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मुमताज संग आते झटक लिया नेशनल अवॉर्ड, 1975 में निभाया ऐसा रोल, 51 साल बाद भी नहीं भूले लोग

Last Updated:November 06, 2026, 04:01 IST

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में ऐसी जगह बनाई, जिसे आज तक भुलाया नहीं जा सका है. इन्हीं कलाकारों में एक नाम संजीव कुमार का भी है. उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाए. कभी अपनी कॉमेडी से लोगों को खूब हंसाया तो कभी गंभीर भूमिकाओं से हर किसी को भावुक कर दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म ‘शोले’ में जिस ठाकुर बलदेव सिंह के किरदार से संजीव कुमार को आज भी याद किया जाता है, वह असल में इस फिल्म में गब्बर सिंह बनना चाहते थे.

नई दिल्ली. संजीव कुमार को गब्बर का किरदार इतना पसंद आया था कि इसे पाने के लिए उन्होंने अपनी शक्ल-सूरत तक बदल डाली थी. फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी के सामने वह बिल्कुल गब्बर के अंदाज में पहुंच गए थे. उन्होंने अपने बाल बिखेर लिए थे और दांतों को काला कर लिया था. इतना ही नहीं, वह इस किरदार के लिए अपने बाल मुंडवाने तक को तैयार थे. इसके बावजूद उन्हें गब्बर का रोल नहीं मिल पाया और आखिर में यह किरदार अमजद खान की झोली में गया.

संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में हुआ था. उनका असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था. बचपन में ही उनका परिवार मुंबई आ गया था. उन्हें छोटी उम्र से ही फिल्मों और अभिनय का शौक था. इसी लगाव ने उन्हें थिएटर की दुनिया तक पहुंचाया. उन्होंने इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (आईपीटीए) से जुड़कर अभिनय की बारीकियां सीखीं. इसके बाद इंडियन नेशनल थिएटर में भी काम किया. थिएटर के दौरान ही उनके अभिनय की तारीफ होने लगी थी.

संजीव कुमार ने महज 22 साल की उम्र में नाटक ‘ऑल माई सन्स’ में एक बुजुर्ग व्यक्ति की भूमिका निभाकर सबको चौंका दिया था. फिल्मों में उन्होंने साल 1960 में ‘हम हिंदुस्तानी’ से कदम रखा. इस फिल्म में उनका छोटा सा रोल था. इसके बाद 1964 में आई फिल्म ‘निशान’ में उन्हें बतौर हीरो काम करने का मौका मिला. धीरे-धीरे वह अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे.

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संजीव कुमार ने अपने करियर में हर तरह के किरदार निभाए. साल 1970 में आई फिल्म ‘खिलौना’ में उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया. इसके बाद फिल्म ‘दस्तक’ में उन्होंने एक ऐसे पति की भूमिका निभाई, जो अपनी पत्नी के साथ नए घर में रहने आता है. इस फिल्म में उनकी अदाकारी के लिए उन्हें पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला.इसके बाद 1972 में आई फिल्म ‘कोशिश’ में उन्होंने हरिचरण नाम के एक मूक-बधिर व्यक्ति का किरदार निभाया. इस भूमिका में उन्हें बिना बोले ही अपने चेहरे और इशारों से सारी भावनाएं दिखानी थीं. संजीव कुमार ने इस मुश्किल चुनौती को इतनी खूबसूरती से निभाया कि उन्हें इसके लिए दूसरा नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला.

साल 1975 में जब ‘शोले’ बनाने की तैयारी चल रही थी, तब संजीव कुमार की नजर गब्बर सिंह के किरदार पर थी. फिल्म का निर्देशन रमेश सिप्पी कर रहे थे और इसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी. संजीव कुमार चाहते थे कि उन्हें फिल्म में ठाकुर नहीं, बल्कि गब्बर का रोल मिले. रमेश सिप्पी के मुताबिक, संजीव कुमार ने गब्बर बनने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी. उन्होंने अपने बाल बिखेर लिए, दांतों पर रंग लगा लिया और चेहरे पर खतरनाक हाव-भाव लाकर दिखाए. वह निर्देशक को यह समझाना चाहते थे कि इस भूमिका के लिए उनसे बेहतर कोई नहीं हो सकता. यहां तक कि उन्होंने गब्बर के लुक के लिए अपने बाल मुंडवाने की बात भी कह दी थी.

लेकिन फिल्म की टीम की सोच कुछ और थी. मेकर्स को लगता था कि संजीव कुमार को दर्शक पहले ही कई ऐसी भूमिकाओं में देख चुके हैं, जिनसे उनके मन में कलाकार के लिए सहानुभूति पैदा होती है. गब्बर का किरदार ऐसा होना चाहिए था, जिसे देखकर दर्शकों के मन में डर पैदा हो. इसलिए आखिरकार अमजद खान को गब्बर सिंह के रोल के लिए चुना गया और संजीव कुमार को ठाकुर बलदेव सिंह की भूमिका मिली.

भले ही संजीव कुमार को गब्बर बनने का मौका नहीं मिला, लेकिन ठाकुर के किरदार में उन्होंने ऐसी जान डाल दी कि वह हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में शामिल हो गया. आज भी जब ‘शोले’ का जिक्र होता है, तो ठाकुर बलदेव सिंह का चेहरा सबसे पहले याद आता है.’शोले’ के अलावा संजीव कुमार ने ‘आंधी’, ‘मौसम’, ‘अनामिका’, ‘अंगूर’, ‘नमकीन’, ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘त्रिशूल’, ‘पति पत्नी और वो’ और ‘आपकी कसम’ जैसी फिल्मों में भी शानदार काम किया. फिल्म ‘अंगूर’ में उनके डबल रोल को दर्शकों ने खूब पसंद किया था.

अपने बेहतरीन अभिनय के लिए संजीव कुमार को दो नेशनल फिल्म अवॉर्ड सहित कई बड़े सम्मान मिले. उन्होंने पर्दे पर हर तरह के किरदार को इतनी सहजता से निभाया कि उनकी जगह आज भी कोई नहीं ले पाया है. 6 नवंबर 1985 को महज 47 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. उनके जाने के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं. भले ही वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपने यादगार किरदारों के जरिए वह हमेशा दर्शकों के दिलों में जिंदा रहेंगे.

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November 06, 2026, 04:01 IST

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