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Tejasvi Kumari Jodha: सदियों पुरानी रीत टूटी, पाली के खेरवा में 13 साल की तेजस्वी कुमारी जोधा बनी शाही उत्तराधिकारी

Last Updated:June 27, 2026, 18:21 IST

Tejasvi Kumari Jodha: पाली जिले के खेरवा गांव में 13 वर्षीय तेजस्वी कुमारी जोधा को शाही परिवार का उत्तराधिकारी घोषित किया, जिससे सदियों पुरानी पुरुष-प्रधान परंपरा में बदलाव देखने को मिला. 17वीं सदी के खेरवा किले में हुए इस ऐतिहासिक समारोह में ‘पाग का दस्तूर’ के तहत उन्हें औपचारिक रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई. पिता के निधन के बाद ग्रामीणों और बुजुर्गों की सहमति से लिया गया. यह निर्णय समाज में बदलते सोच और बेटियों के प्रति बढ़ते सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है.खेरवा की गद्दी पर नया चेहरा, 13 वर्षीय तेजस्वी कुमारी जोधा को मिली जिम्मेदारीZoomउत्तराधिकारी तेजस्वी कुमारी जोधा

पाली. जिले के खेरवा गांव में एक ऐसा ऐतिहासिक और सामाजिक परिवर्तन देखने को मिला है, जिसने परंपरा और आधुनिक सोच के बीच एक नई मिसाल कायम की है. यहां 13 वर्षीय बालिका तेजस्वी कुमारी जोधा को उनके परिवार की शाही परंपरा के अनुसार उत्तराधिकारी घोषित किया गया है. यह निर्णय क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही पुरुष-प्रधान उत्तराधिकार व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है.

यह गौरवपूर्ण समारोह 17वीं सदी के प्राचीन खेरवा किले में आयोजित किया गया, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तेजस्वी को उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई. अपने पिता हरीश चंद्र जोधा के निधन के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें विधिवत ‘पाग का दस्तूर’ के तहत मान्यता दी गई. मारवाड़ राजपरिवार की ओर से भेजी गई गुलाबी पगड़ी उन्हें पहनाई गई, जो शोक की समाप्ति के साथ-साथ नई जिम्मेदारियों का प्रतीक मानी जाती है. इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनके माथे पर तिलक लगाया गया और पूरे वातावरण में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान देखने को मिला.

65 वर्षों बाद हुआ उत्तराधिकार समारोह

यह आयोजन इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि खेरवा परिवार में पिछले लगभग 65 वर्षों से उत्तराधिकार का औपचारिक समारोह नहीं हुआ था. परिवार में लंबे समय तक कोई पुरुष उत्तराधिकारी न होने के कारण यह परंपरा रुकी हुई थी. लेकिन इस बार ग्रामीणों और बुजुर्गों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि तेजस्वी कुमारी जोधा को ही परिवार का उत्तराधिकारी बनाया जाए. यह निर्णय न केवल उनके पिता की स्मृति और उनके द्वारा किए गए जनसेवा कार्यों का सम्मान है, जिन्होंने दो बार सरपंच के रूप में गांव की सेवा की, बल्कि यह समाज में बदलती सोच का भी प्रतीक है.

शिक्षा के साथ जिम्मेदारी निभाने का संकल्प

सातवीं कक्षा में अध्ययनरत तेजस्वी कुमारी जोधा ने इस नई जिम्मेदारी को अत्यंत गंभीरता और परिपक्वता के साथ स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि वे अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए अपने पिता के अधूरे सपनों और गांव के विकास के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध हैं. इस ऐतिहासिक निर्णय पर आसपास के गांवों के लोगों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में हुए इस समारोह को एक साहसिक और प्रेरणादायक कदम बताया गया. लोगों का मानना है कि यह पहल न केवल परंपरा का सम्मान करती है, बल्कि बेटियों को समान अधिकार और सम्मान देने की दिशा में एक मजबूत संदेश भी देती है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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