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कम-से-कम वादा तो पूरा किया, मुफ्त बस यात्रा स्कीम पर हाईकोर्ट में PIL का दांव पड़ा उल्टा, चीफ जस्टिस ने की तारीफ

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मुफ्त बस यात्रा स्कीम पर हाईकोर्ट में PIL का दांव पड़ा उल्टा, जज ने की तारीफ

Last Updated:June 18, 2026, 16:46 IST

केरल हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील शमीम अहमद एम पी ने मुफ्त बस यात्रा योजना पर कई विधिक सवाल खड़े किए. उन्होंने पीठ को बताया कि यह योजना पूरी तरह भेदभावपूर्ण है. वकील ने दावा किया कि यह योजना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के मूल सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन करती है. इसमें महिलाओं और ट्रांसजेंडरों को बिना किसी आय सीमा या आवासीय योग्यता के मुफ्त यात्रा दी जा रही है.

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मुफ्त बस यात्रा स्कीम पर हाईकोर्ट में PIL का दांव पड़ा उल्टा, जज ने की तारीफZoomमुफ्त बस यात्रा योजना को संविधान के खिलाफ बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. (पीटीआई)

कोच्चि. केरल हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को साधारण केएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने वाली यूडीएफ सरकार की नई ‘प्रियदर्शिनी योजना’ उसके चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है. चीफ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी. एम की पीठ ने यह भी कहा कि यह सरकार का एक नीतिगत निर्णय है जो कामकाजी वर्ग की महिलाओं के हित में लिया गया है.

खुद को एक उत्साही नागरिक और करदाता बताने वाले मुहम्मद फ़िरदौस की जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘कम से कम उन्होंने अपना वादा (चुनाव के दौरान किया गया) तो पूरा किया है.’

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील शमीम अहमद एम पी ने पीठ को बताया कि यह योजना ‘भेदभावपूर्ण’ है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है क्योंकि यह महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को बिना किसी आय सीमा, आवासीय योग्यता या उस चिन्हित नफे- नुकसान के आकलन के बिना मुफ्त बस यात्रा प्रदान करती है जिसका वह समाधान करना चाहती है.

वहीं सरकार ने अदालत को बताया कि दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में भी ऐसी ही योजनाएं लागू की गई हैं. दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इस योजना से सरकारी खजाने पर प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये या सालाना लगभग 800 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. जनहित याचिका में नीति को मंजूरी देने की गति पर भी सवाल उठाया गया है.

About the AuthorRakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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