मुस्लिम देश से पीएम मोदी भारत के लिए क्या खजाना लाए, जो चीन-पाकिस्तान के होश उड़ा देगा

सेंट्रल एशिया में उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देश भारत की डिप्लोमेसी के लिए बहुत अहम हैं. क्योंकि यहां चीन हो, अमेरिका हो, सब अपना प्रभाव बनाने में लगे हैं. ऊपर से हमारा दुश्मन पाकिस्तान हमेशा मौके की ताक में रहता है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उज़्बेकिस्तान दौरे ने भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार देने का रोडमैप तैयार किया है. ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की, जिसमें व्यापार और निवेश से लेकर रक्षा सहयोग तक, डिजिटल कनेक्टिविटी से लेकर ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क तक… दोनों देशों ने सहयोग के कई नए क्षेत्रों पर मंथन किया. खास बात ये रही कि दोनों नेताओं ने विकसित भारत 2047 और उज़्बेकिस्तान-2030 के साझा विकास लक्ष्यों को लेकर भी अपने विजन साझा किए.
मध्य एशिया में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत के लिए उज्बेकिस्तान का महत्व लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का ये दौरा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेंट्रल एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है. इस दौरे में इतिहास और विरासत की झलक भी दिखाई दी. प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज के महात्मा गांधी सेंटर का दौरा किया. प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे से दोनों देशों के रिश्तों की नई दिशा भी तय हुई.
ताशकंद में पीएम मोदी ने दर्ज किया नया इतिहास
ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी ने नया इतिहास दर्ज कर दिया. प्रधानमंत्री मोदी पहले भारतीय नेता हैं, जिन्हें ताशकंद ने अपने सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओली दरजाली दस्तलिक’ दिया गया है. राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के हाथों मिला ये सम्मान महज मेडल नहीं, मध्य एशिया के दिल में भारत की जगह का एलान है. जब कोई देश अपने सबसे बड़े नागरिक सम्मान से किसी विदेशी नेता को नवाजता है, तो वो रिश्ते की गहराई बताता है. सवाल ये है कि आखिर उज्बेकिस्तान ने ये सर्वोच्च सम्मान पीएम मोदी को क्यों दिया, और दुनिया के किन-किन देशों ने भारत के प्रधानमंत्री को ऐसा सम्मान दिया है?
उज्बेकिस्तान ये सम्मान उन विदेशी नेताओं को देता है, जो उज्बेकिस्तान के साथ साझेदारी, आपसी सम्मान और विश्वास बढ़ाने में बड़ा योगदान देते हैं. ताशकंद ने इसे भारत-उज्बेकिस्तान मित्रता और रणनीतिक साझेदारी के उभार का प्रतीक बताया. पीएम मोदी की ये चौथी उज्बेकिस्तान यात्रा है और अब भारत के साथ रिश्ते व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच गए हैं… दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ा है.
30 से ज्यादा देशों से मिला सम्मान
2016 से अब तक प्रधानमंत्री मोदी को 30 से ज्यादा देशों से राजकीय सम्मान मिल चुका है. आज उस सूची में उज्बेकिस्तान जुड़ गया- ओलिय दराजली दुस्तलिक, यानी सबसे उच्च स्तर की मित्रता का सर्वोच्च सम्मान. अकेले साल 2026 में ही पीएम मोदी को 8 देशों ने सम्मानित किया. इथियोपिया से ग्रेट ऑनर निशान, ओमान से ऑर्डर ऑफ ओमान, इज़रायल से मेडल ऑफ द नेसेट, स्वीडन से ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, नॉर्वे से रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट, स्लोवाकिया से ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस, सेशेल्स से गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन और इंडोनेशिया से स्टार ऑफ द रिपब्लिक सम्मान मिल चुका है.
ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान में सर्वोच्च सम्मान मिला. ये इस दौरे की सबसे बड़ी तस्वीर है. सुबह योग, फिर औपचारिक स्वागत, राष्ट्रपति महल में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता और फिर देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान. एजेंडे पर व्यापार, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और यूरेनियम… शनिवार रात का भव्य स्वागत रविवार को सम्मान और आधिकारिक बातचीत में बदल गया. अगला बड़ा पड़ाव बिश्केक का SCO समिट है, जहां पुतिन से मुलाकात होनी है. सवाल है कि ये जब मध्य एशिया में भारत को सर्वोच्च सम्मान मिल रहा है तो ये दौरा सिर्फ मुलाकात है या ऊर्जा, खनिज और रणनीतिक जगह की ठोस कमाई?
