345 बीघा जमीन, 4 करोड़ और गद्दी की लड़ाई! महंत देवानंद हत्या के पीछे की पूरी कहानी

Last Updated:June 26, 2026, 16:19 IST
Kota Mahant Murder Case : कोटा के ऐतिहासिक चंद्रेसल मठ में महंत देवानंद महाराज की हत्या ने सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सदियों पुराने धार्मिक संस्थान से जुड़े विवादों को भी उजागर कर दिया है. पांच जून की रात महंत पर उनके आवास के बाहर 26 बार चाकू से हमला किया गया और उन्हें बचने का मौका तक नहीं मिला. जांच में सामने आया है कि मठ की 345 बीघा जमीन, ट्रस्ट की गद्दी और करीब 4 करोड़ रुपये की राशि को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ था. पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक पुजारी और एक वकील भी शामिल हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि हत्या को अंजाम देने के लिए चार लोगों को एक लाख रुपये देने की साजिश रची गई थी. धमकियों, ट्रस्ट की खाली सीटों और पुराने विवादों के बीच अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस हत्याकांड के पीछे असली मकसद क्या था.
महंत देवानंद हत्या के पीछे की पूरी कहानी
कोटा. पांच जून की रात चंद्रेसल मठ के बाहर जो हुआ, उसने सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं छोड़ी. इस घटना ने सदियों पुराने एक मठ, उसकी गद्दी, करोड़ों रुपये की जमीन, आपसी खींचतान और सत्ता की लड़ाई को भी सामने ला दिया. महंत देवानंद महाराज पर उनके आवास के बाहर 26 बार चाकू से हमला किया गया. हमलावरों ने उन्हें संभलने तक का मौका नहीं दिया. पुलिस जांच में अब जो बातें सामने आ रही हैं, वे बताती हैं कि यह हत्या अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चल रहा विवाद और सोची-समझी साजिश हो सकती है.
कोटा के चंद्रेसल मठ को करीब 10वीं सदी का माना जाता है. यह मठ अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ बड़ी संपत्ति के कारण भी चर्चा में रहा है. मठ और उससे जुड़े ट्रस्ट के पास 345 बीघा जमीन है, जिसको लेकर वर्षों से विवाद चल रहा है. पुलिस ने इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें मठ के एक अन्य पुजारी नंदन बान और कोटा के वकील संतोष कुमार राय भी शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि हत्या को अंजाम देने के लिए चार लोगों को एक लाख रुपये देकर तैयार किया गया था.
मठ की जमीन और गद्दी को लेकर पुराना विवाद
देवानंद महाराज का असली नाम देव शंकर पोसवाल था. वे सवाई माधोपुर जिले के राजवाना गांव के रहने वाले थे. साल 2006 में उनकी शादी हुई थी, लेकिन 2018 में उन्होंने घर छोड़ दिया और संन्यास लेने की घोषणा कर दी. वे पहले जूना अखाड़े से जुड़े थे, लेकिन बाद में चंद्रेसल मठ से जुड़ गए. यही बदलाव भी कई लोगों को पसंद नहीं आया. मठ में बान पंथ की परंपरा मानी जाती है, जबकि जूना अखाड़ा गिरी पंथ से जुड़ा है. परंपरागत तौर पर इन दोनों पंथों के बीच आने-जाने को स्वीकार नहीं किया जाता. मठ के कुछ लोगों ने शुरू से ही देवानंद के आने पर आपत्ति जताई थी.
जब बेच दी गई थी मठ की जमीनविवाद की जड़ में 345 बीघा जमीन भी है. बताया जाता है कि कई दशक पहले मठ की करीब 500 बीघा जमीन बेच दी गई थी. बाद में ग्रामीणों ने अदालत में मामला दायर किया और 345 बीघा जमीन वापस लेने की कोशिश शुरू हुई. वर्ष 2016 में अदालत ने माना कि यह संपत्ति मठ की है. हालांकि जमीन से जुड़े मामलों के निपटारे तक एक रिसीवर नियुक्त किया गया. करीब 270 बीघा कृषि भूमि की हर साल नीलामी होती है और उससे मिलने वाली राशि बैंक खाते में जमा होती रही. बताया जा रहा है कि यह रकम अब करीब 4 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है.
धमकियां मिलीं, फिर 26 वार कर खत्म कर दी गई जिंदगी
देवानंद के परिवार का कहना है कि हत्या से करीब पांच महीने पहले उन्हें मठ छोड़ने की धमकियां मिलनी शुरू हो गई थीं. उनके भाई बुधराज गुर्जर के अनुसार धमकी भरे ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को भी दी गई हैं. जांच में सामने आया है कि इसी साल वकील संतोष कुमार राय मठ के मामलों में सक्रिय हुए. उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े विवादों में बिना फीस के पैरवी करने की पेशकश की थी. लेकिन धीरे-धीरे वे देवानंद के विरोधी माने जाने वाले लोगों के करीब आ गए. आरोप है कि ट्रस्ट की सात खाली सीटों पर अपने समर्थकों को लाकर मठ और उसकी संपत्तियों पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश भी हो रही थी.
मठ के लोगों ने बताया- पहले भी हो चुके थे हमलेदेवानंद भी पीछे हटने वाले नहीं थे. उन्होंने भी अपने समर्थकों के नाम ट्रस्ट में जोड़ने के लिए आवेदन किया था. इस मामले की सुनवाई 10 जून को होनी थी. लेकिन उससे पांच दिन पहले, यानी 5 जून को उनकी हत्या कर दी गई. पुलिस के अनुसार आदित्य वर्मा, अंकित बैरवा, पुष्पेंद्र सिंह और एक नाबालिग ने हत्या को अंजाम दिया. इन लोगों को एक लाख रुपये दिए गए थे. आदित्य वर्मा की पत्नी मिकल जॉर्ज पर सबूत मिटाने का आरोप है और उसे भी गिरफ्तार किया गया है. मठ में तैनात एक सुरक्षा गार्ड भी पुलिस की गिरफ्त में है. मठ से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां पहले भी हमले हुए थे. पूर्व महंत श्रवण बान पर लाठियों से हमला हुआ था. उनके बाद किशोर बान पर भी दो बार हमले हुए. लेकिन चंद्रेसल मठ के लंबे इतिहास में पहली बार किसी महंत की इस तरह हत्या हुई है. अब पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यह सिर्फ जमीन और ट्रस्ट पर कब्जे की लड़ाई थी, या इसके पीछे कोई और गहरी वजह भी छिपी हुई है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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