जज्बे को सलाम, जोधपुर के 93 साल के बिंजाराम कंधे के सहारे और 83 साल की गीची बाई ने खाट पर लेटकर किया वोट

Last Updated:September 11, 2026, 17:58 IST
जोधपुर में शुक्रवार को नगर निगम चुनाव के दौरान ऐसी ही दो तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने लोगों का दिल छू लिया. जोधपुर के ज्योति नगर के रहने वाले 93 साल के बिंजाराम गौड़ शारीरिक कमजोरी के चलते ठीक से चल नहीं पाते. इसके बावजूद वे परिजनों के सहारे मतदान केंद्र पहुंचे. वहीं वार्ड नंबर 39 के बूथ नंबर 262 पर देखने को मिला. यहां 83 साल की गीची बाई प्रजापत लंबे समय से बीमारी के कारण बिस्तर से उठ नहीं पाती हैं. लेकिन वोट डालने की उनकी इच्छा इतनी मजबूत थी.
लोकतंत्र के महापर्व में जब बात अपने अधिकार और फर्ज की आती है, तो उम्र, बीमारी और शारीरिक तकलीफें भी हौसलों के आगे घुटने टेक देती हैं. जोधपुर में शुक्रवार नगर निगम चुनाव के तहत सुबह से ही मतदान शुरू हुआ जहां लोग मतदान करने पहुंचे थे. पोलिंग बूथों पर सुबह से लंबी कतारें देखी जा रही थी, लेकिन इस वोटिंग के दौरान दो ऐसी तस्वीरें सामने आईं जिसने हर किसी को भावुक भी किया.
एक तरफ 93 साल के बिंजाराम गौड़ जो परिजन के सहारे वोट डालने पहुंचे. वहीं दूसरी तरफ 83 साल की गीची बाई जिन्हें उनके परिजन चारपाई पर उठाकर बूथ तक लाए. वहीं कुछ लोग स्वस्थ होकर भी वोट देने नहीं निकलते, उनके लिए ये तस्वीरें उनके लिए सीख थी.
93 की उम्र में भी कायम है जज्बा
ज्योति नगर के रहने वाले 93 साल के बिंजाराम गौड़ का जन्म वर्ष 1933 में हुआ था. उम्र के इस पड़ाव पर शारीरिक शिथिलता के कारण उनका चलना-फिरना बेहद कठिन हो चुका है. लेकिन इसके बावजूद लोकतंत्र के महापर्व को लेकर उनका उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ.
बिंजाराम ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन का पहला वोट साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय डाला था. तब से लेकर आज तक उन्होंने कभी भी मतदान का अवसर नहीं गंवाया. शुक्रवार को भी वे परिजनों के सहारे संभलते हुए पोलिंग बूथ पहुंचे और अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल किया.
कंधों पर चारपाई उठाकर बूथ पहुंचे परिवार वाले
इससे भी ज्यादा भावुक कर देने वाला नजारा वार्ड नंबर 39 के भाग 3 के बूथ नंबर 262 पर देखने को मिला. यहां 83 साल की गीची बाई प्रजापत को जब उनके परिजन चारपाई पर लिटाकर अपने कंधों पर उठाकर लाए. इसे देखकर वहां मौजूद मतदान कर्मी और अन्य वोटर हैरान रह गए.
गीची बाई लंबे समय से गंभीर बीमारी के कारण बिस्तर से उठ नहीं पाईं है. लेकिन मतदान करने की उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे बीमारी भी हार गई. परिजनों ने चारपाई को कंधों पर उठाकर बूथ तक पहुंचाया, जहां खाट पर लेटे-लेटे ही उन्होंने उंगली पर स्याही लगवाकर वोट डाला.
आलस के चलते वोट न करने वाले के लिए संदेश
एक तरफ जहां स्वस्थ और युवा वर्ग कई बार मतदान के दिन छुट्टी मनाने या आलस के कारण घरों से बाहर नहीं निकलता. वहीं बिंजाराम गौड़ और गीची बाई का यह जज्बा उन सभी के लिए एक बड़ा संदेश है. शारीरिक सीमाओं से परे जाकर निभाया गया यह फर्ज यह साबित करता है कि जागरूक नागरिक ही लोकतंत्र की असली ताकत हैं.
About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor
Sajan Kumar is a journalist with professional experience in digital news, web journalism, SEO content, copy editing and social media storytelling. He has been working in journalism since 2020 and has worked wit…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
September 11, 2026, 17:53 IST



