पशुओं के आराध्य देव कारिस बाबा का मेला, राजस्थान समेत यूपी, एमपी से उमड़ते हैं श्रद्धालु, जाने इनकी मान्यता

Last Updated:September 08, 2026, 11:19 IST
The Fair of Karis Baba: भरतपुर जिले की वैर तहसील के जहाज गांव में लोक देवता और पशुपालकों के आराध्य करिस बाबा का प्रसिद्ध मेला श्रद्धा और उत्साह के साथ चल रहा है. राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी हजारों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं. पशुओं की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना लेकर भक्त बाबा को घी, अनाज, मिठाई सहित अन्य सामग्री अर्पित कर रहे हैं। मेले में लोकगीत, भजन, नृत्य और ग्रामीण बाजार इसकी रौनक बढ़ा रहे हैं.
भरतपुर. जिले की वैर तहसील के जहाज गांव में लोक देवता और पशुपालकों के आराध्य करिस बाबा का प्रसिद्ध मेला बड़े हर्षोल्लास के साथ चल रहा है. यह मेला वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है और इसमें हजारों श्रद्धालु राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी पहुंचते हैं. करिस बाबा को विशेष रूप से पशुओं का रक्षक देवता माना जाता है, इसलिए पशुपालक समुदाय में उनके प्रति अपार श्रद्धा और आस्था है. मान्यता के अनुसार करिस बाबा अपने भक्तों के पशुओं की रक्षा करते हैं और उनसे जुड़ी सभी परेशानियों को दूर करते हैं. यही कारण है कि मेला स्थल पर दूर-दूर से पशुपालक अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुंचते है.
वे पूजा-अर्चना कर बाबा से अपने पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं. यहां यह परंपरा भी है कि पशुपालक अपने साथ घी, अनाज, मिठाई और अन्य सामग्री लाकर करिस बाबा को अर्पित करते हैं. यह अर्पण केवल भक्ति का प्रतीक नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक लोक परंपरा है जिसे लोग बड़े उत्साह से निभाते हैं. मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि सामाजिक एकता और लोक संस्कृति का भी अद्भुत उदाहरण है. यहां विभिन्न जाति और वर्ग के लोग बिना किसी भेदभाव के एकत्रित होते हैं और आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं.
हर मन्नत होती है पूरी
मेला स्थल पर लोक कलाकार पारंपरिक गीत भजन और नृत्य प्रस्तुत करते हैं, जिससे वातावरण और भी भक्तिमय और जीवंत हो जाता है. इसके साथ ही मेले में अस्थायी बाजार भी सजते हैं. जहां से लोग खाने-पीने की वस्तुएं, ग्रामीण हस्तशिल्प, खिलौने और रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदते हैं. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इस मेले में अपनी-अपनी तरह से आनंद लेते हैं. कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से करिस बाबा के दरबार में अपनी मनोकामना रखते हैं, उनकी इच्छा जरूर पूरी होती है. इसी विश्वास के कारण हर बार मेले में आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. जहाज गांव में लगने वाला यह मेला न केवल करिस बाबा के प्रति लोगों की अटूट आस्था को दर्शाता है. बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को भी सजीव रखता है. करिस बाबा का यह मेला श्रद्धा, भक्ति और लोक संस्कृति का संगम है. जहां आस्था के साथ-साथ मेलजोल और भाईचारे की भी नई मिसाल कायम होती है. यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़े रखने का कार्य करता है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Bharatpur,Rajasthan
First Published :
September 08, 2026, 11:19 IST



