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10 मंजिला इमारत के मलबे में 32 घंटे दबी रही, केचप और चीज खाकर जिंदा रही वेनेजुएला की 12 साल की फैबियाना

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32 घंटे मलबे में दबी रही, खाया केचप और चीज, वेनेजुएला की लड़की ने सुनाई आपबीती

Last Updated:July 06, 2026, 20:43 IST

वेनेजुएला की 12 साल की फैबियाना भूकंप के दिन 10 मंजिला इमारत में थी. वो अपने पहली मंजिला फ्लैट में बैठी थी. इस बीच भूकंप के एक झटके से इमारत मलबे में दबदील हो गई. करीब 32 घंटे दबे रहने के बाद केचप और चीज खाकर जिंदा रही रही.32 घंटे मलबे में दबी रही, खाया केचप और चीज, वेनेजुएला की लड़की ने सुनाई आपबीतीZoom

करीब 32 घंटे तक मलबे में दबे रहने के बाद 12 साल की लड़की जिंदा बाहर आई है. वेनेजुएला में आए दो विनाशकारी भूकंपों के बीच से एक चमत्कार की कहानी सामने आई है. जिंदगी और मौत की जंग लड़ने फैबियाना ब्लांको ने सुरक्षित बाहर आने के बाद अपनी आपबीती सुनाई है. हैरानी की बात यह है कि मलबे में दबे होने के दौरान सिर्फ केचप और चीज खाकर उसने अपनी जान बचाई.

जब पल भर में जमींदोज हो गई इमारत

24 जून को वेनेजुएला में 7.5 तीव्रता का एक भयानक भूकंप आया था. इस दौरान ला गुएरा राज्य के काराबालेडा में फैबियाना की 10 मंजिला इमारत पूरी तरह ढह गई. फैबियाना उस वक्त पहली मंजिल पर अपने अपार्टमेंट में अकेली थी. उसने बताया कि अचानक से सब कुछ हिलने और टूटने लगा. दीवारें फटने लगीं. मुझे लगा कि वो अब नहीं बचेगी और कोई उसे बचाने नहीं आएगा.

मां का रो-रोकर बुरा हाल

भूकंप के वक्त फैबियाना की मां करीना ब्लांको अपने काम पर थीं. झटका महसूस होते ही वह पागलों की तरह गाड़ी चलाकर घर की तरफ भागीं. वहां पहुंचकर जब उन्होंने देखा कि उनकी बिल्डिंग का नामोनिशान मिट चुका है और सिर्फ मलबे का ढेर बचा है. वह मलबे पर दौड़ते हुए चिल्लाने लगीं कि उनकी बेटी मर गई. उन्होंने मान लिया था कि अब उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं है.

मलबे के नीचे सूझबूझ और ‘सॉस-चीज’ का सहारा

इस बीच मलबे के नीचे दबी फैबियाना ने हिम्मत नहीं हारी. उसका एक पैर दबा गया था, जिसमें असहनीय दर्द होता रहा. इसे उसने थोड़ा मलबा हटाकर सीधा किया. इसी दौरान उसे वहां केचप की एक बोतल और थोड़ा सा चीज मिल गया. इसे ही खाकर उसने खुद को जिंदा रखा. मोबाइल नेटवर्क न होने के बावजूद उसने अपने फोन पर एक वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया ताकि बाद में कोई इसे देख सके. वीडियो में उसने कहा कि यहां पूरा अंधेरा है, कोई बचाने वाला नहीं है. उन्हें मदद चाहिए.

चमत्कार से बची जान

कुछ घंटों बाद मलबे से सुरक्षित निकाली गई एक नर्स ने बचावकर्मियों को बताया कि फैबियाना अंदर जिंदा है. यह सुनते ही रोती हुई मां की आंखों में उम्मीद की किरण जग गई. विक्टर नाम के एक वॉलेंटियर ने मलबे के बीच से फैबियाना से संपर्क किया.

रात के अंधेरे में गाड़ियों की हेडलाइट जलाकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ. कंक्रीट को काटकर जब एक छोटा सा छेद किया गया, तो अंदर से फैबियाना मुस्कुराती हुई दिखी. उसकी यह मुस्कान देश भर में वायरल हो गई है. आखिरकार 3 जुलाई की सुबह करीब 2 बजे एक सुरंग बनाकर उसे बाहर निकाल लिया गया और वह सीधे अपनी मां के गले लग गई.

सिर्फ 3 लोग ही बच सके

इस भयानक हादसे में फैबियाना के बाएं पैर में फ्रैक्चर, कुछ खरोंचें और चोटें आई हैं. लेकिन उसकी जान पूरी तरह सुरक्षित है. फैबियाना ने कहा कि जब वो बाहर आई और पूरी बिल्डिंग को ढहा हुआ देखा, तो लगा जैसे मैं कोई टीवी सीरियल देख रही हैं.

इस भूकंप में अब तक 3342 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. फैबियाना की मां ने बताया कि उनकी 50 पड़ोसियों वाली बिल्डिंग में से सिर्फ 3 लोग ही जिंदा बच सके हैं. फैबियाना फिलहाल अपनी दादी के घर पर है. वह शारीरिक रूप से ठीक हो रही है, लेकिन उस डर से उबरने में उसे अभी थोड़ा वक्त लगेगा.

About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor

मैं इस समय App टीम का हिस्सा हूं. App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 4 साल से अधिक का अनुभव है और फिलहाल अभी सीनियर सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले इनशॉर्ट्स औ…और पढ़ें

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