सांडेराव से बदलेगी पशुपालकों की तकदीर, 30 स्वदेशी नस्लों के संरक्षण के लिए 60 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट शुरू

पाली. अक्सर बड़े-बड़े मेगा प्रोजेक्ट्स और रिसर्च सेंटर मेट्रो शहरों की पहचान माने जाते हैं, लेकिन राजस्थान के पाली जिले का एक छोटा सा गांव सांडेराव अब देश के नक्शे पर एक नई इबारत लिखने जा रहा है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत सांडेराव में देश का पहला ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म’ आकार ले रहा है. 60 करोड़ की लागत और 200 बीघा में बनने वाला यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल पशुधन की 30 स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और नस्ल सुधार का वैज्ञानिक केंद्र बनेगा, बल्कि इस छोटे से गांव को मॉडल टूरिज्म और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया हब भी बनाएगा.
इस फार्म’ में गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट और घोड़ों की 30 प्रमुख स्वदेशी प्रजातियों पर उन्नत रिसर्च होगी. दुनिया की सबसे छोटी पुंगनूर गाय से लेकर थारपारकर, कांकरेज और मारवाड़ी घोड़ों तक को सहेजने वाला यह आधुनिक ग्रीन सेंटर पूरी तरह से सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन पर चलेगा. इस केंद्र में राजस्थान की पारंपरिक एवं स्वदेशी पशु प्रजातियों के संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक अनुसंधान का कार्य होगा. यह केन्द्र करीब 200 बीघा भूमि पर स्थापित किया जा रहा है. इसे वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा के तहत धरातल पर उतारा जा रहा है. केन्द्र के दो वर्षों में तैयार होने की संभावना है.
देश का अनूठा केन्द्र जिससे चमकेगा पाली का नाम
राजस्थान के पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत की माने तो यह देश का ऐसा अनूठा केंद्र होगा, जहां विभिन्न पशु प्रजातियों की नस्ल सुधार तकनीकों, कृत्रिम गर्भाधान, सैक्स-सोर्टेड सीमन और उन्नत प्रजनन पद्धतियों पर एक साथ शोध किया जाएगा. विशेष रूप से राजस्थान की पहचान बनी स्वदेशी नस्लों के संरक्षण पर जोर रहेगा. जिससे राजस्थान के पाली शहर का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरकर सामने आएगा.
खास तौर पर इन पर रहेगा फौकस
केंद्र में गिर, राठी, थारपारकर, साहिवाल, नागौरी सहित विभिन्न गाय नस्लों पर अनुसंधान होगा. वहीं भैंस की मुर्रा, जाफराबादी और मेहसाना, भेड़ की मगरा, मारवाड़ी और सोनाड़ी, सिरोही की बकरी, जखराना और सोजत, ऊंट जैसलमेरी और बीकानेरी तथा मारवाड़ी घोड़े के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे. दुनिया की सबसे छोटी गाय मानी जाने वाली पुंगनूर नस्ल के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष शोध किया जाएगा.
पशुपालको को दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
इस केंद्र पर पशुपालकों के लिए आधुनिक तकनीक और उद्यमिता का प्रशिक्षण स्थल भी तैयार किया जाएगा. जहां नियमित प्रशिक्षण शिविर होंगे. पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराए जाएंगे. पशुपालन आधारित स्टार्टअप और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा.
सरकार ने 15 पदों के सृजन को मंजूरी दी है
केंद्र के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने 15 पदों के सृजन को मंजूरी दी है, जिनमें 7 स्थायी और 8 संविदा पद शामिल हैं. यह इको-फ्रेंडली ग्रीन कैंपस के तौर बनेगा और पूरा परिसर पर्यावरण के अनुकूल विकसित किया जाएगा. ऊर्जा जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा और जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन की आधुनिक व्यवस्था होगी. केंद्र को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह पशुपालन एवं कृषि पर्यटन के केंद्र के रूप में भी विकसित हो सके.



