4-5 कदम का रन अप और 10 नो बॉल, टेस्ट में अव्वल हैं रवींद्र जडेजा, आंकड़े खोल रहे पोल

नई दिल्ली. इंटरनेशनल क्रिकेट में जब मैच का पासा एक-एक रन और एक-एक विकेट से पलटता है, तब गेंदबाज की एक छोटी सी गलती पूरी टीम की मेहनत पर पानी फेर सकती है. कोलंबो के ऐतिहासिक मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां भारतीय स्पिनरों ने अपनी गेंदों की धार से ज्यादा अपनी पैरों की लाइन को लेकर सुर्खियां बटोरीं. मुकाबले के चौथे दिन का खेल खत्म होने तक भारतीय स्पिन आक्रमण 10 बार क्रीज से आगे निकलकर नो-बॉल फेंक चुका था. यह कोई मामूली आंकड़ा नहीं है. इंटरनेशनल स्टेज पर, जहां सटीकता ही सफलता की कुंजी मानी जाती है, वहां किसी स्पिनर का बार-बार नो बॉल फेंकना एक ऐसा ‘अक्षम्य अपराध’ है जिसकी उम्मीद कम से कम भारतीय टीम के अनुभवी स्पिनरों से तो बिल्कुल नहीं की जाती.
वर्ष 2021 के बाद से टेस्ट क्रिकेट के आंकड़ों पर नजर डालें, तो किसी एक टेस्ट मैच में स्पिन आक्रमण द्वारा सबसे अधिक नो-बॉल फेंकने की लिस्ट में कोलंबो टेस्ट अब प्रमुखता से दर्ज हो चुका है. इस लिस्ट में शीर्ष पर साल 2023 में मीरपुर में बांग्लादेश के खिलाफ खेला गया मुकाबला है, जहां अफगानिस्तान के स्पिनरों ने अनुशासनहीन गेंदबाजी करते हुए मैच में रिकॉर्ड 15 नो-बॉल फेंकी थीं. इसके बाद दूसरे स्थान पर भारत बनाम इंग्लैंड का 2021 चेन्नई टेस्ट आता है, जहां भारतीय स्पिनरों ने 14 बार नो-बॉल करने की भूल की थी.
रवींद्र जडेजा नो बॉल फेंकने में भारतीय स्पिनरों में सबसे आगे हैं.
अब कोलंबो का यह एसएससी टेस्ट इस लिस्ट में 10 नो-बॉल के साथ तीसरे स्थान पर आ चुका है, जिसने 2021 में नॉर्थ साउंड में वेस्टइंडीज के खिलाफ श्रीलंका (9 नो-बॉल) और 2024 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत (9 नो-बॉल) के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. टेस्ट मैच के चौथे दिन ही 10 नो-बॉल हो जाना यह दर्शाता है कि भारतीय स्पिनर कोलंबो की पिच से मिल रही मदद के बीच अपनी लय और अनुशासन पूरी तरह खो चुके थे.
बाएं हाथ के स्पिनरों का अजीबोगरीब ‘नो-बॉल प्रेम’दिलचस्प और हैरान करने वाली बात यह है कि 2021 के बाद से टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा नो-बॉल फेंकने वाले दुनिया के शीर्ष छह स्पिनरों की सूची में सभी के सभी बाएं हाथ के आर्म स्पिनर (Left-arm spinners) शामिल हैं. इस लिस्ट में सबसे ऊपर भारत के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) का नाम आता है. जडेजा अपनी सटीक लाइन-लेंथ और तेज गति से ओवर खत्म करने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन 2021 के बाद से टेस्ट क्रिकेट में 88 नो-बॉल फेंककर वे इस अनचाहे रिकॉर्ड की लिस्ट में सबसे आगे खड़े हैं. उनके बाद पाकिस्तान के नोमान अली 40 नो-बॉल के साथ दूसरे स्थान पर हैं. श्रीलंका के लसिथ एम्बुलडेनिया 33 नो-बॉल के साथ तीसरे, इंग्लैंड के जैक लीच 19 नो-बॉल के साथ चौथे, जबकि वेस्टइंडीज के जोमेल वारिकन और अफगानिस्तान के जहीर खान 17-17 नो-बॉल के साथ इस सूची में शामिल हैं.
रवींद्र जडेजा का इस लिस्ट में इतने बड़े अंतर से शीर्ष पर होना यह साबित करता है कि क्रीज से ओवरस्टेप करना उनकी एक पुरानी और गंभीर समस्या बन चुका है, जिसे वे अब तक सुधारने में नाकाम रहे हैं.
दूसरी पारी में गैर-जरूरी गलतियां और बढ़ता दबावकोलंबो टेस्ट की दूसरी पारी में भारतीय स्पिनरों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ तौर पर झलका. जब टीम को श्रीलंका को सस्ते में समेटने और मैच पर शिकंजा कसने के लिए कसी हुई गेंदबाजी की सख्त जरूरत थी, तब भारतीय स्पिनरों ने बार-बार क्रीज लांघकर विरोधी टीम को न केवल मुफ्त के रन दिए, बल्कि अतिरिक्त गेंदें खेलने का मौका भी थमा दिया.
टेस्ट क्रिकेट जैसे उच्चतम स्तर पर ऐसी ‘अनफोर्स्ड एरर्स’ (बिना दबाव के की गई गलतियां) का कोई औचित्य नहीं होता. जब कोई तेज गेंदबाज 145-150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़कर आता है, तब कुछ सेंटीमीटर से क्रीज लांघ जाना फिर भी समझा जा सकता है. लेकिन एक स्पिनर, जो महज 4-5 कदम के छोटे रन-अप के साथ आता है, अगर वह बार-बार ओवरस्टेप कर रहा है, तो यह सीधा-सीधा एकाग्रता में कमी और अनुशासनहीनता को दर्शाता है.
नो-बॉल न केवल बल्लेबाज को एक अतिरिक्त रन और गेंद देती है, बल्कि कई बार यह टीम के मनोबल को भी तोड़ देती है. कल्पना कीजिए कि एक स्पिनर अपनी बेहतरीन गेंद पर बल्लेबाज को कैच या स्टंप आउट करा दे और जश्न मनाने के तुरंत बाद अंपायर का हाथ नो-बॉल के लिए उठ जाए यह झटका पूरी टीम के लिए भारी पड़ता है.



