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Hanuhankar Cannon History | 14 Rare Cannons of India | Ancient War Weapons

Last Updated:December 25, 2025, 15:26 IST

Hanuhankar Cannon History: हनुहंकार तोप भारतीय इतिहास की एक अद्भुत और शक्तिशाली तोप मानी जाती है, जिसे शेर के मुंह जैसी आकृति में बनाया गया था. इस विशाल तोप की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इससे एक साथ 14 गोले दागे जा सकते थे, जिससे युद्ध के मैदान में भारी तबाही मच जाती थी. इसकी गर्जना और बनावट दुश्मनों में डर पैदा करती थी. हनुहंकार तोप आज भी भारत की सैन्य विरासत और शौर्य का प्रतीक मानी जाती है.

धौलपुर: राजस्थान को वीरों की धरती कहा जाता है, क्योंकि यहां के वीर योद्धाओं ने अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए अपने प्राणों की आहुति युद्धों में दी थी. यह युद्ध सिर्फ तलवारों से नहीं बल्कि तोपों से भी लड़े जाते थे. राजस्थान के कई वीर राजाओं ने कई ऐतिहासिक तोपों का निर्माण कराया था. जिनकी गूंज युद्ध के मैदान में सुनाई पड़ती थी एक ऐसी ही तोप है राजस्थान के धौलपुर रियासत में जिसे सिंह की मुंह की तरह बनाया गया था.

राजस्थान का धौलपुर रियासत काल के समय अपनी स्थापत्य कला के साथ-साथ युद्ध नीति और ऐतिहासिक तोपों के लिए अपनी विशेष पहचान रखता था. रियासत काल के समय बनी ऐसी कई ऐतिहासिक तोप थी जो आज भी हमें धौलपुर के गौरवशाली इतिहास को याद दिलाती हैं.

धौलपुर के महाराज राना कीरत सिंह और ग्वालियर के सिंधियां राजाओ के बीच काफी संघर्ष चल रहा था. इसी कारण धौलपुर रियासत के महाराज राना कीरत सिंह ने शेर के मुंह की आकृति की तरह अष्टधातु से निर्मित ऐतिहासिक हनुहंकार तोप का निर्माण करवाया करीब 6 महीने अनवरत कार्य करते हुए धौलपुर रियासत के तोपची (कारीगर )सीताराम द्वारा इस ऐतिहासिक तोप का निर्माण किया गया. अष्टधातु से निर्मित इस ऐतिहासिक तोप का वजन करीब 560 क्विंटल है और इस तोप की मारक क्षमता 7 किलोमीटर तक थी यानी कि इस तोप से निकला हुआ गोला 7 किलोमीटर दूर जाकर गिरता था और इस तोप से एक बार में 14 गोले दागे जा सकते थे.

इतिहासकार अरविंद कुमार शर्मा कहते हैं इस ऐतिहासिक हनुहंकार तोप का निर्माण धौलपुर से कुछ मील दूर कीरत नगर यानी की पुरानी छावनी में करवाया गया था. यह तोप इतनी भारी भरकम थी कि इसे एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जाया सकता था. आजादी के बाद ये ऐतिहासिक हनुहंकार तोप पुरानी छावनी में धूल धुसरित होती जा रही थी. कई असमाजिक तत्व इस तोप के टुकड़ों को काटकर ले जाया करते थे, क्योंकि यह तोप अष्टधातु से निर्मित है इसलिए कीमती है. कभी कभी ऐसा लगता था कि इस ऐतिहासिक धौलपुर की धरोहर का भविष्य असुरक्षित है.

स्वर्णकालीन इतिहास को हमेशा के लिए खो देंगे

ऐसी स्थिति में अप्रैल 1985 में भारतीय सेना के सहयोग से धौलपुर प्रशासन ने इस तोप को पुरानी छावनी से लाकर धौलपुर शहर के इंदिरा गांधी पार्क में स्थापित करवा दिया.

इतिहासकार अरविंद कुमार शर्मा कहते हैं धौलपुर में और भी कई ऐतिहासिक तोप है जो अपने आप में पुरासंपदा और धौलपुर की ऐतिहासिक धरोहर में शामिल है. जिनका संरक्षण होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह ऐतिहासिक धरोहर हमें अपने धौलपुर के गौरवशाली इतिहास को हमेशा याद दिलाती रहेगी और आने वाली पीढ़ियां इन्हीं ऐतिहासिक दुर्लभ चीजों से हमारे गौरवशाली इतिहास को याद रखेंगे. अगर हम इनको संरक्षण नहीं देंगे तो हम अपने स्वर्णकालीन इतिहास को हमेशा के लिए खो देंगे.

About the AuthorJagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें

Location :

Dhaulpur,Rajasthan

First Published :

December 25, 2025, 15:26 IST

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इतिहास का अजूबा: हनुहंकार तोप, जिसकी गर्जना से कांप उठते थे दुश्मन

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