अल्ट्रासाउंड से ही हो जाएगा कैंसर कोशिकाओं का काम तमाम, IISc के वैज्ञानिकों को मिली महासफलता, लाखों मरीजों के लिए खुशखबरी

Last Updated:July 03, 2026, 15:25 IST
Ultrasound Destroy Oral Cancer Cells: कैंसर कोशिकाएं बेहद जिद्दी होती हैं. इसके इलाज के लिए कीमोथेरेपी का सहारा लिया जाता है लेकिन कीमोथेरेपी में हेल्दी कोशिकाएं भी मर जाती हैं लेकिन प्रतिष्ठित भारतीय संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने इसका जबर्दस्त तोड़ निकाल लिया है. वैज्ञानिकों ने अल्ट्रासाउंड से निकलने वाले वेव से ही कैंसर कोशिकाओं को मारने में सफलता प्राप्त की है. यानी अल्ट्रासाउंड की मशीन से ही कैंसर कोशिकाओं को मार दिया जाएगा. यह बहुत बड़ी खबर है.
अल्ट्रासाउंड से कैंसर का इलाज.
Ultrasound Destroy Oral Cancer Cells: भारत में ओरल कैंसर सबसे ज्यादा पुरुषों में होता है. हर साल लगभग एक लाख ओरल कैंसर के मामले सामने आ जाते हैं. इनमें से अधिकांश की जान चली जाती है. ओरल कैंसर के लिए अब तक सबसे अच्छा इलाज कीमोथेरेपी को माना जाता है. पर इसमें एक दिक्कत है. कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाएं तो मर जाती है लेकिन इसके साथ ही वहां मौजूद हेल्दी कोशिकाएं भी मरने लगती है. दूसरी ओर ये कोशिकाएं दोबारा से कैंसर कोशिकाओं में विकसित होने लगती है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने इसके लिए शानदार उपलब्धि हासिल की है. वैज्ञानिकों ने अल्ट्रासाउंड के मध्यम फ्रीक्वेंसी से ही इन कोशिकाओं को मारने में सफलता प्राप्त कर ली है. साथ ही इससे हेल्दी कोशिकाएं भी नहीं मरती.अल्ट्रासाउंड के ध्वनि तरंगों से कैंसर का इलाज आईआईएससी के वैज्ञानिकों ने बताया कि हमने अपनी रिसर्च में पाया है कि कम-आवृत्ति यानी लो-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड ओरल कैंसर की कोशिकाओं को सटीकता से नष्ट कर सकता है. इसमें हेल्दी कोशिकाओं को काफी हद तक सुरक्षित रखता है. इस रिसर्च से भविष्य में लाखों ओरल कैंसर के मरीज बिना किसी कष्ट के इलाज करा सकेंगे. अल्ट्रासाउंड से ध्वनि तरंगें निकलती है. अल्ट्रासाउंड मशीनें 2 मेगाहर्ट्ज से 18 मेगाहर्ट्ज या उससे भी अधिक की फ्रीक्वेंसी पर काम करती हैं. इसे इस तरह समझिए. वास्तव में 1 मेगाहर्ट्ज का मतलब है कि एक सेकेंड में कोई आवाज 10 लाख कंपन करती है. हमारे कान में सुनने की क्षमता 20 हर्टज तक ही है. यानी हमारा कान इस आवाज को नहीं सुन सकता है. ये कंपन शरीर के अंदर जाते हैं और वहां से टकराकर वापस आ जाते हैं. इसे डॉक्टर कैलकुलेट कर बताते हैं कि कहां क्या स्थिति है. पर ओरल कैंसर के केस में ये ध्वनि तरंग जिस तरह से कैंसर कोशिकाओं पर चोट करती है, उसी से ये मर जाती हैं. इस तरह ओरल कैंसर का इलाज सिर्फ अल्ट्रासाउंड से ही कर दिया जाता है. वैज्ञानिकों की यह तकनीक ओरल कैंसर के लिए भविष्य में और अधिक सुरक्षित इलाज का रास्ता खोल सकती है.
सीधे कैंसर वाली कोशिका पर अटैक
यह अध्ययन आईआईएससी के वैज्ञानिकों ने एमएस रामैया मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों के साथ मिलकर किया है. इसमें ओरल कैंसर से पीड़ित मरीजों में से ट्यूमर के नमूनों को ले लिया गया. उसके बाद इन नमूनों पर लो फ्रीक्वेंसी वाले अल्ट्रासाउंड से आघात कराया गया. फिर इसका परीक्षण किया गया. इसमें मरीजों से सीधे लिए गए ट्यूमर के नमूनों का उपयोग किया गया जिससे आगे की प्रक्रिया बेहद आसान हो गई. आमतौर पर लैब में इस तरह की कोशिकाएं चूहों से बनाई जाती है. इसका फायदा यह हुआ कि शोधकर्ताओं को भारतीय मरीजों में पाए जाने वाले कैंसर की विविधता को बेहतर ढंग से समझने और उसका आकलन करने में मदद मिली. शोधकर्ताओं ने पाया कि ओरल कैंसर की कोशिकाएं अल्ट्रासाउंड से उत्पन्न मध्यम स्तर के यांत्रिक दबाव के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि इन कैंसर कोशिकाओं में ट्रोपोमायोसिन 2.1 नामक प्रोटीन का स्तर सामान्य से कम होता है. जब इन कोशिकाओं को लो-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड के संपर्क में लाया गया, तो कैंसर कोशिकाएं चुनिंदा रूप से नष्ट हो गईं. दूसरी ओर मुंह की हेल्दी एपिथीलियल कोशिकाएं काफी हद तक सुरक्षित रहीं.
चाहे कैसी भी कैंसर कोशिका, सब मर जाती
इस अध्ययन के सह-लेखक और आईआईएससी के बायोइंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर अजय तिजोरे ने कहा कि इस शोध की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दिखाया गया है कि अल्ट्रासाउंड आधारित मैकेनोस्टिम्यूलेशन कैंसर कोशिकाओं की यांत्रिक कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें चुनिंदा तरीके से निशाना बना सकता है. उन्होंने बताया कि इस तकनीक में किसी तरह की हीट या दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसके बजाय मध्यम स्तर के मैकेनिकल प्रेशर का उपयोग कर कैंसर कोशिकाओं को इतना नुकसान पहुंचाया जाता है कि वे दोबारा ठीक नहीं हो पातीं और नष्ट हो जाती हैं. अध्ययन में यह भी पाया गया कि लो-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड कैंसर कोशिकाओं की आसपास के टिशूज में फैलने और उनमें घुसपैठ करने की क्षमता को भी काफी हद तक कम कर देता है.
अध्ययन की लेखिका और आईआईएससी की पीएचडी शोधार्थी रश्मिता लुहा ने कहा हमें सबसे ज्यादा हैरानी इस बात से हुई कि अलग-अलग मरीजों और कैंसर के विभिन्न चरणों से प्राप्त कैंसर कोशिकाओं में अल्ट्रासाउंड का प्रभाव लगभग एक जैसा था. सभी कैंसर कोशिकाएं अल्ट्रासाउंड के प्रति बेहद संवेदनशील थीं जबकि सामान्य कोशिकाओं पर इसका असर बहुत कम पड़ा. चूंकि अल्ट्रासाउंड तकनीक पहले से ही चिकित्सा क्षेत्र में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है और यह एक आसान प्रक्रिया है, इसलिए शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में ओरल कैंसर के इलाज के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.
About the AuthorLakshmi Narayan
18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें
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