रिलीज- 21 अगस्त 1998 | ड्यूरेशन- 158 मिनट | वर्डिक्ट- फ्लॉप: बॉक्स ऑफिस पर बजा बैंड, बाद में दिल में समा गई फिल्म

Last Updated:August 21, 2026, 18:48 IST
बॉलीवुड में कुछ फिल्में रिलीज होने पर बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म नहीं करतीं, लेकिन समय के साथ वे कल्ट क्लासिक बन जाती हैं. मणिरत्नम की ‘दिल से…’ जो 21 अगस्त 1998 को रिलीज हुई थी, इसका एक बड़ा उदाहरण है. शाहरुख खान, मनीषा कोइराला और प्रीति जिंटा स्टारिंग यह फिल्म अपने डार्क और पॉलिटिकल अंडरटोन के साथ जब थिएटर में आई तो इंडियन ऑडियंस के लिए इसे समझना मुश्किल था और यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. हालांकि इसके म्यूजिक, डायरेक्शन और गहरी लव स्टोरी ने बाद में इसे हर सिनेमा लवर के दिलों में अमर कर दिया.
नई दिल्ली. जब 1998 में मणिरत्नम और शाहरुख खान की पहली फिल्म ‘दिल से…’ अनाउंस हुई, तो ट्रेड एनालिस्ट और ऑडियंस को उम्मीद थी कि यह फिल्म कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी. शाहरुख उस समय रोमांस के किंग थे और हर कोई एक और कमर्शियल ब्लॉकबस्टर की उम्मीद कर रहा था. लेकिन, जब 21 अगस्त 1998 को 158 मिनट की यह फिल्म थिएटर में आई, तो फिल्म का ट्रीटमेंट आम पब्लिक के लिए काफी अलग और यूनिक था. प्यार और टेररिज्म जैसे सीरियस सब्जेक्ट के मिक्सचर की वजह से यह फिल्म डोमेस्टिक बॉक्स ऑफिस पर ऑडियंस को अट्रैक्ट करने में फेल रही. कहा जाता है कि इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स को भारी नुकसान हुआ और ट्रेड पंडितों ने ऑफिशियली इसे ‘फ्लॉप’ करार दिया.
‘दिल से…’ के फेल होने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि यह अपने टाइम से बहुत आगे थी. 90 के दशक के आखिर में ऑडियंस ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ या ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी हल्की-फुल्की कलरफुल रोमांटिक फिल्मों की तरफ अट्रैक्ट होती थी. इसके उलट, मणिरत्नम ने ऑल इंडिया रेडियो के जर्नलिस्ट अमरकांत वर्मा (शाहरुख खान) और नॉर्थईस्ट की एक सुसाइड बॉम्बर मेघना (मनीषा कोइराला) के बीच एक डार्क, परेशान करने वाली और पैशनेट लव स्टोरी दिखाई. प्यार के सात स्टेज (अट्रैक्शन से लेकर मौत तक) पर आधारित यह कॉम्प्लेक्स साइकोलॉजिकल और पॉलिटिकल कहानी उस समय के आम लोगों को आसानी से समझ नहीं आई.
हालांकि फिल्म ने थिएटर में अच्छा परफॉर्म नहीं किया, लेकिन एआर रहमान का बनाया इसका म्यूजिक एल्बम इंडियन म्यूजिक हिस्ट्री की सबसे बड़ी मास्टरपीस में से एक बन गया. गुलजार के लिरिक्स और रहमान की धुनों ने ऐसा जादू किया जो आज भी कायम है. ‘छैय्या छैय्या’, ‘दिल से रे’, ‘ऐ अजनबी’ और ‘जिया जले’ जैसे गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में खास हैं.
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टेक्निकली, ‘दिल से…’ बॉलीवुड की हिस्ट्री की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है. संतोष सिवन की कैमरा स्किल्स और सिनेमैटोग्राफी ने लद्दाख के नजारों, केरल के बैकवाटर्स और दिल्ली की सड़कों को कविता की तरह कैप्चर किया. मणिरत्नम का डायरेक्शन इतना शार्प था कि फिल्म के हर फ्रेम में टेंशन और खूबसूरती का जबरदस्त मेल था.
अमर के रोल में शाहरुख खान ने अपने करियर की सबसे बेहतरीन और सबसे निडर परफॉर्मेंस में से एक दी. मनीषा कोइराला की रहस्यमयी और दर्द भरी आंखें और प्रीति जिंटा का मासूम डेब्यूटेंट अवतार आज भी दर्शकों के मन में बसा हुआ है. समय के साथ, सिनेमा लवर्स की सोच बदली और ‘दिल से…’ को वह पहचान मिलने लगी जिसकी वह हकदार थी.
फिल्म को रिलीज होने पर इंटरनेशनल लेवल पर तारीफ मिली और यह बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सम्मानित होने वाली पहली हिंदी फिल्म बनी. आज OTT और डिजिटल जमाने में ‘दिल से…’ को एक मास्टरपीस माना जाता है. फिल्म का क्लाइमैक्स जहां अमर और मेघना एक बम फटने पर गले मिलते हैं- बॉलीवुड के सबसे इमोशनल और यादगार सीन में से एक माना जाता है. यह फिल्म इस बात का एक बड़ा उदाहरण है कि सच्ची और महान कला बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों की मोहताज नहीं होती
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August 21, 2026, 18:48 IST



