गर्मी में देसी एनर्जी का राज, सत्तू का शरबत बनता जा रहा भरतपुर की पहली पसंद, ठंडक और ताकत दोनों का कॉम्बो

Last Updated:April 16, 2026, 12:16 IST
Sattu ka Sharbat : भीषण गर्मी में भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी सत्तू के शरबत पर भरोसा कर रहे हैं. यह देसी पेय शरीर को ठंडक देने के साथ तुरंत ऊर्जा भी देता है. किसान और मजदूरों की पहली पसंद बने सत्तू में प्रोटीन और पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जो गर्मी से बचाव में बेहद कारगर साबित हो रहे हैं.
भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां तापमान लगातार नए रिकॉर्ड छू रहा है. वहीं भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी पारंपरिक और देसी उपायों पर भरोसा करते नजर आ रहे हैं. इन्हीं में से एक है, सत्तू का शरबत जिसे यहां का सबसे ताकतवर और लोकप्रिय प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक माना जाता है. तेज धूप और लू के बीच यह देसी पेय न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाता है. बल्कि तुरंत ऊर्जा देने का भी काम करता है.
ग्रामीण क्षेत्रों में सत्तू का उपयोग कोई नई परंपरा नहीं है.बल्कि यह वर्षों से लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा रहा है. खासकर खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर सुबह घर से निकलने से पहले सत्तू का शरबत जरूर पीते हैं. ताकि दिनभर की कड़ी मेहनत के दौरान शरीर में पानी और ऊर्जा की कमी न हो स्थानीय लोगों का मानना है कि सत्तू पीने से शरीर लंबे समय तक तरोताजा बना रहता है और थकान कम महसूस होती है.
सत्तू बनाने की प्रक्रिया भी पूरी तरह से पारंपरिक और प्राकृतिक होती है. इसके लिए गेहूं जौ और चने को पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है. फिर उन्हें धीमी आंच पर भून लिया जाता है. भूनने के बाद इन अनाजों को पीसकर बारीक आटा तैयार किया जाता है. जिसे सत्तू कहा जाता है.यही सत्तू बाद में शरबत बनाने के काम आता है.
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सत्तू का शरबत तैयार करने के लिए एक गिलास ठंडा पानी लिया जाता है. जिसमें दो से तीन चम्मच सत्तू मिलाया जाता है. इसके बाद स्वाद के अनुसार इसमें चीनी या गुड़ डाला जाता है. और अच्छी तरह घोल लिया जाता है. कई लोग इसमें थोड़ा सा नमक और नींबू भी मिलाते हैं. जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. यह पेय कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाता है और तुरंत पीने योग्य होता है.
सत्तू में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं. गर्मियों में जब शरीर से पसीने के रूप में पानी और जरूरी तत्व बाहर निकल जाते हैं. तब सत्तू का सेवन उन्हें संतुलित करने में मदद करता है.यही कारण है कि इसे प्राकृतिक और सुरक्षित एनर्जी ड्रिंक के रूप में देखा जाता है.
से बचाव के लिहाज से भी सत्तू बेहद कारगर माना जाता है. ग्रामीण बुजुर्गों का कहना है.कि नियमित रूप से सत्तू पीने से शरीर अंदर से ठंडा रहता है और हीट स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है. यही वजह है कि आज भी भरतपुर के गांवों में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इस देसी पेय को बड़े चाव से पीते हैं.आधुनिक समय में जहां बाजार में कई तरह के एनर्जी ड्रिंक उपलब्ध हैं. वहीं सत्तू अपनी सादगी सस्तेपन और स्वास्थ्य लाभ के कारण लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.
यह न केवल जेब पर हल्का पड़ता है बल्कि पूरी तरह से प्राकृतिक होने के कारण किसी भी तरह के साइड इफेक्ट का खतरा भी नहीं होता भीषण गर्मी के इस दौर में सत्तू का शरबत भरतपुर के ग्रामीण जीवन का एक अहम हिस्सा बना हुआ है. यह देसी पेय न केवल परंपरा की पहचान है. बल्कि सेहत का भी भरोसेमंद साथी साबित हो रहा है. आज जरूरत है कि इस पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाया जाए ताकि नई पीढ़ी भी इसके फायदे समझ सके और इसे अपनाए.
First Published :
April 16, 2026, 12:16 IST



