समय की धड़कन सुनाती सालार जंग की जादुई घड़ी, हर घंटे जिंदा हो उठता इतिहास

Last Updated:December 20, 2025, 14:58 IST
Salaar Jung Museum : हैदराबाद के सालार जंग संग्रहालय में मौजूद एक ब्रिटिश ब्रैकेट घड़ी आज भी सैकड़ों लोगों को हैरान कर देती है. यह सिर्फ समय बताने वाला यंत्र नहीं, बल्कि 19वीं सदी की इंजीनियरिंग और कला का अनोखा नमूना है, जिसमें हर घंटे समय को जीवंत होते देखा जा सकता है.
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हैदराबाद : हैदराबाद के प्रसिद्ध सालार जंग संग्रहालय में यूं तो लाखों बेशकीमती चीजें मौजूद हैं लेकिन संग्रहालय के क्लॉक रूम में रखी ब्रिटिश ब्रैकेट घड़ी पर्यटकों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र है. यह घड़ी महज समय बताने वाला यंत्र नहीं बल्कि 19वीं सदी की इंजीनियरिंग और कला का एक जीवंत चमत्कार है. यह घड़ी इंग्लैंड में कुक एंड केल्वे द्वारा बनाई गई थी. 18वीं और 19वीं शताब्दी के दौरान निर्मित इस घड़ी की बनावट बेहद जटिल और सुंदर है. इसमें ओरमोलू माउंट सोने की परत चढ़ा हुआ पीतल का उपयोग किया गया है जो इसे एक शाही चमक प्रदान करता है. घड़ी के चारों ओर देवदूतों की बारीक नक्काशी की गई है जो तत्कालीन यूरोपीय शिल्पकारी की श्रेष्ठता को दर्शाती है.
इस घड़ी की सबसे बड़ी विशेषता इसका मैकेनिकल प्रदर्शन है. हर घंटे के पूरे होते ही घड़ी के अंदर से एक छोटी सी खिलौना आकृति यानी एक व्यक्ति का पुतला बाहर निकलती है. वह आकृति एक हथौड़े से वहां लगे धातु के घंटे पर उतनी ही बार प्रहार करती है जितने बज रहे होते हैं. इसके अलावा घड़ी के डायल के पास एक लोहार की आकृति भी बनी हुई है जो लगातार अपने हथौड़े से निहाई पर चोट करती रहती है. यह गति हर सेकंड को दर्शाती है जिससे दर्शकों को ऐसा महसूस होता है जैसे समय खुद अपनी धड़कन सुना रहा हो.
पर्यटकों का मुख्य आकर्षणजैसे ही घड़ी में अगला घंटा बजने का समय करीब आता है क्लॉक रूम में सन्नाटा छा जाता है और सैकड़ों पर्यटक अपनी सांसें रोककर उस छोटी आकृति के बाहर आने का इंतजार करने लगते हैं. लोग इसे अपने कैमरों में कैद करने के लिए उत्सुक रहते हैं. यह दृश्य न केवल बच्चों को रोमांचित करता है बल्कि बड़ों को भी उस युग की तकनीक पर सोचने को मजबूर कर देता है जब बिना बिजली या आधुनिक सेंसर के ऐसी सटीक मशीनें बनाई जाती थीं.
ऐतिहासिक महत्वनवाब मीर यूसुफ अली खान सालार जंग तृतीय को कलाकृतियां और घड़ियां जमा करने का बहुत शौक था. उन्होंने दुनिया भर से लगभग 300 से अधिक दुर्लभ घड़ियां एकत्रित की थीं जिनमें से यह ब्रिटिश घड़ी सबसे अधिक लोकप्रिय है. यह घड़ी हमें याद दिलाती है कि उस दौर में घड़ी साजी केवल एक हुनर नहीं बल्कि एक महान कला थी.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
Location :
Hyderabad,Telangana
First Published :
December 20, 2025, 14:58 IST
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हैदराबाद सालार जंग संग्रहालय की ब्रिटिश घड़ी का इतिहास और आकर्षण



