क्लास खत्म होते ही कहां गायब हो जाते हैं कोटा के स्टूडेंट्स? जानिए पढ़ाई के बाद उनका रूटीन और पसंदीदा ठिकाने

Last Updated:June 30, 2026, 14:32 IST
Kota Education Hub: देशभर में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का सबसे बड़ा केंद्र माने जाने वाले कोटा में हजारों छात्र हर साल अपने सपनों को साकार करने पहुंचते हैं. घंटों की कोचिंग और सेल्फ स्टडी के बाद छात्र तनाव कम करने और खुद को तरोताजा रखने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों का रुख करते हैं. कई विद्यार्थी लाइब्रेरी, कैफे, चंबल रिवर फ्रंट, सेवन वंडर्स पार्क, किशोर सागर झील और शांत गार्डन जैसे स्थानों पर समय बिताते हैं. कुछ छात्र ग्रुप स्टडी करते हैं, जबकि कई खेल, वॉक या हल्की-फुल्की बातचीत के जरिए मानसिक तनाव कम करने की कोशिश करते हैं. पढ़ाई और संतुलित दिनचर्या के बीच यह समय उन्हें नई ऊर्जा देता है.
देश की कोचिंग कैपिटल. यहां दिनभर लाखों छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए किताबों में डूबे रहते हैं, लेकिन जैसे ही क्लास खत्म होती है, शहर की तस्वीर बदल जाती है. शाम ढलते ही स्टूडेंट्स का रुख होता है. उन फूड स्टॉल्स की ओर, जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. कहीं चाय की चुस्कियां हैं, कहीं गोलगप्पों का स्वाद, तो कहीं रोल, छोले-कुलचे, चाट और जूस-शेक की महक. यही वजह है कि कोटा की शामें सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि स्वाद और दोस्तों के साथ बिताए यादगार पलों के लिए भी जानी जाती हैं. कोटा के स्टूडेंट एरिया में कई ऐसे फूड स्टॉल हैं, जहां जाए बिना विद्यार्थियों की शाम अधूरी सी लगती है. नए कोटा के इंद्र विहार इलाके में शाम होते ही सड़कों पर रौनक बढ़ जाती है. क्लास खत्म होने के बाद छात्र अपने दोस्तों के साथ चाय की दुकानों पर बैठकर दिनभर की थकान मिटाते हैं. एक कप चाय और दोस्तों की महफिल पढ़ाई के तनाव को कुछ देर के लिए भुला देती है.
अगर बात छात्राओं की करें, तो उनकी पहली पसंद गोलगप्पे हैं. जवाहर नगर इलाके के गोलगप्पे स्टॉल्स पर शाम के समय छात्राओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है. सहेलियों के साथ हंसी-ठिठोली करते हुए गोलगप्पों का स्वाद लेना उनकी शाम का पसंदीदा हिस्सा बन चुका है.
लड़कों के बीच रोल और फास्ट फूड का अलग ही क्रेज है. इंद्र विहार की रोल की दुकानों पर शाम ढलते ही लंबी कतारें लग जाती हैं. कम बजट में भरपेट और स्वादिष्ट खाना मिलने के कारण रोल विद्यार्थियों की पहली पसंद बन चुके हैं. अगर लैंडमार्क सिटी इलाके की बात करें, तो यहां दिल्ली स्टाइल छोले-कुलचे का अलग ही जलवा है. शाम होते ही स्टॉल्स पर छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ती है. कई विद्यार्थी अपने हॉस्टल और पीजी के लिए छोले-कुलचे पैक कराकर ले जाते हैं और इन्हें ही अपने डिनर का हिस्सा बनाते हैं वहीं, कई छात्र दोस्तों के साथ बैठकर स्वाद का आनंद लेते हुए अपनी शाम को यादगार बना देते हैं.
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अगर लैंडमार्क सिटी इलाके की बात करें, तो यहां दिल्ली स्टाइल छोले-कुलचे का अलग ही जलवा है. शाम होते ही स्टॉल्स पर छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ती है. कई विद्यार्थी अपने हॉस्टल और पीजी के लिए छोले-कुलचे पैक कराकर ले जाते हैं और इन्हें ही अपने डिनर का हिस्सा बनाते हैं. वहीं, कई छात्र दोस्तों के साथ बैठकर स्वाद का आनंद लेते हुए अपनी शाम को यादगार बना देते हैं.
इसी इलाके में राधे भैया की बृजवासी चाट भी छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय है. यहां की चटपटी चाट का स्वाद ऐसा है कि एक बार खाने वाला दोबारा जरूर लौटता है. शाम के समय स्टॉल पर लंबी कतारें लग जाती हैं और छात्र-छात्राएं बड़े चाव से चाट का आनंद लेते दिखाई देते हैं. इसके अलावा तलवंडी, राजीव गांधी नगर, महावीर नगर और विज्ञान नगर जैसे छात्र बहुल इलाकों में भी चाय, कुल्हड़ वाले कले, जूस, शेक और अन्य स्ट्रीट फूड की दुकानों पर देर रात तक रौनक बनी रहती है.
इधर इंद्र विहार, तलवंडी और राजीव गांधी नगर के जूस सेंटरों पर शाम से देर रात तक विद्यार्थियों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है. कोई ताजे फलों का जूस पीना पसंद करता है, तो कोई मैंगो शेक, बनाना शेक या चॉकलेट शेक का स्वाद लेता है. कम कीमत में मिलने वाले ये हेल्दी ड्रिंक्स न सिर्फ छात्रों को ताजगी देते हैं, बल्कि लंबे समय तक पढ़ाई के लिए नई ऊर्जा भी प्रदान करते हैं. यही वजह है कि कोटा के जूस पॉइंट्स भी स्टूडेंट लाइफ का अहम हिस्सा बन चुके हैं.
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