खेत-खलिहान में दिखने वाला ये पौधा है औषधीय, जोड़ों के दर्द से लेकर पाचन तक में आता है काम, जानिए फायदे

Last Updated:September 09, 2026, 13:46 IST
गांवों और ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिनकी औषधीय खूबियों के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. विधारा भी ऐसा ही एक पौधा है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है. इसके बीज, जड़ और अन्य हिस्सों को अलग-अलग नुस्खों में शामिल किया जाता है, लेकिन इसके इस्तेमाल से पहले पौधे की सही पहचान और विशेषज्ञ की सलाह बेहद जरूरी है.
गोंडा: गांवों और ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिन्हें लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. विधारा भी इन्हीं पौधों में शामिल है. पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसके बीज, जड़ और अन्य हिस्सों का अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल करने से पहले उसकी सही पहचान और विशेषज्ञ की सलाह बेहद जरूरी है.
लोकल 18 से बातचीत में वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र ने बताया कि विधारा को कुछ क्षेत्रों में वृद्धदारु जैसे नामों से भी जाना जाता है. लेकिन अलग-अलग इलाकों में पौधों के स्थानीय नाम बदल सकते हैं. ऐसे में केवल नाम के आधार पर किसी पौधे की पहचान करना सही नहीं है. गलत पौधे का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है.
वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र के अनुसार, पारंपरिक चिकित्सा में विधारा का इस्तेमाल जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी समस्याओं से जुड़े नुस्खों में किया जाता रहा है. इसे दर्द और सूजन से राहत देने वाले पारंपरिक उपायों में शामिल किया जाता है. हालांकि, गठिया या लंबे समय से होने वाले जोड़ों के दर्द में इसका इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए.
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विधारा का इस्तेमाल शरीर में सूजन से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए भी पारंपरिक नुस्खों में बताया गया है. इसके कुछ औषधीय गुणों को सूजन और उससे जुड़ी परेशानी में उपयोगी माना जाता है. लेकिन इसकी मात्रा, सेवन का तरीका और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इसका प्रभाव अलग हो सकता है, इसलिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है.
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में विधारा का उपयोग पाचन तंत्र से जुड़ी कुछ परेशानियों के लिए भी किया जाता है. इसे पेट से संबंधित समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. हालांकि, अगर पेट की समस्या लगातार बनी हुई है तो केवल घरेलू या पारंपरिक नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.
वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र के मुताबिक, पारंपरिक चिकित्सा में विधारा का इस्तेमाल बवासीर और मधुमेह से जुड़ी समस्याओं के लिए भी बताया गया है. हालांकि, मधुमेह जैसी गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी में इसे किसी भी स्थिति में डॉक्टर की दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए. ऐसी बीमारी में किसी जड़ी-बूटी का सेवन शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है.
पारंपरिक चिकित्सा में विधारा का इस्तेमाल पुरुषों की शारीरिक कमजोरी और ताकत से जुड़ी समस्याओं के लिए भी बताए गए कुछ नुस्खों में किया जाता है. वैद्य के अनुसार, इसे शारीरिक क्षमता और स्टेमिना से जुड़े पारंपरिक उपायों में शामिल किया जाता रहा है. इसके अलावा कुछ पारंपरिक दावों में इसे पुरुष प्रजनन क्षमता और शुक्राणुओं से भी जोड़ा जाता है. हालांकि, ऐसे दावों को चिकित्सकीय सलाह और वैज्ञानिक प्रमाणों के संदर्भ में ही देखना चाहिए.
विधारा के इस्तेमाल को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी सही पहचान है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसके स्थानीय नाम अलग हो सकते हैं और कई बार एक ही नाम से अलग पौधों को जाना जाता है. इसलिए केवल नाम सुनकर किसी पौधे को विधारा समझकर उसका सेवन करना उचित नहीं है. जड़ी-बूटी का गलत इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है. किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही पहचान के बाद ही करना चाहिए.
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September 09, 2026, 13:46 IST



