न बल्लेबाज न गेंदबाज, जब पिच क्यूरेटर को मिला ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड, इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

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न बल्लेबाज न गेंदबाज, जब पिच क्यूरेटर को मिला ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड
Last Updated:August 19, 2026, 00:02 IST
when pitch curator received the man of the match award: इंटरनेशनल क्रिकेट में प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार आमतौर पर बल्ले या गेंद से कमाल करने वाले खिलाड़ी को मिलता है, लेकिन एक मुकाबले में मैदान के असली हीरो कोई क्रिकेटर नहीं, बल्कि पिच क्यूरेटर बने. बारिश से मुकाबला लगभग धुलने की कगार पर था, मगर क्यूरेटर और उनकी टीम की मेहनत ने खेल को संभव बनाया.साउथ अफ्रीका के पिच क्यूरेटर क्रिस स्कॉट को मैन ऑफ द मैच चुना गया था.
नई दिल्ली. इंटरनेशनल क्रिकेट में प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार आमतौर पर बल्ले या गेंद से कमाल करने वाले खिलाड़ी को मिलता है, लेकिन एक मुकाबले में मैदान के असली हीरो कोई क्रिकेटर नहीं, बल्कि पिच क्यूरेटर बने. बारिश से मुकाबला लगभग धुलने की कगार पर था, मगर क्यूरेटर और उनकी टीम की मेहनत ने खेल को संभव बनाया. इसके बाद जो हुआ, वह इंटरनेशनल क्रिकेट में आज भी बेहद अनोखा उदाहरण माना जाता है. ऐसा पहली बार हुआ था, जब पिच क्यूरेटर को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया हो.
दरअसल, यह कहानी दिसंबर साल 2000 की है, जब दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच टेस्ट सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला जोहान्सबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में खेला जाना था. दक्षिण अफ्रीका पहले ही सीरीज के शुरुआती दोनों टेस्ट जीतकर अजेय बढ़त हासिल कर चुका था. ऐसे में तीसरा मैच सीरीज के नतीजे के लिहाज से भले ही ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं था, लेकिन लगातार बारिश ने इसे आयोजित करना बड़ी चुनौती बना दिया. मैच का पहला और चौथा दिन पूरी तरह बारिश की भेंट चढ़ गया. मैदान में जगह-जगह पानी भर गया था और ऐसा लग रहा था कि मुकाबला पूरी तरह बेनतीजा रह जाएगा, लेकिन हेड क्यूरेटर क्रिस स्कॉट और उनकी टीम ने हार नहीं मानी.
दिन-रात मेहनत कर मैदान को खेलने लायक बनायाभारी बारिश के बीच स्कॉट और उनकी टीम लगातार मैदान को सुखाने और पिच को सुरक्षित रखने में जुटी रही. दूसरे दिन कुछ खेल संभव हो सका, लेकिन इसके बाद फिर बारिश ने मैदान की हालत बिगाड़ दी. आखिरी दिन दोबारा मुकाबला कराने के लिए ग्राउंड्स स्टाफ को पानी से भरे आउटफील्ड और पिच पर घंटों काम करना पड़ा. आज के दौर में मैदान से पानी निकालने के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और सब-एयर जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं, लेकिन उस समय परिस्थितियां इतनी आसान नहीं थीं. सीमित संसाधनों के बावजूद ग्राउंड्स स्टाफ ने पानी हटाने और मैदान को तैयार करने के लिए लगातार मेहनत की.
तीन घंटे में मैदान तैयार कियालगातार बारिश के बाद इतने कम समय में मैदान को दोबारा खेलने लायक बनाना बेहद मुश्किल था. उस दौर में आधुनिक तकनीक की कमी के कारण ग्राउंड्समैन को काफी हद तक मैनुअल तरीकों और उपलब्ध उपकरणों पर निर्भर रहना पड़ता था. क्रिस स्कॉट की अगुआई में टीम ने इसी चुनौती को स्वीकार किया. उन्होंने पिच और आउटफील्ड से पानी हटाने के लिए लगातार काम किया और आखिरकार मुकाबले को आगे बढ़ाने में सफलता हासिल की. यही वह प्रयास था, जिसने मैच अधिकारियों को भी प्रभावित किया.
क्रिकेटर की जगह क्यूरेटर को मिला सम्मानक्रिस स्कॉट और उनकी ग्राउंड्स टीम की इस असाधारण मेहनत को देखते हुए मैच अधिकारियों ने उन्हें मैन ऑफ द मैच के सम्मान से नवाजा. इंटरनेशनल क्रिकेट में किसी पिच क्यूरेटर को इस तरह का सम्मान दिए जाने का यह बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक उदाहरण बना. इस मुकाबले में क्रिकेटरों ने भले ही मैदान पर प्रदर्शन किया हो, लेकिन मैच हो ही सके, इसके पीछे स्कॉट और उनकी टीम की भूमिका सबसे अहम थी. लगातार बारिश के बावजूद उन्होंने मैदान को तैयार किया और क्रिकेट को संभव बनाया.
क्रिस स्कॉट का नाम सिर्फ इस अनोखे पुरस्कार के कारण ही याद नहीं किया जाता. वह उन क्यूरेटरों में भी शामिल रहे, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए ऐतिहासिक वनडे मुकाबले के लिए पिच तैयार की थी. उस मैच में दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के 434 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. इस तरह स्कॉट का करियर इस बात का उदाहरण बन गया कि क्रिकेट में सिर्फ मैदान पर मौजूद खिलाड़ी ही जीत के नायक नहीं होते. कई बार पर्दे के पीछे काम करने वाले लोग भी पूरे मुकाबले की दिशा तय कर देते हैं.
About the AuthorShivam Upadhyay
परिचय
शिवम उपाध्याय एक खेल पत्रकार हैं, जो नवंबर 2025 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. क्रिकेट उनकी विशेषज्…
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
August 19, 2026, 06:00 IST



