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अब उम्र के हिसाब से मिलेगा सोशल मीडिया एक्सेस? सरकार बना रही प्लान, जल्द आ सकता है नया नियम

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Last Updated:March 30, 2026, 12:19 IST

सरकार बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए नया प्लान तैयार कर रही है. पूरी तरह बैन की बजाय उम्र के आधार पर पाबंदियां, पेरेंटल कंट्रोल, स्क्रीन टाइम लिमिट और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार हो रहा है, जिससे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बेहतर हो सके.

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अब उम्र के हिसाब से मिलेगा सोशल मीडिया एक्सेस? सरकार बना रही प्लानZoomबच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकार का फोकस.

केंद्र सरकार बच्चों और किशोरों (माइनर्स) के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए नया तरीका सोच रही है. पूरी तरह बैन करने की बजाय उम्र के आधार पर अलग-अलग लेवल की अनुमति देने का प्लान तैयार किया जा रहा है. सरकार की ओर से उद्योग जगत और विशेषज्ञों से चर्चा चल रही है. इसमें उम्र के हिसाब से पेरेंटल कंट्रोल, स्क्रीन टाइम की सीमा, कुछ फीचर्स पर रोक और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाने जैसे सुझाव शामिल हैं.

अभी तक ये तय नहीं हुआ है कि उम्र की सीमा क्या होगी. चर्चा में 13 साल से कम उम्र और 16 साल या उससे ज्यादा उम्र के विकल्पों पर बात हो रही है.

अधिकारी कहते हैं कि अभी जो सेफगार्ड्स हैं, वे काफी नहीं हैं. बच्चे आसानी से झूठी उम्र डालकर अकाउंट बना लेते हैं. ग्रामीण इलाकों और गरीब परिवारों में एक फोन कई लोगों के बीच शेयर होता है, इसलिए उम्र जांच करना मुश्किल है.

सरकार का फोकस बच्चों को ऑनलाइन गलत चीजों से बचाने पर है, लेकिन एकदम बैन लगाने के बजाय संतुलित रास्ता निकालने की कोशिश है. इसमें पैरेंट्स को ज्यादा कंट्रोल देने, प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार बनाने और यूजर्स की उम्र सही-सही चेक करने के तरीके शामिल हो सकते हैं.

नया नियम लागू होने में हो सकती है मुश्किल!विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उम्र की सीमा 16 या 18 साल तय की गई तो प्लेटफॉर्म्स को अपनी नीतियां बदलनी पड़ेंगी. साथ ही प्राइवेसी और कुछ बच्चों के एक्सेस छिन जाने का भी खतरा है. ग्रामीण क्षेत्रों में जहां एक ही डिवाइस पूरे परिवार के पास होता है, वहां यह नियम लागू करना चुनौती भरा होगा.

सरकार अभी भी कई मॉडल पर विचार कर रही है, जैसे उम्र के हिसाब से अलग-अलग लेवल की पाबंदियां लगाना. इस पूरे मामले पर आईटी नियमों में बदलाव करके अमल किया जा सकता है. यह कदम बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में है, लेकिन प्राइवेसी, लागू करने की दिक्कत और डिजिटल एक्सेस को सीमित न करने का भी ध्यान रखा जा रहा है. अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. सरकार सभी पक्षों की राय सुनकर ही आगे बढ़ेगी.

About the AuthorAfreen Afaq

Afreen Afaq has started her career with Network 18 as a Tech Journalist, and has more than six years experience in ‘Mobile-Technology’ beat. She is a high-performing professional with an established and proven …और पढ़ें

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Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

March 30, 2026, 12:19 IST

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