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वो कालजयी गाना, मोहम्मद रफी की आवाज में हुआ अमर, मैसिव हिट निकली धर्मेंद्र की मूवी

Last Updated:April 24, 2026, 19:30 IST

Mohammed Rafi Dharmendra Superhit Song : हिंदी सिनेमा में 1969 का साल बहुत ही खास है. इसी साल नवंबर माह में रिलीज हुई ‘आराधना’ फिल्म ने बॉलीवुड को सही मायने में पहला सुपर स्टार दिया. राजेश खन्ना के जैसा स्टारडम फिल्म इंडस्ट्री में किसी को नहीं मिला. हजारों की तादाद में लोग उनकी एक झलक पाने के लिए डटे रहते थे. लड़कियों में एक अलग ही लेवल की दीवानगी थी. सिर्फ दो साल में ही राजेश खन्ना ने 10 से ज्यादा हिट फिल्में दे दीं. राजेश खन्ना के साथ किशोर कुमार की आवाज का जादू फिल्मों को हिट करवाने में अहम रोल अदा करता रहा. चार साल बाद ही 1973 में मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र का एक ऐसा गाना आया जिसने समीकरण बदल दिए. धर्मेंद्र नए सुपर स्टार बनकर उभरे. राजेश खन्ना का स्टारडम फीका पड़ गया. धर्मेंद्र का वो गाना कौन सा था और वो फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं………

70 के दशक में राजेश खन्ना-किशोर कुमार और आरडी बर्मन की तिकड़ी ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया. 1969 में शक्ति सामंत के निर्देशन में बनकर रिलीज हुई फिल्म ‘आराधना’ ने इतिहास रच दिया. फिल्म में म्यूजिक एसडी बर्मन का था. किशोर कुमार के सदाबहार गाने थे. किशोर दा बड़ी मुश्किल से राजेश खन्ना के लिए प्लेबैक सिंगिंग के लिए राजी हुए थे. इससे पहले वो देवानंद साहब के लिए गाते थे. ‘आराधना’ ने राजेश खन्ना को रातोंरात सुपर स्टार बना दिया. ‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू’, ‘रूप तेरा मस्ताना’, ‘बागों में बहार है’ जैसे गाने आज भी दिल को लुभा लेते हैं. इसके बाद सफर (1970), द ट्रेन (1970), और कटी पतंग (1970) जैसी फिल्मों में आरडी बर्मन-किशोर कुमार और राजेश खन्ना की तिकड़ी ने धमाल मचाया. इन फिल्मों का गीत-संगीत, कहानी-स्क्रीनप्ले सबकुछ शानदार था.

वैसे तो 1969 से ही राजेश खन्ना के स्टारडम का सूरज उगने लगा था. मुमताज के उनकी जोड़ी खूब जमती थी. दोनों ने ‘दो रास्ते’ (1969), बंधन (1969), सच्चा झूठा (1969) , दुश्मन (1973), अपना देश (1972), राजा रानी (1973), रोटी (1974) और आपकी कसम (1974) जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया है. 1973 आते-आते राजेश खन्ना का स्टारडम फीका पड़ने लगे. आरडी बर्मन का म्यूजिक और किशोर कुमार की आवाज भी उनकी मदद नहीं कर पाई.

इसी बीच धर्मेंद्र के सितारे चमक उठे. उनकी एक ऐसी फिल्म आई जिसमें मोहम्मद रफी ने कालजयी गाने गाए थे. इस फिल्म ने धर्मेंद्र को स्टार बना दिया. 1973 में टॉप की 30 फिल्मों में धर्मेंद्र की 8 फिल्में शामिल थीं. धर्मेंद्र की इस साल ‘जुगनू’, ‘यादों की बारात’, ‘कहानी किस्मत की’, ‘कीमत’, ‘झील के उस पार’, ‘दोस्त’ और ‘ज्वार-भाटा’ जैसी फिल्में आई थीं. सभी फिल्में हिट रहीं.  धर्मेंद्र टॉप स्टार थे. राजेश खन्ना का इसके बाद स्टारडम फीका होता गया. धर्मेंद्र की यह फिल्म ‘लोफर’ थी जिसमें मुमताज भी नजर आई थीं. इस फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था. यह संगीतकार जोड़ी मोहम्मद रफी को खूब पसंद करती थी. ‘लोफर’ फिल्म के दो गाने अमर हो गए. आइये जानते हैं कि कैसे इन गानों ने धर्मेंद्र की पॉप्युलैरिटी बढ़ाई. कैसे मोहम्मद रफी ने किशोर कुमार की आवाज के जादू को फीका किया.

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‘लोफर’ फिल्म 16 मार्च 1973 को रिलीज हुई थी जिसका डायरेक्शन ए. भीमसिंह ने किया था. कहानी विजय ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले नाबेंदु घोष ने लिखा था. फिल्म में धर्मेंद्र-मुमताज लीड रोल में थे. इसके अलावा, प्रेमनाथ, ओम प्रकाश सिंह और केएन सिंह जैसे सितारे भी फिल्म में नजर आए थे. प्रेमनाथ मेन विलेन थे. प्रोड्यूसर आरसी कुमार थे.

‘लोफर’ का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म में कुल 6 गाने थे जिसमें से ‘मैं तेरे इश्क में’, ‘कोई शहरी बाबू’ और ‘आज मौसम बड़ा बेईमान है’ बहुत पॉप्युलर हुए थे. आज भी ये गाने सुपरहिट हैं. गीतकार आनंद बख्शी की कलम से सभी हिट गाने निकले थे. ‘आज मौसम बड़ा बेईमान है’ गाना धर्मेंद्र पर फिल्माया गया था. मोहम्मद रफी ने इस गाने को अपनी मखमली आवाज से अमर कर दिया. गाना आज भी सुपरहिट है.

लोफर फिल्म में धर्मेंद्र ने एक चोर की भूमिका निभाई थी. फिल्म में वो मुमताज के प्यार में पड़ जाते हैं. यह मूवी 1961 की अमेरिकन फिल्म पॉकेटफुल ऑफ मिरेकल्स से इंस्पायर्ड थी. फिल्म की सबसे बड़ी उसका म्यूजिक था. ‘कोई शहरी बाबू’ में फरीदा जलाल-मुमताक का डांस सबसे दिलचस्प था.

करीब 85 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 2.6 करोड़ की कमाई की थी. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी. 1973 में कमाई के मामले में 8वें नंबर पर रही थी. इस फिल्म से धर्मेंद्र का करियर और चमका. आगे चलकर उन्होंने ‘शोले’ (1975) जैसे कालजयी फिल्म में अपने अभिनय का जादू बिखेरा. फिर तो धर्मेंद्र ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उधर, राजेश खन्ना का स्टारडम 1975 आते-आते खत्म हो गया. यह भी दिलचस्प संयोग है कि 1973 में ही अमिताभ बच्चन ‘जंजीर’ फिल्म से एंग्रीमैन बनकर उभरे. ‘जंजीर’ फिल्म का रोमांटिक सॉन्ग ‘दीवाने हैं दीवानों को ना घर चाहिए’ रफी साहब ने ही गाया था.

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April 24, 2026, 13:17 IST

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