मासूम की मौत ने झकझोरा, सिस्टम खामोश रहा तो हेमंत ने पेश की इंसानियत की मिसाल, ताकि दूसरा घर न उजड़े

Last Updated:October 09, 2026, 12:05 IST
Sikar Youth Unique Initiative: सीकर जिले के अजीतगढ़ क्षेत्र के सांवलपुरा तंवरान गांव में एक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया. सड़क पर बना ब्रेकर अंधेरे में दिखाई नहीं देने के कारण कार की टक्कर से चार साल के मासूम की मौत हो गई, जबकि उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई. हादसे के बाद गांव के युवक हेमंत कटारिया ने ब्रेकर को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई. उन्होंने हादसे से जुड़ी खबर की कटिंग के साथ जिम्मेदारों तक अपनी बात पहुंचाई और सोशल मीडिया के जरिए भी ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया. लेकिन 15 दिन तक कार्रवाई का इंतजार करने के बाद उन्होंने खुद ही पहल करने का फैसला किया. हेमंत बाजार से सफेद रंग और रोलर लेकर आए और साथियों की मदद से ब्रेकर के आसपास सफाई कर उस पर सफेद पट्टी बना दी. इससे रात के अंधेरे में ब्रेकर को पहचानना पहले से आसान हो सकता है. हेमंत की यह पहल बताती है कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए हमेशा सरकारी आदेश का इंतजार जरूरी नहीं होता. हालांकि, स्थायी सुरक्षा के लिए ब्रेकर पर मानक संकेतक, रिफ्लेक्टर और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना भी जरूरी है.
सीकर. कहते हैं कि बुराई बहाने ढूंढती है और अच्छाई किसी का इंतजार नहीं करती. सीकर जिले के अजीतगढ़ में एक युवक ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. सांवलपुरा तंवरान गांव में अंधेरे में ब्रेकर दिखाई नहीं देने से हुए सड़क हादसे में चार साल के मासूम की जान चली गई थी और उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई थी. हादसे के बाद युवक हेमंत कटारिया ने प्रशासन से ब्रेकर को सुरक्षित बनाने की मांग की, लेकिन 15 दिन इंतजार के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने खुद ही जिम्मेदारी उठा ली.
बाजार से सफेद रंग और रोलर लाकर अपने साथियों के साथ ब्रेकर पर सफेद पट्टी बना दी, ताकि रात के अंधेरे में भी वाहन चालकों को यह दूर से दिखाई दे सके. सांवलपुरा तंवरान निवासी संगीता कटारिया देर शाम अपने चार वर्षीय बेटे के साथ बस से उतरी थी. इसके बाद दोनों अविनाशी गेट के पास से पैदल घर की ओर जा रहे थे. इसी दौरान नीमकाथाना की तरफ से आई एक कार ने मां-बेटे को टक्कर मार दी. हादसे में मासूम की मौत हो गई, जबकि उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं. बताया गया कि सड़क पर बना ब्रेकर अंधेरे में स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था. ऐसे में हादसे ने गांव में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए.
प्रशासन से ब्रेकर को दुरुस्त कराने की मांग उठाई
घटना के बाद हेमंत कटारिया ने इसे सिर्फ एक घटना मानकर छोड़ने के बजाय समस्या का समाधान करने की ठानी. उन्होंने हादसे से जुड़ी खबर की कटिंग के साथ प्रशासन से ब्रेकर को दुरुस्त कराने की मांग उठाई. सोशल मीडिया के जरिए भी जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर खींचने का प्रयास किया, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने इंतजार करने के बजाय खुद आगे बढ़ने का फैसला किया.
फावड़ा उठाया, सफाई की और बनाई सफेद पट्टी
हेमंत बाजार से सफेद रंग और रोलर लेकर आए. उन्होंने पहले ब्रेकर के आसपास की गंदगी साफ की और फिर साथियों के सहयोग से उस पर सफेद रंग की पट्टी बना दी. इस पहल से ब्रेकर की पहचान पहले के मुकाबले आसान हो गई है. अब रात के समय वाहन चालकों को भी सड़क पर बने उभार का अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है, जिससे वे समय रहते रफ्तार कम कर सकेंगे.
छोटे से प्रयास से बड़ा संदेश देने का किया काम
हेमंत और उनके साथियों की इस पहल की गांव में सराहना हो रही है. युवकों ने बिना किसी सरकारी बजट या इंतजार के सड़क सुरक्षा की दिशा में कदम उठाया. हालांकि, ब्रेकर पर मानक के अनुरूप संकेतक, रिफ्लेक्टर और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है. सफेद पट्टी एक जरूरी शुरुआती प्रयास है, लेकिन स्थायी सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी है. यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाने के साथ समाज को भी संदेश देती है कि बदलाव की शुरुआत के लिए हमेशा किसी आदेश का इंतजार जरूरी नहीं. समय रहते उठाया गया एक छोटा कदम भी किसी दूसरे परिवार को ऐसे दर्द से बचाने में मददगार बन सकता है. हेमंत की पहल इसी जिम्मेदारी और इंसानियत की मिसाल बन गई है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Sikar,Rajasthan
First Published :
October 09, 2026, 12:05 IST



