US-South Korea Relation: Donald Trump-S Korea|डोनाल्ड ट्रंप ने एक और दोस्त को दिया दगा चीन-रूस के शागिर्द की गिद्ध नजर THAAD-पैट्रियट निकला धोखेबाज?

Last Updated:August 18, 2026, 10:13 IST
Donald Trump-South Korea Relation: अमेरिका और दक्षिण कोरिया की दोस्ती उनकी रणनीतिक साझेदारी की नींव रही है. हालांकि बदलते दौर में एक बार फिर से अमेरिका ने अपने दोस्त को दगा दे दिया और उसका सुरक्षा घेरा कमजोर कर दिया है. वो भी तब, जब नॉर्थ कोरिया अपनी गिद्ध जैसी नजरें उस पर गड़ाए हुए है और उसे रूस-चीन का पूरा साथ भी मिल रहा है.
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अमेरिका-दक्षिण कोरिया में तनाव.
US-South Korea Defence Conflict: अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सालों पुरानी सैन्य साझेदारी अचानक एक नाटकीय मोड़ पर आ खड़ी हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों के सामने जो बातें कही, वे सिर्फ एक सामान्य शिकायत नहीं थीं. वे एक गहरे असंतोष और सवाल का इजहार कही जा सकती हैं. ट्रंप ने साफ-साफ कहा कि दक्षिण कोरिया ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में मदद करने से इनकार कर दिया. यही इनकार अब दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का बड़ा कारण बन गया है.
ट्रंप का फोन और सीधा ‘नो थैंक्स’
ट्रंप ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग को फोन किया. उस वक्त ट्रंप ने फोन के दूसरी ओर मौजूद साउथ कोरियन प्रेसिडेंट से साफ पूछा- ‘क्या आप ईरान के मामले में हमारी मदद करेंगे? अगर चाहें तो करें, हमें जरूरत नहीं है.’ इस सवाल का जवाब आया- ‘नो थैंक्स’. बस यही वो पल था, जब अमेरिका की दक्षिण कोरिया को लेकर नीति बदल गई. ट्रंप को ना सुनने की आदत ही नहीं है और ये जवाब उन्हें बुरी तरह चुभा. उन्होंने कहा- ‘ठहरिये, हमारे 39 हजार सैनिक वहां किम जोंग उन से तुम्हारी रक्षा कर रहे हैं. तुम्हारा पड़ोसी और तुम ईरान जैसे आसान सैन्य अभियान में हमारी मदद नहीं करोगे? यह तो अजीब है.’ ट्रंप का लहजा तल्ख होता जा रहा था और उनकी नाराजगी साफ झलक रही थी. उन्होंने फोन कॉल पर बार-बार दोहराया कि अमेरिका को ईरान में मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन सहयोगी देश अगर मदद से मुंह मोड़ ले तो फिर अमेरिका क्यों अरबों डॉलर खर्च करके उनकी सुरक्षा करे?
दक्षिण कोरिया से सेनाएं कम कर रहा है अमेरिका.
अरबों डॉलर का सवाल और NATO का जिक्र
पहले ही डोनाल्ड ट्रंप NATO से धोखा खाए हुए थे, ऐसे में उन्होंने सिर्फ दक्षिण कोरिया की बात नहीं की. उन्होंने बड़े स्तर पर सवाल उठाया कि अमेरिका दक्षिण कोरिया और अन्य सहयोगियों की सुरक्षा पर अरबों और अरबों डॉलर खर्च करता जा रहा है. उन्होंने NATO का जिक्र किया और सीधा तर्क दिया कि जब सहयोगी देश अमेरिकी सैन्य अभियानों में हाथ बंटाने से कतराते हैं, तो फिर अमेरिका उनकी सुरक्षा का बोझ क्यों उठाए? ट्रंप का कहना था कि वो दूसरों की सुरक्षा में क्यों उलझे रहें. उनका यह सवाल सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं था बल्कि यह अमेरिका की पुरानी नीति पर ही सवालिया निशान था.
सैन्य अभ्यास में अचानक कटौती
हमेशा की तरह ट्रंप की नाराजगी सिर्फ शब्दों तक नहीं रही. उन्होंने बड़ा एक्शन लेते हुए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को आदेश दिया कि दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों को जहां तक हो सके वहां तक कम किया जाए. ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके ट्रंप ने लिखा कि वे इन अभ्यासों से खुश नहीं हैं. यही वो पल था जब भड़के ट्रंप ने अपनी किम जोंग उन से अच्छे रिश्तों का हवाला दिया और उत्तर कोरिया का उनकी सरकार के प्रति सम्मानजनक रवैये का जिक्र किया. उन्होंने दुनिया के सामने कह दिया कि ऐसे में महंगे और पूरी तरह अनुचित-शत्रुतापूर्ण अभ्यास चलाना सही नहीं है. अभ्यास पूरी तरह रद्द करना संभव नहीं था, इसलिए उन्हें घटा दिया गया. यह फैसला दक्षिण कोरिया के लिए बड़ा झटका था.
अमेरिका ने कहा है कि बिना सहयोग के वो सुरक्षा की गारंटी नहीं देगा.
दक्षिण कोरिया की सफाई
दक्षिण कोरिया ने इतना सब कुछ होता देखकर सफाई देनी शुरू कर दी. उसने कहा कि वह ईरान में युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही की आजादी बहाल करने के प्रयासों में व्यावहारिक और सैन्य योगदान के बारे में वाशिंगटन से सलाह-मशविरा कर रहा है. बात साफ थी वो ट्रंप की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता, ऐसे में वह पूरी तरह मुंह नहीं मोड़ रहा, लेकिन ट्रंप के मांगे गए स्तर की सीधी सैन्य मदद देने को तैयार नहीं दिखा. ये पूरी घटना सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है बल्कि यह अमेरिका की उस पुरानी सोच को चुनौती दे रहा है जिसमें वह सहयोगियों की सुरक्षा का सारा बोझ खुद उठाता रहा है. दक्षिण कोरिया की ‘ना’ उनके लिए सबूत बन गई कि वो सिर्फ सुरक्षा चाहता है, बदले में सहयोग नहीं देना चाहता.
दिलचस्प ये है कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के रिश्ते लंबे समय से मजबूत माने जाते रहे हैं, लेकिन ट्रंप के इस रुख ने उस मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरान अभियान में मदद से इनकार, सैन्य अभ्यास में कटौती और खर्च पर सवाल- ये तीनों मिलकर एक नाटकीय मोड़ बन गए हैं. अब देखना होगा कि दक्षिण कोरिया इस नाराजगी को कैसे शांत करता है और अमेरिका अपने सिक्योरिटी कमिटमेंट में किस हद तक दोबारा परिभाषित करता है. फिलहाल तो ट्रंप का संदेश साफ है- मदद नहीं करोगे तो सुरक्षा का बोझ भी अकेले नहीं उठाया जाएगा.
About the AuthorPrateeti Pandey
में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…
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August 18, 2026, 10:13 IST



