Unique Garba: 1300 साल पुराना मंदिर, 40 साल की अनूठी परंपरा, जालोर के इस अनोखे गरबे को देखने उमड़ती है भीड़

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जालोर में अनोखा गरबा, पुरुष धारण करते हैं माता का स्वरूप, उमड़ती है भीड़
Last Updated:October 15, 2026, 13:03 IST
Nagaur Chamunda Mata Unique Garba: नवरात्रि में गरबा तो कई जगह होता है, लेकिन जालोर के प्राचीन चामुंडा माता मंदिर की परंपरा सबसे अलग है. यहां पुरुष माता का रूप धारण कर गरबा करते हैं और श्रद्धालु इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं. मंदिर को पिछोला की पाल के नाम से भी जाना जाता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां माता के चरणों की पूजा का विशेष महत्व है. इस गरबा परंपरा से जुड़े श्यामलाल बताते हैं कि यह केवल नृत्य नहीं, बल्कि माता की आराधना और पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का प्रतीक है. आधुनिक संगीत के दौर में भी यहां पारंपरिक गरबा की पहचान कायम है.
जालोर. राजस्थान के जालोर में जगह-जगह गरबा देखने को मिलते हैं, लेकिन चामुंडा माता मंदिर का गरबा अपनी अलग पहचान रखता है. नवरात्रि के दौरान यहां पुरुष माता का स्वरूप धारण कर पारंपरिक तरीके से गरबा करते हैं. इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए जालोर शहर ही नहीं, जिलेभर के अलग-अलग इलाकों से भी लोग यहां पहुंचते हैं. जालोर के प्राचीन चामुंडा माता मंदिर में नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और परंपरा देखने को मिलती है.
मंदिर करीब 1300 साल पुराना है और यहां माता के चरणों की पूजा की जाती है. इस स्थान को पिछोला की पाल के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां माता की चरण पादुकाओं का विशेष महत्व है. यहां माता के चरणों की पूजा होती है। पिछोला की पाल के नाम से भी इस स्थान को जाना जाता है.
पुरुष माता का स्वरूप धारण कर करते हैं गरबा
इस गरबा परंपरा से जुड़े अनुभवी व्यक्ति श्यामलाल ने लोकल 18 को बताया कि वे खुद कई साल पहले इस गरबा परंपरा में शामिल होता था. उस समय माता का स्वरूप धारण करके पारंपरिक तरीके से गरबा किया जाता था. हमारे लिए यह सिर्फ गरबा नहीं, माता की आराधना और वर्षों पुरानी परंपरा है. आज भी जब यहां पुरुष माता का स्वरूप धारण करके गरबा करते हैं और पूरा जालोर इसे देखने पहुंचता है. खास बात यह है कि आधुनिक दौर में गरबा का स्वरूप काफी बदल गया है.
जालोर के इस मंदिर में पारंपरिक तरीके से होता है गरबा
बड़े शहरों में डीजे और आधुनिक संगीत के साथ गरबा किया जाता है, लेकिन जालोर के इस मंदिर में आज भी पारंपरिक तरीके से गरबा करने की परंपरा कायम है. ढोल और भक्ति गीतों के बीच होने वाला यह गरबा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है. 40 साल से चली आ रही इस गरबा परंपरा ने आज भी अपना पारंपरिक रंग बनाए रखा है. यही वजह है कि चामुंडा माता मंदिर का यह गरबा जालोर की धार्मिक आस्था के साथ-साथ उसकी लोक संस्कृति और परंपरा की भी खास पहचान बन चुका है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Jalor,Rajasthan
First Published :
October 15, 2026, 13:02 IST



