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60 के बाद ये 5 बीमारियां कर सकती हैं परेशान, डॉक्टर की ये 5 बातें गांठ बांध लेंगे तो नहीं होगी दिक्कत

World Senior Citizens Day : 60 उम्र का ऐसा पड़ाव है जब व्यक्ति की शारीरिक सक्रियता कम होने लगती है. दूसरी तरफ अगर लाइफस्टाइल सही नहीं है तो इसी उम्र के बाद बीमारियों का घेराव ज्यादा होने लगता है. जोड़ों में दर्द, हड्डियों की कमजोरी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और भूलने की समस्या जैसी परेशानी इस उम्र के बाद आम होने लगती है. इस उम्र से बुजुर्गों के लिए विशेष ख्याल की भी जरूरत पड़ती है. अक्सर बुजुर्ग सब चीजों से हार मान कर दवाइयों के सहारे जीवन को गुजारने लगते हैं लेकिन ऐसा नहीं भी हो सकता है. अगर आप शुरुआती जीवन से ही अपनी दिनचर्या को ठीक कर लेंगे तो बुढ़ापा भी हेल्दी कट सकता है. इसके लिए हमें क्या करना होगा इस पर हमने देश के मशहूर जेरियाट्रिक मेडिसिन एंड लॉन्गिविटी साइंस के डॉक्टर प्रसून चटर्जी से बात की.

60 के बाद इन 5 बीमारियों का खतरा

अपोलो ग्रुप ऑफ हॉस्पीटल में जेरियाट्रिक मेडिसिन के कंट्री हेड डॉ. प्रसून चटर्जी ने बताया कि 60 की उम्र को अक्सर हमलोग रिटायरमेंट की उम्र बना लेते हैं लेकिन यदि आपने अपने जीवन को सही से जिया है तो यह उम्र कोई सीमा नहीं है. यह बात सही है कि 60 के बाद शरीर में उम्र का असर दिखने लगता है. कई ऐसी परेशानियां बढ़ने लगती है जो पहले से मामूली थी. इसके बावजूद हम 60 के बाद अपनी लाइफ को बेहतर बना सकते हैं. जिस तरह को गाड़ी पुरानी होती है, हमारे शरीर के अंग भी पुराने होते हैं लेकिन अगर गाड़ियों की सही समय पर सर्विसिंग कर दी जाए तो यह सालों साल तक नई ही दिखती है. ठीक उसी तरह अगर हम अपने शरीर का सही से ख्याल रखें तो हम भी 60 के बाद भी जवान दिख सकते हैं. 60 के बाद सबसे ज्यादा लोगों को हाई बीपी और डायबिटीज की समस्या होती है. इसके अलावा जोड़ों का दर्द और हड्डियों से संबंधित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. वहीं पिछले कुछ सालों से भारत में भी बुजुर्गों में भूलने की बीमारी के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं.

बीमारियों से बचने के मंत्र

ऋषि-मुनियों वाली दिनचर्या : डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि 70-80 साल पहले हमारे देश की औसत आयु 40-50 के आसपास थी लेकिन तब भी हमारे ऋषि मुनि 100 साल से अधिक जीवित रहते थे. आखिर वे क्यों इतने दिनों तक जीते थे. वास्तव में हमारे ऋषि-मुनियों का जीवन बहुत ही सिंपल और अनुशासित था. वे शरीर के बायलॉजिकल क्लॉक को फॉलो करते थे. सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच ही भोजन कर लेते थे. सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करते थे. ऐसे में यदि आज भी हम अपने पूर्वजों की दिनचर्या को अपना लें तो 60 के बाद हमारा जीवन भी हेल्दी रह सकते हैं.

