कांग्रेस मुख्यालय के बाहर ही कांग्रेस नेताओं का प्रदर्शन, धरने पर क्यों बैठे, राहुल से क्या मांग?

दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर उस वक्त सियासी हलचल दिखी, जब बिहार से आए कांग्रेस के ही कुछ नेता और कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए. जगह थी इंदिरा भवन के सामने और मुद्दा था बिहार कांग्रेस में संगठन को लेकर नाराजगी. करीब 35 नेता और कार्यकर्ता यहां जुटे. इनमें पूर्व विधायक, पूर्व जिला अध्यक्ष, प्रदेश स्तर के पूर्व पदाधिकारी और दूसरे कार्यकर्ता शामिल हैं. प्रदर्शन कर रहे नेताओं के हाथों में राहुल गांधी फेमस नारे ‘डरो मत’ वाली तख्तियां भी नजर आईं. दिलचस्प बात यह है कि प्रदर्शन किसी विपक्षी दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने ही संगठन के मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ है. इन नेताओं का कहना है कि बिहार कांग्रेस में सुधार की जरूरत है और पार्टी से निकाले गए या निलंबित किए गए कार्यकर्ताओं को न्याय मिलना चाहिए.
प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर कुछ नेताओं को निलंबित किया गया था, जबकि कुछ को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. अब ये नेता अपने निष्कासन और निलंबन के फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय नेतृत्व के दरवाजे पर पहुंचे हैं. उनकी सबसे बड़ी मांग राहुल गांधी से मुलाकात की है. वे राहुल गांधी को बिहार कांग्रेस की जमीनी स्थिति और संगठन से जुड़ी अपनी शिकायतें बताना चाहते हैं. इसके साथ ही बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को पद से हटाने की मांग भी की जा रही है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले कई महीनों से वे अपनी बात राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिल रहा है.
राहुल गांधी से मिलने की मांग
धरने पर बैठे नेताओं की पहली मांग है कि उन्हें राहुल गांधी से मुलाकात का समय दिया जाए. उनका कहना है कि वे बिहार कांग्रेस की स्थिति और संगठन से जुड़ी समस्याओं को सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रखना चाहते हैं. इसके अलावा निलंबन और निष्कासन से जुड़े मामलों की समीक्षा की मांग भी की जा रही है.
चार बड़ी मांगों के साथ धरना
नाराज नेताओं ने राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें राहुल गांधी से मुलाकात, नोटिस और निष्कासन पत्र वापस लेना, बिहार कांग्रेस प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को हटाना तथा संगठन में पदों के बंटवारे और नए लोगों को शामिल करने की प्रक्रिया की जांच शामिल है. नेताओं ने कहा है कि संगठन में पद देते समय सामाजिक न्याय का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.
आनंद माधव बोले- 10 महीने से जवाब का इंतजार
धरना से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AICC सदस्य आनंद माधव ने कहा, ‘3 नवंबर 2025 को हमारी मुलाकात राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से हुई थी. उस बैठक में कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और नासिर हुसैन भी मौजूद थे. हमने बिहार कांग्रेस की अनियमितताओं के बारे में बताया था. तब उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि बिहार चुनाव खत्म होने के बाद हमारे साथ बैठक करेंगे और सभी बातों पर विचार किया जाएगा.’ उन्होंने आगे कहा, ‘अब 10 महीने बीत चुके हैं. हम लोग बार-बार प्रतिवेदन दे रहे हैं, लेकिन कोई समय नहीं मिल पा रहा है. इसलिए हम लोगों ने तय किया था कि 8 सितंबर को कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे.’
‘विरोध कांग्रेस से नहीं, नेतृत्व से’
आनंद माधव ने कहा कि बिहार कांग्रेस में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए गए, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला. उनके मुताबिक इसी वजह से दिल्ली में पार्टी मुख्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना देने का फैसला किया गया. उन्होंने साफ किया कि उनका विरोध कांग्रेस पार्टी से नहीं है. उनका विरोध बिहार में पार्टी का संचालन कर रहे मौजूदा नेतृत्व से है. उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता हैं और पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी बात राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा रहे हैं.
सादाकत आश्रम को लेकर भी सवाल
प्रदर्शनकारी नेताओं ने पटना स्थित कांग्रेस मुख्यालय सादाकत आश्रम को लेकर भी सवाल उठाए. आनंद माधव ने आरोप लगाया कि बिहार में कांग्रेस संगठन लगातार कमजोर हुआ है और समर्पित कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेसी सादाकत आश्रम को अपना मंदिर मानते हैं, लेकिन वहां दूसरे दलों के लोगों और कथित अराजक तत्वों की गतिविधियां बढ़ गई हैं.
दूसरे दलों के लोगों को पद देने का आरोप
नेताओं ने आरोप लगाया कि संगठन के विस्तार के नाम पर दूसरे दलों के लोगों को पद का लालच देकर कांग्रेस में शामिल किया जा रहा है. उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगाने और इसकी जांच कराने की मांग की. अब देखना यह है कि इंदिरा भवन के बाहर बैठे इन नेताओं की आवाज कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व तक कितनी जल्दी पहुंचती है और बिहार कांग्रेस को लेकर उनकी शिकायतों पर पार्टी क्या कदम उठाती है.



