जहां कभी गूंजते थे आजादी के नारे, आज वहीं होता है ये काम… सिकंदराबाद की छुपी कहानी

जहां कभी गूंजते थे आजादी के नारे, आज वहीं होता है ये काम… जानें एक छुपी कहानी
Sikandarabad Old Jail Story: तेलंगाना के सिकंदराबाद का मोंडा मार्केट आज भले ही भीड़, दुकानों और व्यापार के लिए जाना जाता हो, लेकिन इसी हलचल के बीच एक ऐसी इमारत खड़ी है जो भारत के आज़ादी के संघर्ष की खामोश गवाह रही है. जिसे आज लोग ‘ओल्ड जेल खाना’ के नाम से जानते हैं, वह कभी ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाने वाले क्रांतिकारियों की कैदगाह हुआ करती थी. 1826 में बनी इस इमारत को पहले विश्राम गृह के रूप में इस्तेमाल किया गया, लेकिन 1857 के बाद इसे जेल में बदल दिया गया. यहां बनी कालकोठरियों में कई स्वतंत्रता सेनानियों ने यातनाएं सही और अपने संघर्ष की कहानी इन दीवारों में दर्ज कर दी. समय के साथ यह जगह बदल गई और अब यहां दुकानों की कतारें हैं, जहां लोग रोजमर्रा की खरीदारी करते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस बाजार की जमीन पर इतिहास की गहरी छाप छिपी है. यह जगह आज भी अतीत और वर्तमान के बीच एक अनोखा पुल बनकर खड़ी है.




