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गोरखपुर नौका विहार में मोरिंगा, नीम, तुलसी सूप और जूस के लिए लगती है लंबी लाइन, मॉर्निंग हेल्थ ड्रिंक ट्रेंड पर विशेषज्ञों की जाने सलाह

Last Updated:June 26, 2026, 16:44 IST

गोरखपुर नौका विहार में इन सूप और जूस को बेचने वाले ‘राहुल’ बताते हैं कि वह रोज सुबह 5 बजे से 9 बजे तक ही स्टॉल लगाते हैं. उनका कहना है कि नियमित रूप से इन पेय पदार्थों का सेवन करने वाले कई ग्राहक खुद को पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करने की बात बताते हैं. सुबह के समय यहां लोगों की लंबी लाइन भी देखने को मिलती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मोरिंगा, नीम और तुलसी जैसे पौधों में कई लाभकारी तत्व होते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी का “जड़ से इलाज” या दवा का विकल्प नहीं माना जा सकता है.

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गोरखपुरः बदलती जीवनशैली के बीच लोग अब प्राकृतिक और आयुर्वेदिक पेय पदार्थों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. शहर के नौका विहार क्षेत्र में हर सुबह ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है, जहां लोग मोरिंगा (सहजन), नीम, तुलसी और अन्य औषधीय पौधों से तैयार सूप और जूस पीने के लिए सुबह-सुबह पहुंचते हैं. यहां सुबह 5 बजे से 9 बजे तक बड़ी संख्या में लोग इन पेय पदार्थों का सेवन करते हैं.

मोरिंगा को क्यों माना जाता है खास

मोरिंगा, जिसे सहजन भी कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर पौधा माना जाता है. इसकी पत्तियों में विटामिन A, C, E, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे “सुपरफूड” भी कहा जाता है. कई शोधों में यह सामने आया है कि संतुलित आहार के हिस्से के रूप में मोरिंगा का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पोषण की कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है.

मोरिंगा के अलावा नीम और तुलसी के पत्तों से तैयार जूस और सूप भी यहां लोगों के बीच लोकप्रिय हैं. आयुर्वेद में नीम को त्वचा और शरीर की सफाई के लिए उपयोगी माना गया है, जबकि तुलसी को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मौसमी संक्रमण से बचाव में सहायक माना जाता है.

सुबह 5 से 9 बजे तक मिलता है सूप

नौका विहार में इन सूप और जूस को बेचने वाले ‘राहुल’ बताते हैं कि वह रोज सुबह 5 बजे से 9 बजे तक ही स्टॉल लगाते हैं. उनका कहना है कि नियमित रूप से इन पेय पदार्थों का सेवन करने वाले कई ग्राहक खुद को पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करने की बात बताते हैं. सुबह के समय यहां लोगों की लंबी लाइन भी देखने को मिलती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मोरिंगा, नीम और तुलसी जैसे पौधों में कई लाभकारी तत्व होते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी का “जड़ से इलाज” या दवा का विकल्प नहीं माना जा सकता, यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी, लीवर या अन्य गंभीर बीमारी है, या वह नियमित दवाएं ले रहा है, तो ऐसे हर्बल पेय का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.

प्राकृतिक और ऑर्गेनिक पेय पदार्थों की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि लोग अब अपने खान-पान को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं. मॉर्निंग हेल्थ ड्रिंक के रूप में मोरिंगा, नीम और तुलसी से बने सूप शहर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, हालांकि इनके सेवन के साथ संतुलित आहार और चिकित्सकीय सलाह को भी उतना ही महत्व देना चाहिए.

About the AuthorRajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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