बारिश के लिए 16 दिन का अखंड कीर्तन… बीकानेर में आज भी जीवित है इंद्र देव को मनाने की सदियों पुरानी परंपरा

Last Updated:August 07, 2026, 11:24 IST
बीकानेर के मरुस्थलीय इलाके में कम बारिश के बीच सदियों पुरानी आस्था फिर जीवंत हो उठी है. गंगाशहर के कुम्हारों के मोहल्ले में इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए 16 दिवसीय अखंड कीर्तन चल रहा है. चौबीसों घंटे जारी इस धार्मिक आयोजन में महिलाएं और पुरुष बारी-बारी से भजन-कीर्तन कर बारिश की कामना कर रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा छपनिया अकाल के समय से चली आ रही है और आज भी मानसून की उम्मीद का प्रतीक बनी हुई है.
बीकानेर. राजस्थान के मरुस्थलीय इलाके में बारिश सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद होती है. जब मानसून रूठने लगता है, तब बीकानेर में सदियों पुरानी आस्था फिर जाग उठती है. इन दिनों गंगाशहर के कुम्हारों के मोहल्ले में इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए 16 दिवसीय अखंड कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है. लोगों का विश्वास है कि इस सामूहिक आराधना के बाद इंद्र देव जरूर मेहरबान होते हैं और रेगिस्तान पर बारिश की फुहार बरसती है. यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बारिश के लिए सामूहिक आस्था और उम्मीद का प्रतीक बन गया है. सुबह महिलाएं अपने घरेलू कार्यों से निवृत्त होने के बाद शाम तक भजन-कीर्तन करती हैं, जबकि रात में पुरुष इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं.
चौबीसों घंटे चलने वाला यह अखंड कीर्तन पूरे मोहल्ले को भक्ति और एकता के सूत्र में बांधे हुए है. स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत बीकानेर के प्रसिद्ध छपनिया अकाल के बाद हुई थी. उस भीषण सूखे के समय लोगों ने वर्षा की कामना के लिए सामूहिक रूप से इंद्र देव की आराधना शुरू की थी. तब से यह परंपरा हर वर्ष निभाई जाती है. समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन बारिश के लिए सामूहिक प्रार्थना की यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ जारी है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब-जब जिले में बारिश की कमी हुई और इस तरह का अखंड कीर्तन आयोजित किया गया, तब-तब अच्छी वर्षा हुई. यही विश्वास आज भी लोगों को इस आयोजन से जोड़े हुए है. उनके लिए यह केवल पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक एकजुटता और बेहतर भविष्य की उम्मीद का प्रतीक है. बता दे कि इस वर्ष भी बीकानेर जिले में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है. खेतों में खड़ी फसलें पानी की बाट जोह रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून की बेरुखी चिंता का विषय बनी हुई है. ऐसे में हर किसी की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं और प्रार्थना है कि जल्द ही काली घटाएं उमड़ें और रेगिस्तान की प्यास बुझाएं.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
August 07, 2026, 11:24 IST