कम खाएं फिट रहे : डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि कम खाना हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. वास्तव में हमारा खान-पान यह तय करता है कि कि 80 साल की उम्र में हमारी सेहत कैसी होगी. कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि जो बच्चा कम खाता है, आगे की जिंदगी उसकी बेहद हेल्दी गुजरती है. जापान के बच्चों पर यह अध्ययन किया गया था. ये बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक कम खाते थे. यानी डाइट रिस्ट्रक्शन बहुत बड़ा फेक्टर है. हमारे ऋषि-मुनि सदियों से यह जानते थे. हेल्थ के मामले में वे हमसे ज्यादा आगे थे. वे हमेशा 6 बजे सुबह से लेकर 6 बजे शाम के बीच ही खाते थे. इसलिए आप जब भी खाना खाएं कोशिश करें कि हर बार आपका पेट कम से 20 प्रतिशत तक भूखा रहे.

पेट को बनाएं हाइब्रिड- अपने पेट को हाइब्रिड मोड में रखना चाहिए. यानी हर तरह की चीज थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खानी चाहिए. इसका मतलब यह नहीं कि आप फास्ट फूड, जंक फूड, सिगरेट-शराब पीने लगे. हमेशा बैलेंस फूड खाना चाहिए. घर का बना खाना बेस्ट है. साबुत अनाज, चावल, दाल, बहुत सारी सब्जियां, ताजे फल, सीड्स आदि का भरपूर सेवन करें. हेल्दी कार्बोहाइड्रैट लें. एक स्टडी में भी यह पाया गया है कि जो लोग अपनी डाइट में 50 प्रतिशत तक कार्बोहाइड्रैट लेते हैं उनकी आयु लंबी होती है. यह भी पाया गया है कि शाकाहारी होना लंबी उम्र का बड़ा फेक्टर है. शाकाहारी भोजन कैंसर, हार्ट डिजीज के जोखिम को 20 से 25 प्रतिशत तक कम कर देता है. वहीं साइट्रस फ्रूट्स जैसे कि संतरे, कीवी, अन्नास, ब्लूबेरी, स्ट्राबेरी, नींबू आदि भी लंबी आयु को बढ़ाती है.

क्या नहीं खाएं ये जानना ज्यादा जरूरी- डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि लंबी उम्र के लिए क्या न खाएं, यह भी जानना बहुत जरूरी है. कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि जंक फूड, फास्ट फूड खाना हेल्थ के लिए बहुत नुकसानदेह है और यह आयु को भी छोटी कर देती है. ये फूड इंस्टेंट कैलोरी तो देती है लेकिन एनर्जी नहीं देती. नमक और चीन कम से कम खाएं. रेड मीट तो बिल्कुल न खाएं. चीनी उम्र को छोटी करने के लिए बहुत बड़ा फेक्टर है. चीनी डीजल की तरह है जो पॉल्यूशन छोड़ने के अलावा इंजन की आयु भी घटा देती है. इसके बाद यदि आप सिगरेट और अल्कोहल का सेवन करेंगे तो भी आयु लंबी नहीं होगी.

एक्सरसाइज अहम: डॉ. प्रसून चटर्जी ने बताया कि खान-पान के बाद मांसपेशियों में हरकत लाना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि एक मिनट की एक्सरसाइज आपकी आयु को 7 मिनट तक बढ़ा देती है. आपके मसल्स में जब तक हरकतें नहीं आएंगी तब यह हेल्दी नहीं रहेंगी. मसल्स का मुख्य भोजन एक्सरसाइज ही है. अगर आप रोज कम से कम 7 हजार कदम चल लेंगे तो यह आपकी आयु को लंबी करने में बहुत मदद करेगा. सप्ताह में 150 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें.

सोशल और फैमिली लाइफ भी जरूरी: डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि आने वाले समय में सोशल आइसोलेशन या खुद को अलगाव महसूस करना बहुत बड़ी बीमारी होने वाली है. अध्ययन में देखा गया है कि जो लोग सोशल या फैमिली आइसोलेशन में रहते हैं, उन्हें भुलने की बीमारी डिमेंशिया और डिप्रेशन का खतरा ज्यादा रहता है. इससे आत्महत्या की प्रवृति भी बढ़ती है. इसलिए जहां आप रहते हैं वहां एक अच्छा सामाजिक परिवेश तैयार करें. अच्छे दोस्त बनाएं, उनके साथ गप्पे लड़ाएं, परिवार में सबसे बात करें, पिकनिक पर जाएं, घूमें, टहलें और खुश रहें.

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