आईपीएल वाली कप्तानी इंटरनेशनल क्रिकेट में नहीं दिखी… खुद को बदलने का समय आ गया है, पूर्व सेलेक्टर की श्रेयस अय्यर को सलाह

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम इस समय एक बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है. टी20 विश्व कप की ऐतिहासिक खिताबी जीत का जश्न अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि टीम इंडिया के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है. स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव से टी20 टीम की कमान संभालने वाले श्रेयस अय्यर की अगुआई में भारतीय टीम को अब तक एक भी सफलता नसीब नहीं हुई है. टीम की इस लगातार नाकामी ने पूर्व दिग्गजों को सोचने और कड़े सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया है.
भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज और पूर्व सेलेक्टर सबा करीम (Saba Karim) का मानना है कि श्रेयस अय्यर के लिए आईपीएल में दिखाई गई अपनी रणनीतिक क्षमता को राष्ट्रीय टीम के लिए भी साबित करने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नेतृत्व क्षमता की स्पष्ट छाप छोड़ने का सही समय आ गया है. करीम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय टीम विदेशी सरजमीं पर लगातार दो टी20 श्रृंखलाओं में करारी शिकस्त झेल चुकी है.
श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर सबा करीम ने उठाए सवाल.
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि नए कप्तान के तहत भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है. टीम सबसे पहले आयरलैंड के खिलाफ खेली गई टी20 श्रृंखला में 0-2 से हार गई थी. इसके बाद क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इंग्लैंड के दौरे पर भी हालात नहीं बदले. इंग्लैंड के विरुद्ध खेला गया पहला मुकाबला बारिश में धुल जाने के बाद, भारतीय टीम लगातार तीन टी20 मैच गंवा बैठी. इसके परिणामस्वरूप पांच मैचों की इस महत्वपूर्ण श्रृंखला में भारतीय टीम 0-3 से पिछड़ चुकी है, जिससे टीम की रणनीतिक कमियां पूरी तरह उजागर हो गई हैं.
आईपीएल की कप्तानी बनाम इंटरनेशनल क्रिकेट का नेतृत्व
सबा करीम ने ‘जियोहॉटस्टार’ से विशेष बातचीत करते हुए भारतीय टीम के मौजूदा संकट और श्रेयस अय्यर की कप्तानी शैली पर खुलकर अपनी बात रखी. करीम ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अब अय्यर को कप्तान के तौर पर खुद को स्थापित करना होगा. आईपीएल में उनकी जिस रणनीतिक कप्तानी की झलक देखने को मिली थी, वह अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नजर नहीं आई है.’ उनका साफ इशारा था कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट की सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोहराना एक अलग चुनौती होती है, जिसमें अय्यर अब तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं.
पूर्व चयनकर्ता ने टीम के बल्लेबाजी क्रम के प्रबंधन पर भी गहरे सवाल उठाए. उन्होंने विशेष रूप से मध्यक्रम की बल्लेबाजी रणनीति की कड़ी आलोचना की. उनका मानना है कि सही समय पर सही खिलाड़ी को मैदान पर न उतारना टीम की हार का एक बड़ा कारण बन रहा है. उन्होंने बल्लेबाजी क्रम पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘जब अय्यर खुद मध्यक्रम में बल्लेबाजी कर रहे थे, तब शिवम दुबे को पांचवें नंबर पर भेजने का फैसला समझ से परे था. आईपीएल में हम जिस अय्यर को जानते हैं, वह ऐसा फैसला शायद नहीं लेते.’
हालांकि, करीम ने अय्यर की व्यक्तिगत बल्लेबाजी की सराहना करने में कोई संकोच नहीं किया. उन्होंने कप्तान का बचाव करते हुए कहा, “उनका रन बनाना टीम के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू है. जब कप्तान खुद अच्छी बल्लेबाजी करता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और कप्तानी भी बेहतर हो जाती है. उम्मीद है कि आने वाले मुकाबलों में यह नेतृत्व क्षमता और बेहतर रणनीतिक फैसले मैदान पर देखने को मिलेंगे.’
