‘कैबरे’ कहलाते थे ये गाने, फिर कैसे बना ‘आइटम सॉन्ग’? 1999 की फिल्म शूल से जुड़ी है कहानी

Last Updated:August 14, 2026, 16:42 IST
हिंदी सिनेमा में ‘कैबरे’ और ‘वैंप डांस’ से शुरू हुआ सफर कैसे बॉलीवुड का सबसे चर्चित ‘आइटम नंबर’ बना? हेलन और बिंदु के दौर से लेकर 1990 के दशक में ‘आइटम सॉन्ग’ शब्द के पहली बार वजूद में आने और मीडिया द्वारा इस टर्म को गढ़ने की दिलचस्प कहानी है. 1999 की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘शूल’ के सुपरहिट गाने ‘यूपी-बिहार लूटने’ और शिल्पा शेट्टी के बिना कोरियोग्राफी वाले ठुमकों से फिल्मी प्रमोशन और संगीत का पूरा दौर बदला था
नई दिल्ली. ‘मोनिका, ओ माय डार्लिंग…’, ‘आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चलूं…’ और ‘छम्मा छम्मा’ जैसे गाने सुनते ही बॉलीवुड के उस दौर की याद आती है, जब फिल्मों में ग्लैमर, संगीत और नृत्य का एक खास मेल हुआ करता था. उस समय ऐसे गानों को आमतौर पर ‘कैबरे’ कहा जाता था. कई बार इन्हें ‘वैंप डांस’, ‘स्पेशल अपीयरेंस’ या कलाकार के किरदार के हिसाब से अलग नाम भी दिया जाता था. लेकिन कुछ दशकों बाद बॉलीवुड की शब्दावली में एक नया शब्द तेजी से लोकप्रिय हुआ ‘आइटम सॉन्ग’. दिलचस्प बात यह है कि इस बदलाव की कहानी 1990 के दशक के आखिर की एक फिल्म से खास तौर पर जोड़ी जाती है.
1950 से लेकर 1980 और 1990 के दशक तक हिंदी फिल्मों में ऐसे डांस नंबर अकसर कहानी के मुख्य किरदारों से अलग महिला कलाकारों या वैंप के जरिए पेश किए जाते थे. हेलन इस परंपरा का सबसे बड़ा नाम बनीं. उनके कई डांस सीक्वेंस फिल्मों की पहचान बन गए. बाद में बिंदु, अरुणा ईरानी और कई दूसरी एक्ट्रेसेस ने भी इस तरह के किरदार निभाए.
इन गानों का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं था. कई फिल्मों में वैंप का किरदार कहानी में हीरो-हीरोइन के विपरीत दुनिया को दिखाता था. उसका डांस उसी करेक्टर का हिस्सा होता था. इसलिए ‘कैबरे’ शब्द केवल डांस फॉर्म नहीं, बल्कि एक खास तरह की फिल्मी शैली के लिए मशहूर हो गया था.
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1990 के दशक में हिंदी सिनेमा में संगीत का बाजार और स्टार सिस्टम तेजी से बदल रहा था. ऐसे गाने अब सिर्फ वैंप के किरदार तक सीमित नहीं रहे. बड़ी एक्ट्रेसेस भी ऐसे डांस नंबर करने लगीं और कई बार गाना फिल्म की कहानी से ज्यादा उसके प्रचार और लोकप्रियता का जरिया बन गया.
यही वह दौर था जब ‘आइटम नंबर’ शब्द धीरे-धीरे मीडिया और फिल्मी बातचीत में जगह बनाने लगा. ‘छम्मा छम्मा’ के साथ इसका चलन बड़ा और जब 1999 की फिल्म ‘शूल’ को आई. फिल्म ‘शूल’ में एक ऐसा डांस नंबर आया जिसके बोल हैं- ‘दिल वालों के दिल का करार लूटने, मैं आई हूं यूपी-बिहार लूटने’. गाने में शिल्पा शेट्टी नजर आई थीं. इसे सपना अवस्थी तथा चेतन शशिताल ने गाया था. संगीत शंकर-एहसान-लॉय का था और बोल समीर ने लिखे थे.
शिल्पा शेट्टी ने इस गाने में जमकर ठुमके लगाए. उनके डांस और गाने का देसी अंदाज दर्शकों के बीच बेहद चर्चित हुआ. इस गाने से पहले न तो ‘आइटम नंबर’ जैसा कोई शबद् प्रचलन में था और न ही ‘आइटम गर्ल’. 1999 में जब शिल्पा शेट्टी का ये गाना आया, तब मीडिया ने ये शब्द क्वाइन किया. इसके बाद मीडिया में इस तरह के डांस नंबर के लिए ‘आइटम नंबर’ और इसे करने वाली एक्ट्रेसेस के लिए ‘आइटम गर्ल’ जैसे शब्द तेजी से इस्तेमाल होने लगे. फिल्म का ये गाना काफी हिट रहा.
इस गाने से जुड़ा मजेदार फेक्ट ये भी है कि इस गाने के लिए कोई कोरियोग्राफी नहीं की गई थी. कोरियोग्राफर अहमद खान ने शिल्पा शेट्टी से कहा था कि गाने की रिदम को खुद पकड़िए और अपने हिसाब से लटके-झटके दीजिए. इतना ही नहीं सपना अवस्थी को भी ये नहीं पता था कि इस गाने पर शिल्पा शेट्टी डांस करने वाली हैं.
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं थी. उन्हें लगा था कि उनकी फोक आवाज के कारण ये गाना किसी बैंकग्राउड डांसर या साइड आर्टिस्ट पर क्रिएट किया जाएगा. इससे पहले उन्होंने ‘छैंया-छैंया’ गाया था, जिसपर मलाइका अरोड़ा ने जबरदस्त डांस किया था. कुल मिलाकर ‘कैबरे’ से ‘आइटम सॉन्ग’ तक का सफर बॉलीवुड में महिला किरदारों, स्टार पावर, संगीत के बाजार और फिल्म प्रमोशन के बदलते तौर-तरीकों की कहानी भी है.
फिल्म ‘शूल’ की बात करें तो फिल्म की कहानी एक ईमानदार और असूलों वाले पुलिस अफसर इन्स्पेक्टर समर प्रताप सिंह (मनोज बाजपेयी) के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म का क्लाइमेक्स बेहद असरदार और झकझोर देने वाला है. फिल्म के लेखक व निर्माता रामगोपाल वर्मा हैं. इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला.
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August 14, 2026, 16:42 IST



