चूरू के वार्ड 31 में 2833 वोटर, समस्याएं बेहिसाब, वोट मांगने वालों से जनता पूछेगी- अंडरब्रिज और मीठा पानी कब?

चूरू. स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर चूरू में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. 9 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले वार्डों में चुनावी मुद्दे भी चर्चा में आने लगे हैं. शहर की जमीनी हकीकत जानने के लिए न्यूज़18 की टीम चूरू नगर परिषद के वार्ड संख्या 31 में पहुंची. यहां वार्डवासियों से मौजूदा पार्षद, नगर परिषद के कामकाज और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर बातचीत की गई. लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही, लेकिन ज्यादातर वार्डवासियों ने विकास कार्यों की कमी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर नाराजगी जताई.
वार्डवासियों के मुताबिक चूरू नगर परिषद में पहले कांग्रेस का बोर्ड रहा है, जबकि वार्ड 31 से भाजपा के जगदीश प्रसाद मेघवाल पार्षद रहे हैं. अब चुनावी मैदान में भाजपा से रामेश्वर लाल नायक और कांग्रेस से फूलचंद किरोड़िया प्रमुख दावेदारों के तौर पर सामने हैं. ऐसे में दोनों प्रत्याशियों के सामने वार्ड की समस्याओं का समाधान कराने का भरोसा दिलाना बड़ी चुनौती है. वार्ड 31 शहर के बड़े वार्डों में शामिल है. यहां कुल 2833 मतदाता हैं. इनमें 1444 पुरुष और 1389 महिला मतदाता हैं. बड़ी आबादी वाले इस वार्ड में लोगों का कहना है कि क्षेत्र की जरूरत के मुताबिक सुविधाएं विकसित नहीं हुई हैं. कई जगह सड़कें टूटी हुई हैं. सामुदायिक भवन और स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने की शिकायत भी लोगों ने की है.
पार्क में सीवरेज प्लां के दुर्गंध से होती है परेशानी
ओम कॉलोनी स्थित सार्वजनिक पार्क भी वार्ड का बड़ा मुद्दा बन गया है. लोगों के मुताबिक पार्क में सीवरेज प्लांट बना हुआ है, जिससे आसपास के इलाके में दुर्गंध फैलती है. वार्डवासियों का दावा है कि बदबू से परेशान होकर आसपास रहने वाले कुछ परिवारों को अपना घर तक छोड़ना पड़ा. लोगों की मांग है कि सीवरेज प्लांट से होने वाली परेशानी का स्थायी समाधान किया जाए.
खारा और फ्लोराइड युक्त पानी बना चुनावी मुद्दा
वार्ड में पेयजल की समस्या भी लोगों की प्रमुख चिंता है. वार्डवासियों का कहना है कि उन्हें कई बार खारा और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर होना पड़ता है. आपणी योजना का मीठा पानी भी नियमित रूप से नहीं मिलता. लोगों के अनुसार मीठे पानी की आपूर्ति कभी-कभार ही होती है. ऐसे में नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना चुनाव में बड़ा मुद्दा है.
रेलवे फाटक लंबे समय तक बंद रहने से होती है परेशानी
वार्ड 31 में रेलवे फाटक की समस्या को लोगों ने सबसे गंभीर समस्याओं में शामिल किया. वार्डवासियों का कहना है कि फाटक लंबे समय तक बंद रहता है, जिससे दोनों तरफ आवागमन प्रभावित होता है. सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों और आपात स्थिति में होती है. लोगों का दावा है कि कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और गंभीर परिस्थितियां पैदा हुईं. कुछ मामलों में युवाओं की मौत तक होने की बात भी वार्डवासियों ने कही. लोगों ने बताया कि रेलवे फाटक की समस्या को दूर करने के लिए अंडरब्रिज स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन अभी तक निर्माण शुरू नहीं हुआ है. वार्डवासियों की मांग है कि अंडरब्रिज का काम जल्द शुरू कराया जाए, ताकि रेलवे फाटक पर निर्भरता खत्म हो और आवागमन सुगम हो सके.
वार्ड 31 की ये हैं प्रमुख चुनावी मुद्दे
सफाई व्यवस्था को लेकर भी वार्डवासियों में नाराजगी है. लोगों का कहना है कि ऑटो टिपर नियमित नहीं आने से घरों और गलियों से कचरा समय पर नहीं उठता. नालियों की सफाई नहीं होने से गंदगी की समस्या बनी रहती है. कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं की कमी भी बताई गई. वार्ड 31 के प्रमुख चुनावी मुद्दों में टूटी-फूटी सड़कें, रेलवे फाटक की समस्या, अंडरब्रिज का निर्माण, खारा और फ्लोराइड युक्त पानी, नियमित मीठे पानी की आपूर्ति, सफाई और ऑटो टिपर की व्यवस्था, नालियों की समस्या, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य केंद्र का अभाव, सामुदायिक भवन की और ओम कॉलोनी में सीवरेज प्लांट से दुर्गंध समस्याएं शामिल हैं.
अब चुनावी तस्वीर में सबसे अहम सवाल यही है कि 9 सितंबर को मतदान के दौरान वार्ड 31 के 2833 मतदाता इन स्थानीय समस्याओं को कितना महत्व देते हैं. भाजपा के रामेश्वर लाल नायक और कांग्रेस के फूलचंद किरोड़िया के सामने लोगों का भरोसा जीतने के साथ-साथ इन मुद्दों पर ठोस समाधान का भरोसा दिलाने की चुनौती है. मतदान के नतीजे बताएंगे कि वार्डवासियों ने विकास, मूलभूत सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता दी या चुनावी राजनीति के दूसरे मुद्दों को.



