मजदूरी करते हुए बॉलीवुड में ढूंढा काम, 1 मुलाकात ने पलट दी किस्मत, राज कपूर की फिल्म ‘बरसात’ ने बनाया स्टार

Last Updated:September 11, 2026, 21:08 IST
हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो पूरे दौर की आवाज बन जाते हैं. जयकिशन ऐसा ही नाम हैं. उन्होंने 12 सितंबर 1971 को महज 41 साल की उम्र में दुनिया छोड़ दी थी. वे आज भी अपने संगीत के जरिए लोगों के बीच मौजूद हैं. उन्होंने दोस्त शंकर के साथ मिलकर कई सुपरहिट गाने बनाए और ‘शंकर-जयकिशन’ नाम से लोकप्रिय रहे. उन्होंने ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ और ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ जैसे अमर गीत कंपोज किए थे.
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जयकिशन ने शंकर के साथ मिलकर कई यादगार गाने बनाए थे. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: जब ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’, ‘मेरा जूता है जापानी’, ‘आवारा हूं’, ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’ जैसे गाने बजते हैं, तो उनका एक सुनहरा दौर फिर से याद आने लगता है. जयकिशन ने अपने साथी शंकर के साथ मिलकर ऐसा संगीत रचा, जो पीढ़ियां बदलने के बावजूद पुराना नहीं हुआ. जयकिशन दयाभाई पंचाल का जन्म 4 नवंबर 1929 को गुजरात के बांसदा में हुआ था. संगीत से उनका लगाव बचपन से था और उन्होंने संगीत की बाकायदा ट्रेनिंग ली. हारमोनियम पर उनकी अच्छी पकड़ थी. संगीत के प्रति जुनून उन्हें मुंबई खींच लाया, लेकिन फिल्मी दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं था. संघर्ष के दिनों में उन्होंने एक फैक्ट्री में भी काम किया और साथ-साथ फिल्मों में संगीत का मौका तलाशते रहे.
जयकिशन की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनकी मुलाकात शंकर से हुई. गुजराती निर्देशक चंद्रवदन भट्ट के ऑफिस के बाहर हुई यह मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई. शंकर ने जयकिशन के हुनर को पहचाना और उन्हें पृथ्वी थिएटर में हारमोनियम बजाने का मौका दिलाया. यहां दोनों ने साथ काम किया. पृथ्वी थिएटर के दौरान ही राज कपूर की नजर इस टैलेंटेड जोड़ी पर पड़ी. पहले दोनों ने फिल्म ‘आग’ में संगीतकार राम गांगुली के सहायक के रूप में काम किया और फिर 1949 में आई ‘बरसात’ ने शंकर-जयकिशन की किस्मत बदल दी.
‘बरसात’ ने बना दिया स्टार ‘बरसात’ के संगीत की सफलता के बाद शंकर-जयकिशन हिंदी फिल्मों के सबसे बड़े नामों में शामिल होने लगे. इसके बाद ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘चोरी चोरी’, ‘अनाड़ी’, ‘बसंत बहार’, ‘जंगली’, ‘संगम’, ‘सूरज’, ‘ब्रह्मचारी’, ‘मेरा नाम जोकर’ और ‘अंदाज’ जैसी फिल्मों में उनकी धुनों ने दर्शकों का दिल जीत लिया. राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने तो हिंदी सिनेमा को कई ऐसे गाने दिए, जो आज भी भारतीय संगीत की पहचान माने जाते हैं. ‘मेरा जूता है जापानी’ गाने को दुनिया के कई हिस्सों में पसंद किया गया. वहीं, बारिश में फिल्माया गया ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ आज भी हिंदी फिल्मों के सबसे मशहूर रोमांटिक गानों में गिना जाता है. ‘आवारा हूं’ और ‘जीना यहां मरना यहां’ जैसे गानों ने भी अलग-अलग पीढ़ियों के दिलों में जगह बनाई.
‘शंकर-जयकिशन’ की दोस्ती बनी ताकतशंकर-जयकिशन की जोड़ी की खासियत यह थी कि दोनों कई बार अलग-अलग धुन तैयार करते थे, लेकिन वे पब्लिक में नहीं बताते थे कि कौन-सी धुन किसने बनाई है. यही वजह है कि उनके संगीत की असली ताकत हमेशा ‘शंकर-जयकिशन’ के नाम से पहचानी गई. शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के लिए नौ फिल्मफेयर पुरस्कार जीते. यह जोड़ी उस दौर में इतनी लोकप्रिय थी कि बड़े बैनर और बड़े सितारे उनके संगीत के साथ जुड़ना चाहते थे. ‘चोरी चोरी’, ‘अनाड़ी’, ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, ‘प्रोफेसर’, ‘सूरज’, ‘ब्रह्मचारी’, ‘पहचान’ और ‘मेरा नाम जोकर’ जैसी फिल्मों के संगीत ने उनकी लोकप्रियता को बढ़ाया. 12 सितंबर 1971 को जयकिशन का निधन लिवर सिरोसिस के कारण हो गया. उनके जाने के बाद शंकर ने संगीत देना जारी रखा और कई फिल्मों में संगीतकार का नाम शंकर-जयकिशन ही रखा गया.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
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First Published :
September 11, 2026, 21:08 IST



