Pachchikam Jewellery | Handmade Stone Setting | Ancient Jewellery Craft | Kutch Jewellery Art

Last Updated:December 02, 2025, 14:25 IST
Pachchikam Jewellery: पच्चीकम ज्वेलरी सदियों पुरानी पारंपरिक कला है, जिसमें कारीगर बिना किसी मशीन के बेशकीमती पत्थरों को हाथ से जड़ते हैं. इसकी बारीकी, अनोखी डिजाइन और एंटीक लुक आज भी इसे खास बनाते हैं. फैशन जगत में इसकी वापसी ने भारतीय पारंपरिक कारीगरी को फिर से नई पहचान दी है, जिससे इसका मूल्य और लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है.
राजस्थान और कच्छ की धूल भरी गलियों में आज भी एक ऐसी प्राचीन कला जिंदा है जो वक्त के साथ बदली नहीं बल्कि और निखरती गई है. पच्चीकम ज्वेलरी जिसे कभी राजघरानों की रानियों और शाही परिवारों की पहचान माना जाता था,आज आधुनिक फैशन के दौर में भी अपनी अलग चमक बनाए हुए है.

इस ज्वेलरी की सबसे खास बात यह है कि यह किसी भारी मशीन या हाई-टेक टूल के बिना हाथो से तैयार होती है. कारीगर महीनों तक नाजुक चिमटी और महीन औजारों से बेशकीमती पत्थरों को एक–एक कर जड़ते हैं. यही वजह है कि हर पीस बिल्कुल अलग, यूनिक और कलात्मक होता है.

चांदी या कम वजन वाले धातु की फ्रेम से इसका सफर शुरू होता है. फिर कारीगर उसमें बड़े ध्यान से लटकन, कुंदन, मोती, रोज़-कट और रंगीन पत्थरों को फिट करते हैं. हर स्टोन को इतने बेहद नाजुक हाथों से जड़ा जाता है कि यह ज्वेलरी मशीन से बनी किसी भी डिजाइन से कहीं ज्यादा गर्माहट और बारीकी लिए होती है.
Add as Preferred Source on Google

सदियों पुरानी ये कला पहले सिर्फ राजदरबारों में सीमित थी लेकिन समय के साथ यह बॉलीवुड, ब्राइडल फैशन और हैंडमेड ज्वेलरी प्रेमियों की पहली पसंद बन गई है. शादी–समारोहों में आज इसकी मांग इतनी बढ़ गई है कि कई डिजाइनर इसे अपनी सिग्नेचर कलेक्शन में शामिल कर रहे हैं.

आज जब मशीनें हर चीज तेजी से बना रही हैं वहीं पच्चीकम ज्वेलरी अपनी धीमी पर मेहनती प्रक्रिया के कारण और भी खास हो गई है. लोग यूनिक और हैंडमेड चीजों की तरफ लौट रहे हैं और यही इस कला की ‘नई चमक’ है.

पच्चीकम जूलरी की खासियत सिर्फ उसके रूप में नहीं बल्कि उस हाथों की कला में छिपी होती है जो उसे जन्म देती है. कच्छ के कलाकार पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं. बिना मशीनों के बारीक काम करते हैं और पत्थरों और धातु के संतुलन को भी समझते हैं. इन्हीं सब बातों का नतीजा है कि एक-एक पीस देखने वाले को मोहित कर देता है.

अब यह जूलरी सिर्फ पारंपरिक पोशाकों तक सीमित नहीं है. इसे डेनिम, ड्रेसेज, इंडो-वेस्टर्न या किसी भी मॉडर्न लुक के साथ पहना जा सकता है. यही वर्सेटिलिटी इसे फैशन की दुनिया में फिर से ट्रेंड में लाकर खड़ा कर रही है. पच्चीकम जूलरी का वजन आमतौर पर 50 से 100 ग्राम के बीच होता है.
First Published :
December 02, 2025, 14:25 IST
homerajasthan
पच्चीकम ज्वेलरी की वापसी, जानें इसकी खूबसूरती के पीछे छिपी सदियों पुरानी कला