पाकिस्तान रास्ता नहीं देता, चीन मध्य एशिया में पैसा लगा रहा है फिर भी भारत ताशकंद से ऊर्जा, खनिज और सुरक्षा का नया रास्ता कैसे खोल रहा है?
क्या यह दौरा सिर्फ मुलाकात है या भारत मध्य एशिया से यूरेनियम, क्रिटिकल मिनरल्स और व्यापार का ठोस सौदा लेकर निकल रहा है?
जब चीन BRI से दस्तक दे रहा है तब भारत उज्बेकिस्तान को साझेदार बनाकर मध्य एशिया में अपनी जगह कैसे मजबूत कर रहा है?
जमीन से कट होने के बावजूद चाबहार के जरिए भारत मध्य एशिया तक कैसे पहुंच बना रहा है? ये दौरा उसी रास्ते का हिस्सा है?
अफगानिस्तान से लगती सीमा, आतंक और ड्रग्स, क्या ताशकंद भारत की सुरक्षा दीवार का नया पड़ाव बन रहा है?
ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी ने सिर्फ दोस्ती की तस्वीर नहीं बनाई, बल्कि भारत की ऊर्जा और रणनीतिक जरूरतों के लिए एक बड़ा रास्ता भी खोल दिया. राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि दोनों देश अपने रिश्तों को अब सिर्फ रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी के अगले स्तर पर ले जाएंगे. सबसे बड़ा ऐलान यूरेनियम को लेकर किया. ऐसे उज्बेकिस्तान पहले से भारत को यूरेनियम की सप्लाई कर रहा है. पीएम मोदी के दौरे में यूरेनियम की लंबी अवधि की सप्लाई के लिए व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी. यानी भारत की न्यूक्लियर एनर्जी जरूरतों के लिए एक और भरोसेमंद सप्लायर जुड़ रहा है और ये इसलिए अहम है क्योंकि भारत 2047 तक अपनी न्यूक्लियर पावर क्षमता को बड़े स्तर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.
लेकिन बात सिर्फ यूरेनियम तक सीमित नहीं है. दोनों देशों ने व्यापार और निवेश बढ़ाने, डिफेंस कोऑपरेशन मजबूत करने, डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने और एनर्जी सेक्टर में सहयोग को आगे ले जाने पर भी सहमति जताई है. यानी ताशकंद में भारत ने एक साथ तीन मोर्चों पर दांव लगाया है, ऊर्जा सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और सेंट्रल एशिया में रणनीतिक पहुंच. अब देखिए ताशकंद में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच क्या-क्या बड़ा हुआ.
लॉन्ग-टर्म यूरेनियम सप्लाई- उज्बेकिस्तान से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की आपूर्ति के लिए व्यवस्था
व्यापक रणनीतिक साझेदारी-भारत–उज्बेकिस्तान रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के अगले स्तर पर ले जाने का फैसला
व्यापार और निवेश- दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर
रक्षा सहयोग- रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति
डिजिटल कनेक्टिविटी- डिजिटल क्षेत्र और कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ाने का फैसला
ऊर्जा सहयोग- ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
महत्वपूर्ण खनिज- रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाओं पर सहयोग बढ़ाने पर फोकस
सिस्टर सिटी या राज्य- दोनों देशों के शहरों और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में समझौते
ताशकंद में कूटनीति के साथ-साथ भारत की संस्कृति और विरासत की भी पूरी झलक दिखी. प्रधानमंत्री मोदी ने दिन की शुरुआत योग कार्यक्रम से की उज्बेकिस्तान की योगा फेडरेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने हिस्सा लिया और वहां मौजूद लोगों को योग करना भी सिखाया. शाम को प्रधानमंत्री मोदी शास्त्री मेमोरियल पहुंचे, जहां उन्होंने ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक पर जाकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि दी. इसके बाद वो ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में बने महात्मा गांधी केंद्र पहुंचे. पीएम मोदी का ये दौरा भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है.
