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बारिश में मुर्गी पालन कर रहे हैं? जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, ऐसे बचाएं मुर्गियों को

Last Updated:September 08, 2026, 19:13 IST

गोंडा: बरसात का मौसम मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. नमी, सीलन और गंदगी के कारण इस दौरान मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस, रानीखेत, सीआरडी और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. विशेषज्ञ ने बताया कि कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर किसान मुर्गियों को स्वस्थ रखने के साथ संभावित नुकसान को भी कम कर सकते हैं.

गोंडा: बरसात का मौसम मुर्गी पालन करने वाले किसानों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है. इस दौरान हवा में नमी बढ़ने के साथ पोल्ट्री फार्म में गंदगी और सीलन की समस्या भी बढ़ जाती है. ऐसे माहौल में मुर्गियों में कई तरह की बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं. समय पर देखभाल नहीं की गई तो इसका सीधा असर मुर्गियों के स्वास्थ्य और उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.

लोकल-18 से बातचीत में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि बरसात के मौसम में मुर्गियों की साफ-सफाई, सूखा बिछावन, साफ पानी और समय पर टीकाकरण का विशेष ध्यान रखना चाहिए. उनके मुताबिक, इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी पूरे पोल्ट्री फार्म को प्रभावित कर सकती है.

डॉ. राकेश कुमार तिवारी के अनुसार, बारिश के मौसम में कॉक्सीडियोसिस, रानीखेत, सीआरडी यानी सांस से जुड़ी बीमारी, ई-कोलाई और डायरिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. कॉक्सीडियोसिस की स्थिति में मुर्गियों की बीट में खून दिखाई दे सकता है. वहीं रानीखेत में सांस लेने में परेशानी और हरी, पतली बीट जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. गंदा या दूषित पानी पीने से डायरिया की समस्या भी बढ़ सकती है. इसलिए पोल्ट्री फार्म में पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.

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विशेषज्ञ के मुताबिक, मुर्गियों के नीचे बिछाया जाने वाला बुरादा या पुआल बरसात में गीला नहीं होना चाहिए. यदि इसमें नमी आ जाए तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए. गीला बिछावन फार्म में नमी और गंदगी बढ़ा सकता है. शेड में हवा के आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था भी रखें, ताकि उमस कम रहे और अंदर गैस जमा न हो. इससे मुर्गियों के लिए वातावरण बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है.

बरसात में पानी और दाना जल्दी खराब हो सकते हैं. मुर्गियों को हमेशा साफ और ताजा पानी देने की सलाह दी जाती है. पानी रखने वाले बर्तनों की नियमित रूप से सफाई करनी चाहिए. दाने की बोरियों को सीधे जमीन पर रखने से भी बचें. जमीन की नमी के कारण दाने में सीलन और फंगस लगने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए दाने को सूखी और साफ जगह पर रखना जरूरी है.

अगर किसी मुर्गी में सुस्ती दिखाई दे, वह पंख लटकाकर बैठी रहे या उसकी बीट पतली हो जाए, तो उसे बाकी मुर्गियों से अलग कर देना चाहिए. इससे संभावित संक्रमण को दूसरी मुर्गियों तक फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है.

डॉ. राकेश कुमार तिवारी का कहना है कि बरसात में बीमारी होने का इंतजार करने के बजाय पहले से बचाव पर ध्यान देना जरूरी है. किसानों को निर्धारित समय पर टीकाकरण कराना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण के दिखाई देने पर जल्द से जल्द नजदीकी पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए. साफ-सफाई, सूखा बिछावन, स्वच्छ पानी, उचित वेंटिलेशन और समय पर टीकाकरण जैसे उपायों से बरसात के मौसम में पोल्ट्री फार्म का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है और संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है.

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September 08, 2026, 19:13 IST

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