Rajasthan

झुंझुनूं में 1962 से शुरू हुई परंपरा, आस्था की चांदी में चमकता 9 फीट ऊंचा मोहर्रम की शान बना चांदी का ताजिया!

Last Updated:June 26, 2026, 17:36 IST

Chandi Ka Taziya: झुंझुनूं में मोहर्रम के अवसर पर निकाला जाने वाला धोबियान बिरादरी का चांदी का ताजिया अपनी अनूठी बनावट और 1962 से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा के लिए विशेष पहचान रखता है. समय के साथ श्रद्धालुओं के सहयोग से इसका आकार और भव्यता बढ़ती गई और आज यह लगभग 9 फीट ऊंचा व 9 किलो चांदी से निर्मित आकर्षक ताजिया बन चुका है. इसे कर्बला नहीं ले जाया जाता, बल्कि चौपदारान मस्जिद के नीचे चौक में दो दिनों तक सजाया जाता है, जहां बड़ी संख्या में लोग इसकी जियारत के लिए पहुंचते हैं.

झुंझुनूं शहर में करीब 11 ताजिये निकाले गए. लेकिन, धोबियान बिरादरी का चांदी का ताजिया अपनी अनूठी बनावट और ऐतिहासिक परंपरा के कारण विशेष पहचान रखता है. मोहर्रम के अवसर पर इसे देखने के लिए शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचते हैं. करीब 60 वर्षों से लगातार निकाला जा रहा यह ताजिया झुंझुनूं की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का अहम हिस्सा बन चुका है.

इस चांदी के ताजिए की शुरुआत वर्ष 1962 में हुई थी. उस समय इसका आकार केवल आधा फीट था और इसमें लगभग आधा किलो चांदी का उपयोग किया गया था. समय के साथ लोगों के सहयोग, चढ़ावे और आस्था के कारण इसका स्वरूप लगातार भव्य होता गया. वर्तमान में इसकी ऊंचाई करीब 9 फीट और वजन लगभग 9 किलो चांदी का हो चुका है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाता है.

इस ताजिए की सबसे खास बात यह है कि इसे अन्य ताजियों की तरह कर्बला नहीं ले जाया जाता. इसकी बैठक चौपदारान मस्जिद के नीचे चौक में दो दिनों तक सजाई जाती है, जहां बड़ी संख्या में लोग इसे देखने और जियारत करने पहुंचते हैं. मोहर्रम की 10वीं तारीख की रात इसे सम्मानपूर्वक वापस इमामबाड़े में सुरक्षित रख दिया जाता है, जिससे इसकी पवित्रता और सुरक्षा बनी रहती है.

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चांदी के ताजिए की शुरुआत भी बेहद रोचक रही. पहले धोबियान बिरादरी की ओर से चादर और पन्नी का ताजिया निकाला जाता था. साल 1962 में पिलानी की एक अकीदतमंद महिला ने चांदी से बना हथेली के आकार का छोटा ताजिया चढ़ावे के रूप में भेंट किया. इसी घटना से प्रेरित होकर तत्कालीन लाइसेंसधारी गुलाम अहमद खोखर ने पूर्ण रूप से चांदी का ताजिया बनाने का निर्णय लिया.

समय के साथ श्रद्धालुओं के चढ़ावे और सहयोग से चांदी की मात्रा बढ़ती गई और ताजिया भी अधिक भव्य बनता गया. आज यह 9 फीट ऊंचा चांदी का ताजिया झुंझुनूं ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र माना जाता है. मोहर्रम के दौरान इसकी एक झलक पाने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और इसकी सुंदर कारीगरी की सराहना करते हैं.

इस परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार आगे बढ़ा रहा है. इसकी शुरुआत गुलाम अहमद खोखर ने की थी. आज यह धोबियान बिरादरी का चांदी का ताजिया अपनी अनोखी बनावट के कारण विशेष पहचान रखता है. इस ताजिए को देखने के लिए मुस्लिम वर्ग ही नहीं बल्कि हिन्दू लोग भी आते हैं. हर साल इसकी सजावट अलग अलग तरीके की होती है. इस बार भी इस चांदी के ताजिये को विशेष रूप से तैयार किया गया है.

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