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ये 5 सुपर-प्रोड्यूसर मुर्गियां, जो देती हैं साल भर अंडों की बारिश, जानिए कौन-कौन सी हैं! – Uttar Pradesh News

Last Updated:January 16, 2026, 19:08 IST

आज के समय में मुर्गी पालन किसानों और पशुपालकों के लिए आय का एक भरोसेमंद जरिया बन चुका है. विशेषकर वे नस्लें जो अधिक अंडे देती हैं, नियमित आमदनी सुनिश्चित करती हैं. सही नस्ल का चुनाव कर आप घरेलू पालन या व्यावसायिक फार्मिंग के माध्यम से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. आगे जानिए टॉप 5 ऐसी नस्लें जो अंडा उत्पादन में बेस्ट मानी जाती हैं.

लेगॉर्न (Leghorn) नस्ल को दुनिया की सबसे अधिक अंडे देने वाली मुर्गी माना जाता है. यह सफेद अंडे देती है और साल में 280 से 320 तक या इससे भी अधिक अंडे देने की क्षमता रखती है. कम चारा, तेज उत्पादन और कम देखभाल इसकी सबसे बड़ी खासियतें हैं.

दूसरे नंबर पर लोहमैन ब्राउन नस्ल की बात करें, तो यह व्यावसायिक मुर्गी पालन में बेहद लोकप्रिय मानी जाती है. यह लगातार और स्थिर अंडा उत्पादन करती है, जिससे बाजार में सप्लाई बनी रहती है. भूरे अंडों की अच्छी मांग के कारण यह नस्ल अपने मालिकों को बेहतर दाम दिलाती है.

श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के पशुपालन और दुग्ध विज्ञान विभाग के प्रो. धर्मेंद्र सिंह के अनुसार, ईसा ब्राउन एक संकर नस्ल है, जो कम उम्र में ही अंडा देना शुरू कर देती है. यह सालाना लगभग 300 अंडे देती है और मौसम के उतार-चढ़ाव में भी अच्छा प्रदर्शन करती है. इसी वजह से छोटे और बड़े दोनों पशुपालकों के बीच इसकी अच्छी डिमांड बनी रहती है.

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अंडा उत्पादन के लिए मुर्गी पालन करने वाले पशु मालिकों के बीच काले चमकदार पंखों वाली ऑस्ट्रेलोर्प नस्ल भी एक बेहतर विकल्प मानी जाती है. इसमें ठंड सहने की अच्छी क्षमता होती है. यह साल में लगभग 250 या उससे अधिक अंडे दे सकती है. स्वभाव से शांत होने के कारण यह नस्ल घरेलू पालन के लिए भी उपयुक्त रहती है.

अब अगर रोड आइलैंड रेड नस्ल की बात करें, तो यह मुर्गियां अपने मजबूत शरीर और बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए पहचानी जाती हैं. यह भारतीय मौसम में आसानी से अनुकूलन कर लेती हैं और साल में 250 से अधिक अंडे देने की क्षमता रखती हैं. देसी परिस्थितियों में भी यह नस्ल एक भरोसेमंद विकल्प मानी जाती है.

टॉप 5 नस्लों के अलावा गोल्डन कॉमेट, वायंडोट और ग्रामप्रिया जैसी नस्लें भी अंडा उत्पादन के मामले में किसी से कम नहीं हैं. हालांकि नस्ल का चयन करते समय स्थानीय जलवायु, चारे की उपलब्धता और बाजार की मांग को ध्यान में रखना जरूरी होता है. सही नस्ल का चुनाव करने से अंडा उत्पादन बढ़ता है और पशुपालकों की आमदनी में भी इजाफा होता है.

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January 16, 2026, 19:08 IST

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