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AIF Scheme: खेती के साथ शुरू करें अपना बिजनेस, सरकार देगी ₹2 करोड़ तक सस्‍ता लोन

Last Updated:August 14, 2026, 15:58 IST

Government Scheme For Farmers : एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) योजना का मकसद किसानों को एग्री-एंट्रप्रेन्‍योर बनाना है. अगर कोई किसान अकेले बड़ा वेयरहाउ या प्लांट नहीं लगा सकता, तो वह अपने गांव के 10-20 किसानों के साथ मिलकर FPO या स्वयं सहायता समूह बनाकर वेयरहाउस, सॉर्टिंग प्लांट या मिनी राइस मिल जैसे काम शुरू कर सकता है.

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खेती के साथ शुरू करें अपना बिजनेस, सरकार देगी ₹2 करोड़ तक सस्‍ता लोन Zoomसरकार किसानों को उद्यमी बनाने के लिए एआईएफ स्‍कीम लाई है. (प्रतीकात्‍मक फोटो : एआई)

नई दिल्‍ली. खून-पसीना बहाकर फसल उगाने वाले किसान को कई बार अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है. कटाई के तुरंत बाद भंडारण और प्रोसेसिंग की आधुनिक सुविधाएं न होने के कारण फल, सब्जियां और अनाज खराब हो जाते हैं. किसानों को इसी लाचारी से निकालने के लिए केंद्र सरकार एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) योजना लाई है. यह योजना किसानों को केवल फसल उत्पादक तक सीमित न रखकर उन्हें अपनी उपज का व्यापारी और कृषि-उद्यमी बनने का शानदार मौका देती है. किसान सरकार से दो करोड़ तक का सस्‍ता लोन लेकर अपना एग्री-बिजनेस शुरू कर सकता है.

एआईएफ योजना का दायरा बेहद व्यापक बनाया गया है, ताकि गांव और कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ा हर व्यक्ति और समूह इसका फायदा उठा सके. कोई भी आम किसान इस येाजना के लिए आवेदन कर सकता है. इसके अलावा ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO/FPC), संयुक्त देयता समूह (JLG) और नए जमाने के एग्री-स्टार्टअप्स भी इसके पात्र हैं. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), विपणन सहकारी समितियों और कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) भी एआईएफ योजना का लाभ उठा सकती हैं.

किस काम के लिए मिलता है AIF लोन?

इस योजना का मुख्य मकसद फसल कटाई के बाद के प्रबंधन (Post-Harvest Infrastructure) को मजबूत करना है, ताकि किसान अपनी उपज को सीधे बेचने के बजाय उसकी वैल्यू बढ़ाकर बाजार में उतार सके. इस योजना के तहत कई तरह के एग्री-बिजनेस शुरू किए जा सकते हैं.

गोदाम, साइलो और आधुनिक कोल्ड स्टोरेज: अनाज को नमी और कीड़ों से बचाने के लिए बड़े वेयरहाउस और साइलो बनाए जा सकते हैं. वहीं फल, सब्जियों और दूध जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए कोल्ड स्टोरेज, प्री-कूलिंग यूनिट और सुरक्षित पैकहाउस स्थापित किए जा सकते हैं.
तापमान नियंत्रित लॉजिस्टिक्स: खराब होने वाले कृषि उत्पादों को सुरक्षित एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने के लिए इंसुलेटेड गाड़ियां और रीफर वैन (Reefer Vans) खरीदने के लिए भी लोन मिलता है.
अनाज और दालों की प्रोसेसिंग यूनिट्स: गेहूं से आटा, मैदा, सूजी और दलिया बनाने की मिलें, धान की कुटाई और पॉलिशिंग यूनिट्स, दाल मिल तथा अनाजों की ग्रेडिंग व डी-स्टोनिंग (कंकड़ अलग करने) की आधुनिक मशीनें लगाई जा सकती हैं.
फल-सब्जियों और तिलहन प्रोसेसिंग: फलों को सुरक्षित पकाने के लिए राइपनिंग चैंबर (Ripening Chambers), सब्जियों की लंबी उम्र के लिए डीप फ्रीजिंग प्लांट (IQF), आधुनिक तेल घानी/कोल्हू और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन यूनिट्स की स्थापना की जा सकती है.
पैकेजिंग और सेफ्टी यूनिट्स: कृषि उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग और उन्हें बैक्टीरिया से बचाने वाली रेडिएशन (Irradiation) यूनिट्स लगाने को भी लोन लिया जा सकता है.

एआईएफ से जिन कामों के लिए लोन मिलता है, उसकी विस्‍तार से जानकारी आप यहां क्लिक करके ले सकते हैं.

एआईएफ लोन राशि और ब्‍याज?

योजना के तहत बैंक प्रोजेक्ट की लागत और व्यवहार्यता के आधार पर लोन स्वीकृत होते हैं. यह लोन बिना किसी गारंटी के मिलता है. दो करोड़ तक का लोन लिया जा सकता है. लोन पर केंद्र सरकार 3% सालाना ब्याज सब्सिडी अधिकतम 7 वर्षों के लिए देती है. उदाहरण के लिए अगर लोन 9 फीसदी की दर से मिलता है तो तीन फीसदी ब्‍याज सब्सिडी मिलती है और प्रभावी ब्‍याज दर बस 6 फीसदी रह जाती है. यहां यह जान लें कि यह कोई नकद सरकारी सहायता नहीं है. यह एक रियायती बैंक लोन है, जिसे तय समय-सीमा और किस्तों में चुकाना होता है.

एआईएफ लोन के लिए कैसे करें आवेदन?

बिजनेस तय करें: सबसे आपको यह तय करना होगा कि आप कौन सा एग्री बिजनेस करेंगे. गोदाम, कोल्ड चेन, दाल मिल या पैकेजिंग यूनिट लगाएंगे.
विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनवाएं: किसी तकनीकी विशेषज्ञ या चार्टर्ड अकाउंटेंट से अपने प्रोजेक्ट की DPR तैयार कराएं. इसमें जमीन की स्थिति, मशीनों का खर्च, कुल लागत, संभावित उत्पादन, बाजार की मांग और लोन चुकाने की पूरी वित्तीय योजना शामिल होनी चाहिए.
ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन: Agriculture Infrastructure Fund के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर खुद को रजिस्टर करें और DPR व आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना आवेदन जमा करें.
बैंक द्वारा जांच और लोन मंजूरी: नोडल एजेंसी से प्राथमिक सत्यापन के बाद आपका आवेदन संबंधित बैंक को भेजा जाएगा. बैंक आपकी रीपेमेंट क्षमता और प्रोजेक्ट की व्यावहारिकता देखकर लोन मंजूर करेगा.
ब्याज छूट का सीधा फायदा: लोन जारी होने के बाद तय नियमों के तहत 3% ब्याज सबवेंशन का लाभ आपके लोन खाते में जुड़ना शुरू हो जाएगा.
About the Authorरुली बिश्‍नोई

रुली बिश्‍नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी Hindi (hindi..com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

August 14, 2026, 15:58 IST

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