राजस्थान में ‘ट्रिपल टेस्ट’ में उलझा ओबीसी आरक्षण, पंचायत-निकाय चुनावों पर छाए संकट के बादल

Last Updated:April 16, 2026, 11:55 IST
Rajasthan Political News : राजस्थान में ओबीसी आरक्षण ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया में उलझ गया है. इसके कारण प्रदेश के पंचायत-निकाय चुनाव अब नवंबर दिसंबर तक टलते नजर आ रहे हैं. इस देरी पर भड़की कांग्रेस बीजेपी की भजनलाल सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगा रही है तो वहीं सरकार इसे कानूनी बाध्यता बता रही है. पंचायत-निकाय चुनाव में देरी की वजह ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया है जो अभी तक पूरी नहीं हो सकी है. 
राजस्थान सरकार ने कोर्ट से चुनाव के लिए छह महीने का समय मांगा है.
जयपुर. राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव अब आगामी नवंबर-दिसंबर तक टलते नजर आ रहे हैं. इसके पीछे बड़ी वजह है ओबीसी आरक्षण की ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया. उसके बाद अब सत्तारुढ़ बीजेपी और विपक्षी पार्टी कांग्रेस में तकरार और बढ़ती जा रही है. कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता के मद में चूर बीजेपी की भजनलाल सरकार लोकतंत्र का गला घोंटना चाहती है. वहीं बीजेपी ने तर्क दिया है कि यह कानूनी बाध्यता है. इस प्रक्रिया को पूरा किए बिना चुनाव करवाना संभव नहीं है. बीजेपी-कांग्रेस की इस नूरा-कुश्ती में राज्य चुनाव आयोग की चुनाव करवाने की तैयारियां अधर में रह गई हैं.
भजनलाल सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव करवाने के लिए हाईकोर्ट से छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा है. उसके बाद से सियासी हलकों में हलचल और तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य है. इस ट्रिपल टेस्ट के लिए पहला स्टेप ओबीसी वर्ग की वास्तविक जनसंख्या का आकलन होना चाहिए. दूसरा स्टेप उस आधार पर तर्क सम्मत आरक्षण का निर्धारण होना चाहिए. तीसरा स्टेप यह आरक्षण कुल आरक्षण के 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर ही होना चाहिए.
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव कराना कानूनी रूप से संभव नहीं हैओबीसी के आरक्षण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए भजनलाल सरकार की ओर से मई 2025 में ओबीसी आयोग का गठन किया गया था. लेकिन आयोग की रिपोर्ट अब तक अंतिम रूप नहीं ले सकी है. असल में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पेश करने की समय-सीमा तीन बार बदली जा चुकी है. आयोग की रिपोर्ट में लग रहे वक्त के चलते इसकी मियाद हाल ही में एक बार फिर सितंबर तक बढ़ाई गई है. जब तक आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण का नया ढांचा तय नहीं होता तब तक चुनाव कराना कानूनी रूप से संभव नहीं है.
राजस्थान में कितने हैं निकाय और पंचायतें
राजस्थान में कुल 309 नगर निकाय हैं. इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाए शामिल हैं. वहीं पंचायती राज संस्था में जिला स्तर पर कुल 41 जिला परिषद हैं. उनमें 1411 वार्ड शामिल हैं. इनके अलावा कुल 457 पंचायत समितियां हैं. इनमें 8359 पंचायत समिति वार्ड हैं. पूरे सूबे में परिसीमन के बाद अब 14403 ग्राम पंचायतें हो गई हैं. इनमें 1 लाख 30 हजार 585 वार्ड शामिल हैं.
सरकार की मंशा ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत चुनाव कराने की हैराज्य सरकार ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की समय सीमा बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है. सरकार ने अदालत से छह महीने का अतिरिक्त समय देने की मांग की है ताकि चुनाव प्रक्रिया को कानूनी रूप से पूरा किया जा सके. यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि न्यायालय में ओबीसी सर्वे की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा जाएगा. उनका कहना है कि बिना सर्वे और आरक्षण के उचित निर्धारण के चुनाव कराना संभव नहीं है. इसी आधार पर सरकार ने दिसंबर तक का समय मांगा है. सरकार की मंशा ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ कराने की है. यदि अदालत से अनुमति मिलती है तो नवंबर दिसंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी संपन्न कराने की योजना है.
गहलोत बोले निकाय और पंचायत चुनाव संविधान का पार्ट हैराजनीतिक स्तर पर पंचायत-निकाय चुनाव के इस मुद्दे ने तूल पकड़ रखा है. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है ताकि स्थानीय स्तर पर सत्ता में बने रहने का फायदा उठाया जा सके. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी संविधान में बनाए नियमों का गला घोंटने का काम कर रही है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव संविधान का पार्ट है. गहलोत ने सरकार पर आरोप लगाया कि अगर उसका संविधान में विश्वास होता तो चुनाव होते. गहलोत ने कहा कि कोऑपरेटिव के चुनाव हुए तो 10 साल का समय हो गया है. पंचायत और निकाय चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट कह चुका है तो चुनाव करवाने चाहिए. गहलोत ने कहा कि यह संविधान का ब्रेकडाउन है. इस मामले में राष्ट्रपति और राज्यपाल को हस्तक्षेप करना चाहिए.
खर्रा बोले-कांग्रेस का अब बोलने का कोई हक भी नहीं रह जाता हैइधर राज्य सरकार ने चुनाव नहीं करवाने के मामले में ओबीसी कमिशन की रिपोर्ट का प्राप्त नहीं होना माना है और वह ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ के तहत चुनाव करवाने की मंशा जता रही है. कांग्रेस ने आरोप लगाया तो राज्य के यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसा भी समय देखा है जब 13 साल तक चुनाव ही नहीं करवाए थे तो कांग्रेस का अब बोलने का कोई हक भी नहीं रह जाता है. अब सबकी नजर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर टिकी है. कोर्ट के फैसले के बाद ही चुनाव की दिशा तय होगी. अगर रिपोर्ट समय पर आई तो नवंबर दिसंबर में चुनाव संभव होंगे. अन्यथा इनके और आगे खिसक जाने की भी संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर…और पढ़ें
न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 16, 2026, 11:52 IST



