आखा तीज पर जालोर की अनोखी परंपरा! सात धान से बनता ‘मल्टीग्रेन खींच’, इमली पानी का महत्व जानकर रह जाएंगे हैरान

Last Updated:April 20, 2026, 18:47 IST
Jalor Hindi News: राजस्थान के जालोर जिले में आखा तीज के अवसर पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जिसमें सात प्रकार के अनाज से ‘मल्टीग्रेन खींच’ तैयार किया जाता है. यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि पोषण से भी भरपूर माना जाता है. इस दिन घर-घर में इमली का पानी बनाना भी विशेष महत्व रखता है, जिसे सेहत और पाचन के लिए लाभकारी माना जाता है. यह परंपरा स्थानीय संस्कृति, आस्था और खानपान की समृद्ध विरासत को दर्शाती है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है.
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जालौर: अक्षय तृतीया, यानी आखा तीज जालोर में यह पर्व सिर्फ पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि घर-घर में निभाई जाने वाली खास परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. इस दिन सुबह से ही घरों में उत्साह का माहौल रहता है और महिलाएं पारंपरिक व्यंजन बनाने में जुट जाती हैं. खास बात यह है कि यहां हर घर में सात धान यानी मल्टीग्रेन से बना ‘खींच’ और इमली का पानी तैयार किया जाता है, जिसे प्रसादी के रूप में पूरे परिवार में बांटा जाता है.
स्थानीय गृहणी नेेता सोनी लोकल 18 को जानकारी देती हैं कि आखा तीज पर सात अनाज मिलाकर खींच बनाना हमारी पुरानी परंपरा है. इसमें गेहूं, जौ, चना, मूंग, बाजरा जैसे अनाज शामिल किए जाते हैं. सबसे पहले सभी धानों को साफ करके हल्का भिगोया जाता है, फिर धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसमें देसी घी और हल्के मसाले डालकर इसे स्वादिष्ट बनाया जाता है. यह खींच प्रसाद के रूप में सभी को खिलाया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
पानी गर्मी में ठंडक देतावहीं इमली के पानी को लेकर भी खास विधि अपनाई जाती है. नेेता सोनी बताती हैं कि इमली को पहले कुछ समय के लिए पानी में भिगोया जाता है, फिर उसे अच्छे से मसलकर उसका गूदा निकाला जाता है. इसके बाद इसमें गुड़ मिला कर और स्वाद के अनुसार जीरा या काला नमक डाला जाता है. यह पानी गर्मी में ठंडक देता है और शरीर को तरोताजा रखता है.
इस दिन इन व्यंजनों को सिर्फ खाने के लिए नहीं, बल्कि प्रसादी के रूप में तैयार किया जाता है. परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर खींच और इमली का पानी ग्रहण करते हैं, जिससे आपसी प्रेम और एकता का संदेश मिलता है. मान्यता है कि आखा तीज पर बनाए गए ये व्यंजन घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली लाते हैं.
जालोर की यह परंपरा आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है. आधुनिकता के दौर में भी लोग इन रीति-रिवाजों को पूरे श्रद्धा भाव से निभा रहे हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
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Location :
Jalor,Rajasthan
First Published :
April 20, 2026, 18:47 IST