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यांगी उज़्बेकिस्तान स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी थी. पुष्पांजलि अर्पित की और उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान दिया. प्रधानमंत्री मोदी के दौरे में वो पल भी आया, जब ताशकंद दौरे को कूटनीतिक से ज्यादा भावनात्मक बना दिया. भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का जोरदार स्वागत किया. भारतीय और उज्बेक संस्कृति का शानदार संगम दिखा. बॉलीवुड से लेकर कथक तक… ताशकंद में भारत की सांस्कृतिक ताकत की झलक दिखाई दी. यानी ताशकंद में संदेश साफ था, भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते सिर्फ सरकारों के बीच नहीं लोगों और संस्कृतियों के बीच भी हैं.
लेकिन इन रंगों के पीछे दौरे का असली एजेंडा पूरी तरह रणनीतिक था. राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ मुलाकात, प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत और फिर ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और शिक्षा से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स तक… दोनों देशों ने रिश्तों को नई दिशा देने पर चर्चा की. यानी एक तरफ योग और संस्कृति के जरिए दिलों को जोड़ा गया तो दूसरी तरफ यूरेनियम, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग के जरिए भारत के हितों को साधा गया.
विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने बताया, ‘उज़्बेकिस्तान SCO और संयुक्त राष्ट्र में भारत का एक अहम साझेदार है और BRICS में भी एक सहयोगी देश है, उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के बारे में भी विचारों का आदान-प्रदान किया, बातचीत के बाद एक आधिकारिक समारोह में कई क्षेत्रों से जुड़े 11 MoU और समझौतों का आदान-प्रदान किया गया.’
और अब ताशकंद से प्रधानमंत्री मोदी का अगला पड़ाव है बिश्केक. ताशकंद में द्विपक्षीय रिश्तों की जमीन तैयार करने के बाद अब बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी के सामने पूरा मध्य एशिया होगा. SCO के 26वें शिखर सम्मेलन में भारत की प्राथमिकता होगी सुरक्षा, संपर्क और अवसर.
ऐसे में सवाल है कि बिश्केक में मोदी-पुतिन मुलाकात से रूस के साथ रिश्तों को लेकर कोई बड़ा संदेश निकलने वाला है? क्या चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत से भारत-चीन रिश्तों में क्या नई तस्वीर बनने वाली है? क्या SCO के मंच से भारत आतंकवाद, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अपनी शर्तें रखने वाला है?
क्योंकि ताशकंद में भारत ने मध्य एशिया के एक अहम साझेदार के साथ रिश्ते मजबूत किए… अब बिश्केक में उसी मध्य एशिया के सबसे बड़े बहुपक्षीय मंच पर भारत की बारी है. मतलब ताशकंद में दोस्ती और ऊर्जा का दांव और बिश्केक में सुरक्षा और रणनीति का इम्तिहान… यानी मोदी का ये सेंट्रल एशिया दौरा सिर्फ दो देशों की यात्रा नहीं बल्कि ऊर्जा से लेकर सुरक्षा तक और संस्कृति से लेकर कूटनीति तक, मध्य एशिया में भारत की नई मौजूदगी का रोडमैप है. लेकिन ताशकंद की कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि भारत की असली रणनीति सिर्फ उज्बेकिस्तान तक पहुंच बनाने की नहीं है.
ताशकंद के बाद प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक पहुंचे, जहां SCO के मंच पर एक ही टेबल पर होंगे रूस के राष्ट्रपति पुतिन… चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और सेंट्रल एशिया के तमाम बड़े नेता. इसी मंच पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी होंगे. यानी ताशकंद में ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी और बिश्केक में रूस-चीन के साथ कूटनीतिक समीकरण. बिश्केक में होने वाला 26वां शंघाई सहयोग संगठन यूरेशिया मतलब यूरोप और एशिया के एक बहुत बड़े हिस्से को कवर करता है. भारत साल 2017 से SCO का स्थायी और पूर्ण सदस्य है.
इस मंच पर पीएम मोदी ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ का भारत का विजन रखेंगे. भारत इस मंच का उपयोग आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए करेगा, जो मध्य एशिया और भारत दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद हैं. रूस के साथ भारत की द्विपक्षीय बैठक रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.
अब नजर इस बात पर होगी कि प्रधानमंत्री मोदी SCO में क्या बड़ा करने वाले हैं और क्या पुतिन से होने वाली मुलाकात में रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर रक्षा और ऊर्जा तक कोई बड़ा संदेश निकलने वाला है. क्योंकि ताशकंद से बिश्केक तक… पीएम मोदी का सेंट्रल एशिया मिशन सिर्फ कूटनीति नहीं… मध्य एशिया में भारत की नई मौजूदगी का रोडमैप है.



