बिजली की समस्या से तंग आए ग्रामीण, कंधों पर उठाया ट्रांसफार्मर! 3 किलोमीटर पैदल चलकर रच दिया इतिहास

Last Updated:June 18, 2026, 18:55 IST
राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर बसा दुर्गम उत्तरज गांव, जहां बिजली के पोल तो लगे हैं, लेकिन सड़क मार्ग नहीं होने से यहां ट्रांसफार्मर नहीं होने की वजह से बार-बार बिजली के कम वोल्टेज और बिजली गुल होने की समस्या बनी रहती थी. बेहतर बिजली व्यवस्था की जिद के चलते ग्रामीणों ने अपने गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचाया.
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सिरोही : जिले के दुर्गम पहाड़ों के बीच बसे उतरज गांव के ग्रामीणों ने बार–बार बिजली गुल होने की समस्या को दूर करने के लिए 3 टन वजनी ट्रांसफार्मर को कंधों पर उठाकर 3 किलोमीटर पैदल चलकर अपने गांव तक पहुंचाया. बिजली विभाग की ओर से सड़क मार्ग गुरुशिखर तक ट्रांसफार्मर पहुंचाया गया था. इसके आगे उतरज गांव तक सड़क मार्ग नहीं होने से ट्रांसफार्मर आगे ले जाना संभव नहीं था. समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने सहयोग करते हुए ट्रांसफार्मर को कंधों पर उठाकर अपने गांव तक लाया.
राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर बसा दुर्गम उत्तरज गांव, जहां बिजली के पोल तो लगे हैं, लेकिन सड़क मार्ग नहीं होने से यहां ट्रांसफार्मर नहीं होने की वजह से बार-बार बिजली के कम वोल्टेज और बिजली गुल होने की समस्या बनी रहती थी. बेहतर बिजली व्यवस्था की जिद के चलते ग्रामीणों ने यह कदम उठाया और अपने गांव तक ट्रांसफार्मर पहुंचाकर ही राहत की सांस ली.
स्वदेश फिल्म की तर्ज पर गांव में पहुंचाया ट्रांसफार्मरग्रामीणों ने स्वदेश फिल्म की तर्ज पर गांव में बिजली की समस्या को दूर करने के लिए 3 टन वजनी डीपी को दुर्गम, फिसलन भरी पहाड़ी और पथरीले रास्ते से कंधों पर उठाकर अपने गांव तक लाया. इस कार्य में बड़े बुजुर्ग सबने अपनी भूमिका निभाई. गांव में ट्रांसफार्मर के लगने से ग्रामीणों की बिजली की समस्या दूर हो सकेगी.
1400 मीटर की ऊंचाई पर बसा गांव, आबादी 400 लोगों कीजिले के माउंट आबू उपखंड का उतरज गांव 1400 मीटर की ऊंचाई पर बसा हैं. इस गांव की आबादी वर्ष 2011 में 290 थी जो बढ़कर 400 के करीब हो गई हैं. आज भी ये गांव इंटरनेट सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. यहां एक मात्र आटा चक्की हैं. जिसे ग्रामीणों ने अपने कंधों पर उठाकर लाया था. गांव का एक मात्र ट्रेक्टर भी पिछले वर्ष ग्रामीण इसी तरह कंधों पर उठाकर लाए थे. गांव के विकास में सबसे बड़ी बाधा गांव तक सड़क मार्ग नहीं होना हैं. दुर्गम पहाड़ों के बीच बसा गांव होने की वजह से यहां सड़क नहीं बन सकती है. नरेगा से गुरुशिखर से कुछ मीटर तक पथरीली पगडंडी बनाई गई है, लेकिन हर वर्ष बारिश में ये पगडंडी भी चलने लायक नहीं रहती है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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