बारिश नहीं हुई तो फसल पर मंडराया संकट, किसान तुरंत करें ये काम

Last Updated:September 13, 2026, 21:35 IST
मानसून का सीजन भले ही अंतिम सांसें ले रहा हो, लेकिन जिले के कई इलाकों में किसानों की आंखें अब भी बादलों पर ही टिकी हैं. शुरुआत में हुई अच्छी बारिश के भरोसे किसानों ने फसलों की बुवाई तो बड़े चाव से कर दी थी. लेकिन अब बारिश की बेरुखी ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं. मौजूदा नाजुक हालात को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बची-कुची नमी बचाकर रखने की सलाह दी है. इसके अलावा खेतों में उगी खरपतवार को लेकर भी विशेष सलाह दी है.
भीलवाड़ा. मानसून का मौसम लगभग खत्म होने को है लेकिन भीलवाड़ा के कई इलाकों में अब भी पर्याप्त बारिश का इंतजार है. शुरुआती बारिश के भरोसे किसानों ने मूंग, ग्वार, तिल, बाजरा, मोठ और कुलथ जैसी खरीफ फसलों की बुवाई की थी. शुरुआत में फसलों की अच्छे से बढ़ी हैं. लेकिन लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी लगातार कम हो रही है. तेज धूप और उमस के बीच फसलों पर पानी की कमी का असर साफ दिखाई देने लगा है.
बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर उन फसलों पर पड़ रहा है जिनमें इस समय दाना बनने और फली विकसित होने का दौर चल रहा है. खेतों में नमी कम होने से पौधों की ग्रोथ रुकने लगी है. मूंग और ग्वार की पत्तियां पीली पड़ रही हैं जबकि कई जगह पौधे मुरझाने लगे हैं. अगर समय पर बारिश नहीं हुई तो फसल की पैदावार में बड़ी गिरावट आ सकती है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
ऐसे हालात में किसान खेत में उपलब्ध नमी को बचाने पर ध्यान दें. वहां सिंचाई की सुविधा है वहां फसल की जरूरत के हिसाब से हल्की सिंचाई की जा सकती है. बार-बार और ज्यादा पानी देने के बजाय कम पानी में फसल को बचाने की कोशिश करनी चाहिए. खेत में खरपतवार होने पर उसे नियंत्रित करना भी जरूरी है, क्योंकि खरपतवार मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों को तेजी से खींचते हैं. किसानों को फसल के हालात देखकर कृषि विशेषज्ञों से सलाह भी लेनी चाहिए.
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बारिश नहीं होने से केवल पौधों की बढ़वार ही प्रभावित नहीं होती बल्कि फूल और फलियां बनने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ता है. मिट्टी में नमी की कमी के कारण पौधों की जड़ें पर्याप्त पानी नहीं ले पातीं हैं. इससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधे कमजोर हो जाते हैं. लंबे समय तक ऐसे ही हालात रहने पर पौधे सूख सकते हैं. कमजोर फसल में कीट और रोग का खतरा भी बढ़ सकता है.
कम बारिश से परेशान किसान अब विशेष गिरदावरी, फसल नुकसान का सर्वे और प्रभावित क्षेत्रों को अकाल-सूखाग्रस्त घोषित कर राहत देने की मांग कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि समय रहते प्रशासन को खेतों में फसल की स्थिति का सर्वे कर नुकसान का आकलन करना चाहिए. वहीं, किसानों के लिए जरूरी है कि वे फसल को बचाने के लिए उपलब्ध पानी का सही प्रबंधन करें. नुकसान बढ़ने से पहले कृषि विभाग की सलाह लें.
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September 13, 2026, 21:35 IST



