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पाइपलाइन में पानी नहीं, साहब के पास समाधान नहीं! भीषण गर्मी में बूंद-बूंद को तरसे लोग, महिलाओं ने मटकी फोड़ जताया रोष

Last Updated:May 11, 2026, 14:39 IST

Jodhpur Water Crisis: जोधपुर के डिगाड़ी क्षेत्र में पिछले चार वर्षों से जारी पेयजल संकट ने अब विकराल रूप ले लिया है. भीषण गर्मी के बीच पानी की सप्लाई न होने से परेशान श्री यादी नगर और कुम्हारों की ढाणी के लोगों ने जलदाय विभाग के कार्यालय मटकी फोड़ प्रदर्शन किया. लोगों को मजबूरी में 1000 रुपये तक देकर निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं. क्षेत्रवासियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हर घर तक जल सप्लाई सुनिश्चित नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र बनाया जाएगा.

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Water Crisis in Jodhpur: पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर शहर में सूर्य देव के तेवर तीखे होने के साथ ही पेयजल का संकट भी विकराल रूप धारण करने लगा है. शहर के बाहरी इलाकों में शुमार डिगाड़ी क्षेत्र के बाशिंदों के लिए यह गर्मी किसी सजा से कम नहीं है. श्री यादी नगर, कुम्हारों की ढाणी और आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोग पिछले चार वर्षों से पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए घंटों संघर्ष करना पड़ रहा है. इस भीषण गर्मी में जब पानी की मांग सबसे अधिक होती है, तब नलों का सूखा रहना स्थानीय प्रशासन और जलदाय विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

लंबे समय से मिल रहे कोरे आश्वासनों से तंग आकर आखिरकार डिगाड़ी क्षेत्र की महिलाओं और स्थानीय निवासियों का धैर्य जवाब दे गया. बड़ी संख्या में लोग मटकियां लेकर जलदाय विभाग के कार्यालय पहुँचे और वहाँ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी महिलाओं ने विभाग के द्वार पर खाली मटकियां फोड़कर प्रतीकात्मक रूप से अपना दुख व्यक्त किया. स्थानीय निवासी रमेश ने बताया कि वे पिछले चार सालों से अधिकारियों की चौखट पर माथा टेक रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया. इलाके में पाइपलाइन तो है, लेकिन उसमें पानी का दबाव इतना कम है कि वह अंतिम छोर तक पहुँच ही नहीं पाता. लोगों का आरोप है कि विभाग के अधिकारी केवल बजट और तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं.

टैंकर माफिया का राज और आर्थिक बोझपानी की अनुपलब्धता ने क्षेत्र में टैंकर माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं. स्थानीय महिलाओं का कहना है कि उन्हें पीने और घरेलू काम के लिए मजबूरी में निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है. एक टैंकर की कीमत 700 से 1000 रुपये तक वसूल की जा रही है. एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए महीने में हजारों रुपये केवल पानी पर खर्च करना आर्थिक रूप से कमर तोड़ने वाला साबित हो रहा है. छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्थिति और भी दयनीय हो गई है, क्योंकि भीषण गर्मी में पानी की कमी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी जन्म दे रही है. क्षेत्रवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने जल्द ही नई पाइपलाइन बिछाने या अवैध कनेक्शन काटने जैसे कदम नहीं उठाए, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे.

अधिकारों की लड़ाईक्षेत्र के लोगों का मानना है कि साफ और पर्याप्त पानी पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है. विभाग को चाहिए कि वे डिगाड़ी क्षेत्र की बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से नई पानी की टंकियों का निर्माण करें और वितरण प्रणाली को दुरुस्त करें. प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक विभाग स्वयं टैंकरों के माध्यम से निशुल्क जल आपूर्ति सुनिश्चित करे. यदि जल्द ही सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो आगामी दिनों में यह आक्रोश सड़कों पर चक्काजाम के रूप में भी बदल सकता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan

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