कहानी जयपुर के वार्ड 69 की, यहां के हालात से समझिए नगर निगम चुनाव का मिजाज

जयपुर. राजस्थान में निकाय चुनाव का सियासी शोर अब आखिरी दौर में पहुंच गया है. पहले चरण में 9 सितंबर को मतदान होना है, जबकि जयपुर में दूसरे चरण के तहत 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे. चुनाव प्रचार के बीच जयपुर के वार्ड 69 की गलियों में पहुंचें तो चुनाव का एक अलग ही मिजाज दिखाई देता है. यहां नेता वोट मांगने पहुंच रहे हैं, लेकिन इस बार सामने सिर्फ सुनने वाली जनता नहीं है. लोगों के पास सवालों की लंबी सूची है. पानी, सीवर, सड़क, जलभराव, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, मकानों के पट्टे, पार्क और सुरक्षा जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पांच साल पहले भी इन्हीं समस्याओं के समाधान के वादे किए गए थे, लेकिन कई समस्याएं आज भी जस की तस हैं. आगरा रोड क्षेत्र के विजयनगर, जयंती नगर, रानी सती नगर और आसपास के इलाके परिसीमन के बाद वार्ड 69 में शामिल हुए हैं. पहले यह क्षेत्र वार्ड 123 का हिस्सा था. वार्ड की सीमाएं बदल गईं, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई समस्याएं अब भी बनी हुई हैं. यही वजह है कि इस बार मतदाता सिर्फ प्रत्याशियों का भाषण सुनना नहीं चाहता, बल्कि यह जानना चाहता है कि जीतने के बाद कौन सी समस्या कब और कैसे हल करेगा. न्यूज18 राजस्थान की ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए वार्ड 69 के लोगों के सवाल और जयपुर नगर निगम चुनाव का मिजाज.
पानी के लिए टैंकर पर निर्भर कई परिवार
वार्ड 69 में पानी की समस्या सबसे प्रमुख मुद्दों में शामिल है. स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले चुनाव के दौरान बीसलपुर से पानी की लाइन लाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन पांच साल गुजरने के बाद भी कई परिवार नियमित जलापूर्ति का इंतजार कर रहे हैं. जरूरत पूरी करने के लिए लोगों को टैंकर मंगवाने पड़ते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार एक टैंकर के लिए करीब 500 से 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं. सीमित आमदनी वाले परिवारों के लिए पानी पर होने वाला यह अतिरिक्त खर्च रोजमर्रा के बजट को प्रभावित करता है. इलाके में कुछ स्थानों पर फ्लोराइड युक्त पानी के इस्तेमाल की मजबूरी की बात भी स्थानीय लोग बताते हैं. ऐसे में पेयजल की समस्या यहां केवल सुविधा से जुड़ी नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुकी है.
गंदे पानी और जलभराव से परेशानी
इलाके में गंदा पानी और जलभराव भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है. मुख्य सड़क और आसपास के हिस्सों में जल निकासी की समस्या के कारण कई जगह गंदगी जमा होने की शिकायत है. बारिश के दौरान हालात और खराब हो जाते हैं. इसी रास्ते से बच्चों का स्कूल आना-जाना होता है. गंदे पानी और जलभराव के बीच से बच्चों को गुजरना पड़ता है. लंबे समय से बनी इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है. गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता है, जिससे आसपास रहने वाले परिवारों को परेशानी होती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि राजधानी के विकसित इलाकों की तस्वीर के बीच उनके क्षेत्र की यह स्थिति बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने लाती है.
सीवर लाइन का इंतजार बरकरार
वार्ड में सीवर व्यवस्था भी स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगों में है. लोगों के मुताबिक इलाके में सीवर लाइन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है. सीवर व्यवस्था नहीं होने से जल निकासी और साफ-सफाई से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ती हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सीवर लाइन को लेकर योजना और प्रोजेक्ट की बातें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन जमीन पर उसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया. चुनाव के दौरान एक बार फिर यह मुद्दा प्रत्याशियों के सामने रखा जा रहा है.
मुख्य मार्ग से आगे गलियों तक विकास का इंतजार
सड़क की स्थिति को लेकर भी लोगों में असंतोष है. स्थानीय लोगों के अनुसार मुख्य मार्ग पर सड़क निर्माण या सुधार का काम हुआ, लेकिन अंदरूनी गलियों में कई जगह स्थिति अभी भी बेहतर होने का इंतजार कर रही है. मोहल्ले के लोगों का कहना है कि किसी इलाके के विकास का असर केवल मुख्य सड़क पर नहीं, बल्कि उन गलियों में भी दिखना चाहिए जहां रोज बड़ी संख्या में लोग रहते हैं और आवागमन करते हैं.
स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सुविधा की जरूरत
इलाके में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे भी लंबे समय से उठते रहे हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक सरकारी स्कूल की जरूरत है. आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक उपचार केंद्र की मांग भी सामने आती रही है. लोगों का कहना है कि आबादी बढ़ने के साथ बुनियादी सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ी है, लेकिन उसके अनुपात में सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं. चुनावी माहौल में ये मुद्दे फिर चर्चा में हैं और प्रत्याशियों से इनके समाधान की उम्मीद की जा रही है.