टीम संयोजन में बड़े बदलाव की मांग: संजू सैमसन की वकालत
श्रृंखला भले ही हाथ से निकल चुकी हो, लेकिन प्रतिष्ठा बचाने के लिए पांचवें टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को हर हाल में जीत की जरूरत है. करीम ने इस मुकाबले के लिए भारतीय अंतिम एकादश (प्लेइंग इलेवन) में बड़े और साहसी बदलावों की वकालत की है. उनका मानना है कि इस समय भारतीय मध्यक्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की भरमार हो गई है, जिससे विपक्षी गेंदबाजों को अपनी रणनीति बनाने और हावी होने में काफी आसानी हो रही है.
करीम ने टीम संतुलन को ठीक करने का उपाय बताते हुए कहा, ‘लगातार बाएं हाथ के बल्लेबाजों की कड़ी को तोड़ने के लिए एक अनुभवी दाएं हाथ के बल्लेबाज की जरूरत है और संजू सैमसन से बेहतर विकल्प कोई नहीं है. टीम प्रबंधन अगर तिलक वर्मा को टीम में बरकरार रखता है, तो शिवम दुबे की जगह संजू सैमसन को शामिल किया जाना चाहिए. इससे भारतीय बल्लेबाजी क्रम और अधिक संतुलित, अनुभवी और मजबूत होगा.’
इसके अलावा, टीम में ऑलराउंडर की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए करीम ने युवा खिलाड़ी सूर्यांश शेडगे को वॉशिंगटन सुंदर की जगह एकादश में शामिल करने की जोरदार वकालत की. उन्होंने इसके पीछे का खेल तर्क देते हुए कहा, ‘वह मध्यम गति से दो-तीन ओवर गेंदबाजी करते हुए टीम के लिए छठे गेंदबाज की भूमिका को बखूबी निभा सकता है, जिससे कप्तान के पास गेंदबाजी विभाग में अधिक विकल्प मौजूद रहेंगे और मैच की परिस्थितियों के अनुसार बदलाव किए जा सकेंगे.’
आईपीएल हैंगोवर से बाहर निकलने की सख्त जरूरत
कहानी का सबसे कड़वा सच बयां करते हुए सबा करीम ने भारतीय खिलाड़ियों की मानसिकता पर तीखी चोट की. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय खिलाड़ी अभी भी घरेलू टी20 टूर्नामेंट के प्रभाव और उसके कम्फर्ट जोन से मुक्त नहीं हो पाए हैं, जिसका नुकसान उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना पड़ रहा है.
करीम ने कड़े शब्दों में कहा, ‘भारतीय खिलाड़ी आईपीएल की सपाट पिचों और छोटी बाउंड्री की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाये हैं. हम अब भी विदेशी पिचों पर ऐसे बल्लेबाजी कर रहे हैं जैसे भारत की छोटी बाउंड्री वाले घरेलू मैदानों पर खेल रहे हों. विश्व कप विजेता टीम से इस तरह की दिशाहीन और गैर-जिम्मेदाराना क्रिकेट की उम्मीद कतई नहीं की जाती.’
भारतीय टीम और प्रबंधन के लिए अब आत्ममंथन करने का समय आ गया है. यदि श्रेयस अय्यर को राष्ट्रीय टीम के दीर्घकालिक और विश्वसनीय कप्तान के रूप में अपनी जगह पक्की करनी है, तो उन्हें न केवल बल्ले से बल्कि अपनी कप्तानी की रणनीतियों से भी टीम को जीत की राह पर वापस लाना होगा. इंग्लैंड के खिलाफ आगामी मुकाबला उनके लिए अपनी रणनीतिक क्षमता और नेतृत्व कौशल साबित करने का आखिरी और सबसे अहम मौका होगा.



