धरती की ओर बढ़ रहा है विनाश, UN ने प्रमुख ने दी चेतावनी – अल नीनो बना देगा पृथ्वी को मौत की भट्ठी

Last Updated:August 02, 2026, 12:58 IST
UN Chief warns Over El Nino Effect: संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहली बार धरती के धधकने और अल नीनो को लेकर वॉर्निंग दी गई है. एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि पहले से ही गर्म हो रही धरती को ये इफेक्ट किसी भट्ठी की तरह बना देगा और जीना मुश्किल हो जाएगा. चलिए जानते हैं कि क्या है इसके पीछे की वजह.
भट्ठी बन रही है धरती. (सांकेतिक तस्वीर)
आपने जलवायु परिवर्तन को लेकर बहुत कुछ सुना होगा. आप ये भी देख रहे हैं साल दर साल पृथ्वी पहले से ज्यादा गर्म होती जा रही है. अब संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ये चेतावनी दी है कि अल नीनो (El Niño) तेजी से मजबूत हो रहा है और यह पहले से ही जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही दुनिया के लिए नया खतरा बन सकता है. उन्होंने कहा कि अल नीनो अब सिर्फ आने वाला नहीं है, बल्कि पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और धरती पर इसका असर भी दिख रहा है.
गुटेरेस ने कहा कि इंसानों की गतिविधियों से हो रहे जलवायु परिवर्तन और एल नीनो का असर मिलकर दुनिया को ऐसे हालात की ओर ले जा रहे हैं, जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया. उन्होंने इसे अनजान क्षेत्र बताया, जो विनाश ले आएगा. गुटेरेस ने कहा कि इस साल दुनिया पहले ही कई चरम मौसम की घटनाएं देख चुकी है लेकिन असली तस्वीर तो अभी बाकी है. कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी, स्पेन और फ्रांस जैसे देशों में भीषण जंगलों में आग लगी और तेज गर्मी की वजह से हजारों लोगों की जान चली गई.
जानिए क्या है अल नीनो इफेक्ट?
अल नीनो दरअसल एक प्राकृतिक मौसम प्रणाली है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है. इस घटना का असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. इससे कहीं भीषण गर्मी, कहीं सूखा तो कहीं भारी बारिश और बाढ़ जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं. आज के स्थितियों को देखते हुए वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्र और वातावरण पहले से ज्यादा गर्म हो चुके हैं. अल नीनो का असर इतना ही नहीं है ये आगे के समय में और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है.
धरती बन जाएगी जलती हुई भट्ठी
गुटारेस ने चेतावनी दी कि यह तो सिर्फ शुरुआत है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक अल नीनो को बढ़ावा देने वाले प्रशांत महासागर का पानी इस समय सामान्य से लगभग 3 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो चुका है. अक्टूबर तक दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है. इससे अलग-अलग देशों में असर पड़ने वाला है.
अगर इसे सिर्फ गर्मी तक समझा जा रहा है, तो गलत है. भारत में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. वहीं मध्य अमेरिका, कैरेबियाई क्षेत्र, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, दक्षिण एशिया, यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सूखे और गर्म मौसम की आशंका है.
कैसे निपटेंगे हम ऐसी स्थिति से?
जलवायु संकट से निपटने के लिए गुटेरेस ने चार अहम कदम उठाने की अपील की है –
शहरों और देशों में गर्मी से बचाव की योजनाएं और समय रहते चेतावनी देने वाली व्यवस्था मजबूत की जाए.
मजदूरों और बाहर काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए गर्मी से जुड़े सुरक्षा मानक बनाए जाएं.
शहरों, घरों, स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण इस तरह किया जाए कि वे अत्यधिक गर्मी का सामना कर सकें.
सबसे जरूरी, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जाए, क्योंकि यही वैश्विक तापमान बढ़ने की सबसे बड़ी वजह हैं.
About the AuthorPrateeti Pandey
में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…
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First Published :
August 02, 2026, 12:58 IST