मकानों के पट्टे की मांग
वार्ड में मकानों के नियमन और पट्टों का मुद्दा भी लोगों की प्राथमिकताओं में शामिल है. स्थानीय लोग अपने मकानों के नियमन के साथ स्थायी पट्टे चाहते हैं. लोगों के मुताबिक इस दिशा में शिविर और समाधान की उम्मीद रहती है, लेकिन अभी तक बड़ी संख्या में लोगों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. चुनाव के समय यह मुद्दा फिर सामने आ गया है.
पार्क के नाम पर चारदीवारी, सुविधाओं का इंतजार
इलाके में खेल मैदान और सार्वजनिक पार्क के लिए तय स्थान को लेकर भी स्थानीय लोगों की शिकायत है. उनके मुताबिक पिछले चुनाव के दौरान इसे खेल मैदान और पार्क के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी. यहां चारदीवारी तो बना दी गई, लेकिन पार्क और खेल मैदान के रूप में इसका समुचित विकास नहीं हुआ. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब इस स्थान का इस्तेमाल साप्ताहिक बाजार और अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. इससे बच्चों और युवाओं के लिए खेल की सुविधा विकसित करने की उम्मीद पूरी नहीं हो पाई है.
आवारा कुत्तों और नशे को लेकर चिंता
वार्ड में आवारा और आक्रामक कुत्तों की समस्या भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित रहते हैं. इसके अलावा स्थानीय लोग क्षेत्र में नशे और आपराधिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जाहिर करते हैं. लोगों का मानना है कि युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए खेल मैदान, बेहतर सुविधाओं और सुरक्षित माहौल की जरूरत है.
इस बार युवाओं ने भी संभाली कमान
वार्ड 69 में इस चुनाव की एक खास बात स्थानीय युवाओं की पहल है. मोहल्लावासियों के मुताबिक चुनाव से पहले लोगों को जागरूक करने और प्रत्याशियों के सामने इलाके की समस्याएं रखने के लिए Gen-Z युवाओं की एक कमेटी बनाने की तैयारी की जा रही है. इस कमेटी के जरिए अलग-अलग राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों के सामने क्षेत्र की समस्याओं को रखा जाएगा. युवाओं की कोशिश है कि चुनाव के दौरान किए जाने वाले वादों को केवल चुनावी भाषण तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि आगे भी उनके आधार पर जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय की जाए. पानी, सीवर, सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पट्टे, पार्क और सुरक्षा जैसे मुद्दों को एक साथ रखकर प्रत्याशियों के सामने क्षेत्र की पूरी तस्वीर रखने की तैयारी है.
पांच साल बाद बदला जनता का अंदाज
वार्ड 69 में चुनावी माहौल को देखें तो इस बार लोगों के बीच नाराजगी के साथ जागरूकता भी नजर आ रही है. पांच साल पहले जिन मुद्दों पर वादे किए गए थे, उनमें से कई मुद्दे अब भी स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. नेता एक बार फिर घर-घर पहुंच रहे हैं. हाथ जोड़कर समर्थन मांग रहे हैं और विकास की बात कर रहे हैं. दूसरी ओर स्थानीय लोग पिछले पांच साल के अनुभव के साथ उनकी बात सुन रहे हैं. इस बार फर्क इतना है कि मोहल्ले के लोगों ने अपनी समस्याओं को अलग-अलग शिकायतों के बजाय एक साझा मुद्दे के रूप में सामने रखने की तैयारी की है.
जयपुर के विकास की दूसरी तस्वीर
जयपुर देश-दुनिया में अपनी ऐतिहासिक विरासत और विकसित शहर की पहचान के लिए जाना जाता है. लेकिन शहर की बाहरी और तेजी से विकसित हो रही बस्तियों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियां अब भी दिखाई देती हैं. वार्ड 69 की तस्वीर भी इसी बदलाव को सामने लाती है. एक तरफ शहर लगातार विस्तार कर रहा है, दूसरी तरफ कई इलाकों में लोग पानी की नियमित आपूर्ति, सीवर, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं. नगर निगम चुनाव में प्रत्याशी बदलेंगे, राजनीतिक समीकरण बदलेंगे और वार्ड की सीमाएं भी बदल चुकी हैं. लेकिन स्थानीय लोगों की जरूरतें काफी हद तक वही हैं.
यही वजह है कि वार्ड 69 का चुनाव सिर्फ प्रत्याशियों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि उन बुनियादी सुविधाओं पर भी जनता के फैसले का मौका है, जिनका इंतजार लोग लंबे समय से कर रहे हैं. इस बार नेताओं के सामने सिर्फ वोट मांगने की चुनौती नहीं है. उन्हें उन लोगों के बीच जाना है, जिन्होंने पांच साल तक इन समस्याओं को झेला है और अब विकास के दावों को अपने इलाके की जमीन पर परखना चाहते हैं. वार्ड 69 की गलियों में चुनावी हलचल के बीच यही बदला हुआ मिजाज साफ दिखाई दे रहा है- नेता फिर दरवाजे पर हैं और जनता इस बार अपने मुद्दों के साथ तैयार है.



