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6.52 मिनट का गाना सुनकर तड़प उठती है रूह, बूढ़ों को भी चढ़ जाती है जवानी, दिलजले बनकर फिरने लगे थे आशिक

 

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नई दिल्ली: साल 1996 में आई फिल्म ‘जीत’ का रोमांटिक गाना उस दौर का पॉपुलर गाना है, जिसे कविता कृष्णमूर्ति ने गाया. नदीम-श्रवण ने इसका संगीत तैयार किया, गीतकार समीर ने इसके बोल लिखे. गाना अपनी गहरी आत्मीय धुन की वजह से पॉपुलर हुआ, जो एक जुनूनी, मगर ट्रेजिक लव स्टोरी को बयां करती है. गाने के जरिये प्रेमी में लाचारी और तड़प को बयां किया गया है. गाने की पंक्ति ‘जुर्म बस इतना है, उनसे प्यार करते हैं’ इसके मर्म को बयां कर देता है. गाने को तब्बू और सनी देओल पर फिल्माया गया है, जिसमें तब्बू डांस करती दिखाई दे रही हैं. आज भी यह गाना पु्राने दिनों की यादें ताजा कर देता है, जब हर एक आशिक गाने में अपने जज्बातों की झलक देखता था.

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6.52 मिनट का गाना सुनकर तड़प उठती है रूह, बूढ़ों को भी चढ़ जाती है जवानी

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