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बीड़ा से बिजनेस तक, छत्तीसगढ़ के छुईखदान की महिलाओं ने पान को बना दिया ब्रांड – Chhattisgarh News

Last Updated:January 18, 2026, 22:24 IST

छत्तीसगढ़ के छुईखदान का प्रसिद्ध पान एक बार फिर चर्चा में है. वर्ष 2000 से संचालित मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की 12 महिलाएं पान से वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार कर रही हैं. पान फ्रेश, बीड़ा, लड्डू, चाय और पाउडर की सप्लाई रायपुर सहित बड़े शहरों तक हो रही है. अब तक 70 हजार का शुद्ध मुनाफा हो चुका है.

CG News : छत्तीसगढ़ का छुईखदान क्षेत्र कभी पूरे प्रदेश में अपने खास और सुगंधित पान के लिए पहचाना जाता था. यहां का पान न सिर्फ स्थानीय बाजारों में, बल्कि आसपास के जिलों में भी काफी प्रसिद्ध था. हालांकि समय के साथ बाजार की उपेक्षा, प्रोत्साहन की कमी और बदलती उपभोक्ता आदतों के कारण छुईखदान के पान की पहचान धीरे-धीरे फीकी पड़ती चली गई. लेकिन अब एक बार फिर छुईखदान का पान सुर्खियों में है और इसके पीछे मेहनत व संकल्प की एक प्रेरक कहानी छिपी है, जिसे यहां की महिलाओं ने गढ़ा है.

संगठित होकर पान को आजीविका का मजबूत साधन बना रही

वर्ष 2000 से संचालित छुईखदान की मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह ने पान को दोबारा पहचान दिलाने की पहल की है. इस समूह से वर्तमान में 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो संगठित होकर पान को आजीविका का मजबूत साधन बना रही हैं. समूह की सचिव आशा मोहबिया बताती हैं कि एक समय छुईखदान का पान बेहद प्रसिद्ध था, लेकिन बाजार और सरकारी प्रोत्साहन के अभाव में इसका उत्पादन और बिक्री दोनों प्रभावित हो गए थे. इससे पान की खेती और उससे जुड़े काम धीरे-धीरे सिमटते चले गए.

पहचान और मांग दोनों बढ़ रही

इस स्थिति को बदलने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और कृषि महाविद्यालय के सहयोग से महिला समूह ने पान आधारित वैल्यू एडेड उत्पादों पर काम शुरू किया. महिलाओं ने पारंपरिक पान को नए स्वरूप में बाजार तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई. अब महिलाएं घर से ही पान फ्रेश, बीड़ा पान, पान का लड्डू, पान की चाय और पान का पाउडर जैसे कई नवाचार उत्पाद तैयार कर रही हैं. इन उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा जा रहा है, जिससे इनकी पहचान और मांग दोनों बढ़ रही हैं.

पान से बने ये उत्पाद स्वाद में अलग होने के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माने जाते हैं। पान पाचन क्रिया को बेहतर करने, मुंह की दुर्गंध दूर करने और शरीर को ऊर्जा देने में सहायक माना जाता है. यही वजह है कि पान से बने इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. महिला समूह द्वारा तैयार उत्पादों की सप्लाई अब केवल रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि बॉम्बे और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों तक भी पहुंच चुकी है. वहां से विशेष ऑर्डर के माध्यम से इन उत्पादों की मांग आई, जिसे समूह की महिलाओं ने समय पर पूरा किया.

बीते छह महीनों से महिलाएं नियमित रूप से पान से बने उत्पादों का निर्माण कर रही हैं और इससे उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिलने लगा है. नवंबर माह में राज्योत्सव के दौरान लगाए गए स्टॉल के माध्यम से समूह ने 32 हजार रुपये की बिक्री की. वहीं अब तक लगभग 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हो चुका है. आने वाले समय में उत्पादन और बाजार विस्तार के साथ इस मुनाफे के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

About the AuthorAmit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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Raipur,Raipur,Chhattisgarh

First Published :

January 18, 2026, 22:24 IST

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