Exclusive: धर्मेंद्र को कैसी लगी थी ‘बंटवारा 1947’? सनी देओल ने मां के रिएक्शन के बारे में भी बताया

नई दिल्ली: सनी देओल की अगली फिल्म ‘बंटवारा 1947’ असगर वजाहत के मशहूर नॉवेल ‘जिस लाहौर नइ देख्या वो जम्याइ नइ’ पर बनी है. यह 14 अगस्त को रिलीज होने के लिए तैयार है. फिल्म में सनी देओल के अलावा प्रीति जिंटा का अहम रोल है. सनी देओल ने किशोर अजवानी के शो ‘कहके रहेगा कहने वाला’ में बताया कि उनके मम्मी-पापा ने भी यह फिल्म देखी थी.
धर्मेंद्र जब जीवित थे, तब ‘बंटवारा 1947’ बनकर तैयार थी. सनी देओल ने फिल्म को अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर देखा. सनी देओल कहते हैं, ‘मम्मी ने देखी है, पापा ने देखी है. फिल्म सबको बहुत अच्छी लगी. कहानी भी पापा (धर्मेंद्र) ने पूरी सुनी थी, चाहते थे कि इस पर फिल्म बनाएं.’ धर्मेंद्र पाकिस्तान को मौसी कहते थे.
फिल्म पर धर्मेंद्र का क्या था नजरिया?सनी देओल बताते हैं, ‘हम देखते हैं कि कहानी हमने सुनी थी, वैसी बनी है या नहीं. पापा ने भी पिक्चर उसी तरह देखी. जब सनी देओल से पूछा गया कि साल 2026 में हम बंटवारे की बात कर रहे हैं, तो क्या हम इसे भूल नहीं पाए या समझ नहीं पाए? इस पर सनी देओल ने कहा, ‘हमें आजादी मिले इतने साल हो गए हैं, मगर आज के युवाओं को इसके बारे में पता नहीं है. आज की युवा जानना चाहते हैं कि हमारा इतिहास क्या है. इतिहास में बहुत कुछ है, जो पढ़ाया नहीं जा रहा.’
देश के बंटवारे पर की बातसनी देओल मानते हैं कि जब युवा पिक्चर देखेंगे, तो उन्हें एहसास होगा कि आजादी के तुरंत बाद बंटवारे का असर कैसा था. फिल्म देखकर पता चलेगा कि बंटवारे से एक परिवार पर क्या बीतती है. वे कहते हैं, ‘जब देश में कुछ हो रहा है, तो परिवार के ऊपर असर होना है. यह हमें इसमें दिखाना है.’ सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा भी बातचीत में शामिल हुईं. फिल्म में मां की अहमियत को समझाया गया है. अब चूंकि प्रीति जिंटा भी मां हैं, तो उनका फिल्म को लेकर खास नजरिया है. वे कहती हैं, ‘पहली बात तो आप मां को तब तक नहीं समझ पाते, जब तक आप मां नहीं बनते. जब आपके खुद बच्चे होते हैं, तो आपको एहसास होता है कि बच्चे आपकी पहली प्राथमिकता होते हैं.’
धर्मेंद्र की परवरिश पर बयां किए जज्बातसनी देओल फिर पिता धर्मेंद्र की परवरिश पर बात करते हैं. वे कहते हैं, ‘पापा जो बच्चों के लिए कर सकते थे, वह उन्होंने किया. मैं जो कुछ कर पा रहा हूं, वो कर रहा हूं. पापा ने हमें कुछ नहीं कहा. कहने की जरूरत भी नहीं होती, क्योंकि कुछ कहो, तो बच्चे और घबरा जाते हैं. एक्टर बनने आए हैं, तो आगे बढ़ेंगे. ठोकर खाएंगे, तो सीखकर आगे बढ़ेंगे और तगड़े एक्टर बनेंगे.’



