Rajasthan

70 साल से कायम विरासत! पेड़ के नीचे शुरू हुआ सफर, जानिए जयपुर के सबसे चर्चित विंटेज हेयर सैलून की कहानी

जयपुर. राजधानी जयपुर अपने हैरिटेज लुक और सुंदरता के लिए भारत के सबसे मशहूर शहरों में से एक है, जहां आज भी चमक-धमक और चकाचौंध के बीच चारदीवारी के बाजारों की दुकानों में पीढ़ियों की विरासत और हैरिटेज लुक नजर आता है. आज-कल के फैशन के जमाने में जयपुर में एक से बढ़कर एक हेयर सैलून हैं, लेकिन चौड़ा रास्ता स्थित किशोर हेयर ड्रेसर 70 साल पुराना जयपुर का सबसे खास हेयर सैलून माना जाता है. यहां प्रवेश करते ही 70 के दशक की यादें ताजा हो जाती हैं, क्योंकि 70 साल बाद भी यह सैलून विंटेज और हैरिटेज लुक में नजर आता है.

संचालक आदित्य शरण ने लोकल 18 को बताया कि इस सैलून की शुरुआत वर्ष 1957 में उनके दादा स्व. किशोर कुमार ने की थी. करीब 80 साल पहले उनके दादा 13 साल की उम्र में दौसा जिले के बांदीकुई के पास स्थित गुड़ाकटला गांव से जयपुर आए थे. उन्होंने एक पेड़ के नीचे कुर्सी लगाकर अपने हेयर सैलून की शुरुआत की थी. आज आदित्य इस व्यवसाय की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. इस आइकॉनिक सैलून में जब ग्राहक कटिंग और शेविंग के लिए आते हैं तो इसके विंटेज लुक को देखकर हैरान रह जाते हैं.

सैलून के हर कोने में दिखाई देती है विंटेज लुक की झलक

आदित्य शरण ने लोकल 18 को बताया कि कटिंग और शेविंग के तरीके और स्टाइल भले ही बदल गए हों, लेकिन सैलून का लुक आज भी 70 साल पुरानी यादों को ताजा कर देता है. सैलून में मौजूद लगभग हर वस्तु पुराने समय की है, जो बीते दौर की याद दिलाती है. किशोर हेयर सैलून की सबसे खास बात यह है कि यहां 25 कुर्सियां हैं, जहां एक साथ कई लोग बैठकर कटिंग करवा सकते हैं. आदित्य शरण बताते हैं कि उनके दादाजी के बाद उनके पिता गोविंद शरण ने किशोर हेयर ड्रेसर को लंबे समय तक संभाला.

100 फीसदी हबर्ल उत्पादों का ही होता है उपयोग

आदित्य के अनुसार, पूरे प्रदेश में 2,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया, जो आज अपने-अपने सैलून चलाकर आजीविका कमा रहे हैं. उनके सैलून में 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक हर्बल उत्पादों का उपयोग किया जाता है, जिनमें ऑर्गेनिक तेल, शैंपू और नीम की लकड़ी की कंघियां शामिल हैं. किशोर हेयर सैलून पूरे वर्ष खुला रहता है और लोग दूर-दूर से यहां कटिंग और शेविंग करवाने आते हैं. खास बात यह है कि जिस तरह यह सैलून पीढ़ियों पुरानी विरासत है, उसी तरह यहां आने वाले ग्राहक भी पीढ़ी दर पीढ़ी जुड़े हुए हैं.

50 पैसे से 150 रुपए तक पहुंचा कटिंग का सफर

आदित्य शरण बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब कटिंग और शेविंग के लिए कोई लग्जरी सैलून या पार्लर नहीं हुआ करते थे. लोग पेड़ के नीचे या किसी दीवार के पास अपने सीमित सामान के साथ दुकान शुरू कर देते थे. इसलिए उस दौर में कटिंग और शेविंग की कीमतें भी बेहद कम होती थीं. उनके दादाजी के समय में मात्र 50 पैसे में कटिंग हो जाती थी, लेकिन बदलते समय और बढ़ती महंगाई के साथ कटिंग और शेविंग की कीमतें 50 पैसे से बढ़कर 150 रुपए तक पहुंच गई है. वहीं आज कटिंग और शेविंग के अलावा स्टाइलिश हेयरकट, आईब्रो, फेस थ्रेडिंग, फेस डी-टैन, हेयर वैक्स, सीरम और हेयर स्प्रे जैसी कई आधुनिक सेवाएं भी उपलब्ध हैं, जो उस दौर में नहीं हुआ करती थी.

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