान कांग्रेस ने एक अत्याधुनिक सेंट्रल वॉर रूम भी स्थापित किया है.
वॉर रूम क्या और कैसे काम करता हैयही वॉर रूम प्रदेश संगठन की डिजिटल मॉनिटरिंग, फीडबैक सिस्टम और टास्क मैनेजमेंट का मुख्य केंद्र बना हुआ है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी यहीं से अपनी विशेष बैठकें लेते हैं और एक क्लिक पर प्रदेश के किसी भी जिले, ब्लॉक या बूथ स्तर के पदाधिकारी से सीधे संवाद करते हैं. संगठन की गतिविधियों, अभियानों और फील्ड अपडेट की लाइव मॉनिटरिंग इसी वॉर रूम से की जाती है.
राहुल गांधी ने किस चीज में खास दिलचस्पी दिखाई थीकांग्रेस के भीतर इस वॉर रूम को संगठन का ‘डिजिटल कमांड सेंटर’ माना जा रहा है. खास बात यह भी रही कि राहुल गांधी भी एक बार अचानक इस वॉर रूम पहुंचे थे और वहां मौजूद पदाधिकारियों से सीधे संवाद कर संगठनात्मक गतिविधियों और अभियान की प्रगति का फीडबैक लिया था. पार्टी नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने बूथ स्तर तक डिजिटल मॉनिटरिंग और लाइव संवाद प्रणाली को लेकर विशेष रुचि दिखाई थी.
क्या केवल पद पर बने रहना पर्याप्त हैकांग्रेस के भीतर इसे ‘डिजिटल जवाबदेही मॉडल’ कहा जा रहा है. यानी अब केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी साबित करना होगा कि पदाधिकारी जमीन पर कितना सक्रिय है. हाईकमान इसी डेटा के आधार पर भविष्य में जिम्मेदारियां तय करने, फेरबदल करने और नए चेहरों को आगे लाने की तैयारी में बताया जा रहा है.



