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Pali News | पाली भैरूघाट का 326 साल पुराना चमत्कारिक चिराग, इस्लामी नया साल

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पाली में 326 साल से जल रहा 80 किलो का चिराग, इसकी 9 लौ से टलती हैं आपदाएं!

Last Updated:June 18, 2026, 18:21 IST

Pali News : पाली के भैरूघाट चौराहे पर 326 साल पुरानी परंपरा, जूनी पाली मस्जिद से जुड़ा 70 से 80 किलो पत्थर का चिराग इस्लामी नए साल पर 9 दिन तक 9 लौ के साथ जलाया गया. इस्लामी साल की पूर्व संध्या यानी चांद रात से लेकर अगले नौ दिनों तक यह भैरूघाट चौराहे पर लगातार रोशन रहता है, जिसके बाद 10वें दिन मोहर्रम मनाया जाता है.

पाली. अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों में नया साल मनाने के अपने-अपने अनूठे तरीके हैं. लेकिन राजस्थान के पाली शहर में एक ऐसी ऐतिहासिक और अनोखी परंपरा आज भी जीवित है, जिसकी गूंज पिछले तीन सदियों से मारवाड़ में सुनाई दे रही है. हम बात कर रहे हैं पाली के भैरूघाट चौराहे पर इस्लामी नववर्ष के स्वागत में रोशन होने वाले एक बेहद खास और वजनी चिराग की. लगभग 70 से 80 किलो वजनी जोधपुरी पत्थर से बना यह चिराग केवल रोशनी ही नहीं फैलाता, बल्कि इसके पीछे एक ऐसा अटूट विश्वास जुड़ा है, जो पूरे शहर को प्राकृतिक आपदाओं और बुरी नजर से सुरक्षित रखने की मान्यता से जुड़ा हुआ है. इस ऐतिहासिक चिराग का इतिहास हिजरी सन 1121 यानी आज से करीब 326 वर्ष पहले सिपाहियों का बास स्थित जूनी पाली मस्जिद के निर्माण के साथ शुरू हुआ था.

इस चिराग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी नौ लौ हैं. इस्लामी साल की पूर्व संध्या यानी चांद रात से लेकर अगले नौ दिनों तक यह भैरूघाट चौराहे पर लगातार रोशन रहता है, जिसके बाद 10वें दिन मोहर्रम मनाया जाता है. इस चिराग को चौबीसों घंटे जलाए रखने के लिए प्रतिदिन करीब डेढ़ लीटर तिल्ली यानी तिल का तेल डाला जाता है. इन नौ दिनों के दौरान हर शाम चिराग के पास शहर और देश में अमन-चैन तथा खुशहाली के लिए विशेष दुआ की जाती है.

मस्जिद और चिराग का इतिहासहिजरी सन 1121 से जुड़ा इसका इतिहास बेहद खास माना जाता है. चिराग में तेल डालकर मुराद मांगने की परंपरा आज भी जारी है. मुस्लिम समाज के सदर हकीम भाई ने बताया कि इस चिराग का इतिहास जूनी पाली मस्जिद के निर्माण से जुड़ा हुआ है. यह ऐतिहासिक चिराग सिपाहियों का बास स्थित जूनी पाली मस्जिद के साथ ही बनाया गया था, जिसका निर्माण हिजरी सन 1121 यानी करीब 326 वर्ष पूर्व हुआ था. तभी से पाली में मोहर्रम की पहली तारीख से नौवीं तारीख तक इस चिराग को रोशन करने की परंपरा लगातार निभाई जा रही है.

बरसों पुरानी है मान्यताबरसों से यह मान्यता चली आ रही है कि जो भी अकीदतमंद इस चिराग में तिल्ली का तेल डालकर मन्नत मांगता है, उसकी मुराद जरूर पूरी होती है. यही वजह है कि नौ दिनों तक यहां तेल चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

वरिष्ठ जनों ने फातिहा ख्वानी के साथ किया चिराग रोशनजूनी पाली मोहर्रम कमेटी की ओर से भैरूघाट चौराहे पर इस पारंपरिक चिराग को पूरी अकीदत के साथ रोशन किया गया. जूनी पाली मोहर्रम के पूर्व लाइसेंसदार मोहम्मद यूसुफ पठान, वर्तमान लाइसेंसदार मोहम्मद सलीम और रुस्तम शाह सहित समाज के कई वरिष्ठ लोगों ने मिलकर चिराग की लौ जलाई. इस मौके पर हजरत इमाम हुसैन की याद में फातिहा ख्वानी की गई और मुल्क में भाईचारे और अमन-चैन के लिए दुआएं मांगी गईं.

इस्लामी नए साल 1448 हिजरी का हुआ इस्तकबालइससे पहले पाली जिला मुस्लिम समाज की ओर से मंगलवार को नए इस्लामी साल 1448 हिजरी के इस्तकबाल के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए. जिला मुस्लिम समाज कार्यालय में चांद रात के अवसर पर फातिहा ख्वानी हुई और उपस्थित लोगों में शीरनी वितरित की गई. इस मौके पर जिला मुस्लिम समाज के सदर मोहम्मद हकीम और उपाध्यक्ष हाजी मेहबूब टी ने समाज के सभी लोगों को नए साल की मुबारकबाद दी. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नया साल देश, प्रदेश और समाज में आपसी सौहार्द, तरक्की और खुशहाली लेकर आएगा.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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